गोल्ड ETF या गोल्ड फंड? किसमें निवेश करना रहेगा फायदेमंद, क्या फर्क है दोनों में

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Gold ETF or Gold Fund? Know Which Gold Investment Option Suits You Best

सोने में निवेश करने के लिए अब आपके पास सिर्फ फिजिकल ज्वेलरी या सोने के सिक्के खरीदने का विकल्प नहीं है. आप सोने में Gold ETF, Gold Mutual Fund, Digital Gold जैसे अलग-अलग तरीकों से निवेश कर सकते हैं. इनमें से भी गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड निवेशकों के बीच सबसे लोकप्रिय विकल्प माने जाते हैं.

दोनों एक जैसे ही समझ आते हैं, लेकिन इनमें काफी अंतर है. दोनों के लिए अंडरलाइंग एसेट गोल्ड है यानी दोनों ही सोने की वास्तविक कीमत को ही ट्रैक करते हैं. लेकिन दोनों का तरीका अलग है. गोल्ड ETF शेयर बाजार में खरीदा-बेचा जाता है, जबकि गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में आप सीधे म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करते हैं. यही अंतर निवेश करने के तरीके, खर्च, सुविधा और लिक्विडिटी में भी फर्क पैदा करता है.

तो चलिए समझते हैं कि गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में क्या अंतर है, किस तरीके से आप इनमें निवेश कर सकते हैं और आपके लिए दोनों में से क्या बेहतर निवेश विकल्प रहेगा.

Gold ETF क्या होता है?

गोल्ड ETF को समझने से पहले आपको समझना होगा कि ETF क्या होता है यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड. ये कई तरह के होते हैं, जैसे सेसेंक्स ETF, निफ्टी ETF. इसको ऐसे समझिए कि अगर आपने शेयर बाजार से इंफोसिस का शेयर खरीदा जिसकी वैल्यू 1 लाख रुपये है, तो आपका पैसा सिर्फ एक कंपनी में लगा है. मगर आपने निफ्टी ETF में पैसा लगाया है तो आपके 1 लाख रुपये निफ्टी की 50 कंपनियों में लग जाएंगे.

अब गोल्ड ETF भी ऐसे काम करता है. गोल्ड ETF एक ऐसा म्यूचुअल फंड होता है जो आपके पैसे को सीधा फिजिकल गोल्ड में (आमतौर पर 99.5% शुद्धता वाले) निवेश करता है, मगर जरूरी नहीं कि सारा पैसा गोल्ड में ही निवेश किया जाए. इसको गोल्ड-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स जैसे कि एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCDs) में निवेश किया जा सकता है, रिजर्व बैंक की किसी गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में निवेश किया जा सकता है या फिर गोल्ड स्टॉक्स में भी निवेश किया जा सकता है. अंत में यही समझ लीजिए कि आपका पैसा गोल्ड में ही निवेश हो रहा है.

ये फंड स्टॉक मार्केट एक्सचेंज में ट्रेड करता है, जैसे कि कोई रिलायंस, इंफोसिस या फिर ICICI बैंक का शेयर करता है. गोल्ड ETF का 1 यूनिट आमतौर पर 1 ग्राम गोल्ड को दर्शाता है. जिसे कि हम NAV यानी नेट एसेट वैल्यू कहते हैं, जैसा कि म्यूचुअल फंड में होता है. ये गोल्ड की कीमतों को ट्रैक करता है, यानी जब गोल्ड की कीमतें चढ़ती हैं तो आपके गोल्ड ETF का NAV भी बढ़ता है, जब सोने के भाव गिरते हैं तो गोल्ड ETF का NAV भी गिरता है.

एक बात नोट करने वाली है, भले ही गोल्ड ETF गोल्ड के भाव को ट्रैक करता है, लेकिन ETF का रिटर्न सोने की कीमत से बिल्कुल बराबर नहीं होता. क्योंकि गोल्ड ETF में आपके पैसे को एक एसेट मैनेजमेंट कंपनी यानी AMC मैनेज करती है, इसलिए इसके खर्चे भी होते हैं जैसे कि एक्सपेंस रेश्यो. इसके अलावा ट्रैकिंग एरर और मार्केट की डिमांड-सप्लाई की वजह से थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है.

गोल्ड ETF में निवेश कैसे करें?

गोल्ड ETF खरीदने के लिए आपके पास डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट होना जरूरी है. जिस तरह आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, उसी तरह स्टॉक एक्सचेंज पर गोल्ड ETF की यूनिट खरीद सकते हैं.

मान लीजिए किसी गोल्ड ETF की बाजार कीमत ₹100 है. अगर आप 100 यूनिट खरीदते हैं तो करीब ₹10,000 का निवेश होगा, ब्रोकरेज और दूसरे चार्जेस भी लग सकते हैं.
गोल्ड ETF का एक बड़ा फायदा ये है कि इसे शेयर बाजार के ट्रेडिंग के दौरान खरीदा और बेचा जा सकता है, यानी आपको म्यूचुअल फंड की तरह सिर्फ दिन के अंत की NAV पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.

गोल्ड म्यूचुअल फंड क्या होता है?

गोल्ड फंड्स एक म्यूचुअल फंड होता है, जो कि निवेश करता है सीधा गोल्ड ETFs में. इसमें सीधे तौर पर गोल्ड में निवेश नहीं किया जाता है. मतलब ये कि आपने गोल्ड फंड खरीदा, ये पैसा गोल्ड ETF में लगेगा और गोल्ड ETF चलता है गोल्ड की कीमत पर. गोल्ड ETF और गोल्ड फंड में एक बड़ा अंतर ये होता है कि गोल्ड फंड में निवेश के लिए आपको डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं होती है.

गोल्ड ETF और गोल्ड फंड में क्या अंतर है?

SIP की सुविधा: आप गोल्ड फंड में SIP के जरिए भी निवेश कर सकते हैं, ये गोल्ड फंड में निवेश का सबसे बड़ा फायदा है. लेकिन गोल्ड ETF में आप SIP के जरिए निवेश नहीं कर सकते हैं, लेकिन आप नियमित रूप से निवेश कर सकते हैं, लेकिन वो रेगुलर SIP जैसा आसान नहीं है, जिसमें एक तय तारीख को अपने आप SIP के जरिए निवेश हो जाता है.

न्यूनतम निवेश: गोल्ड ETF में 1 यूनिट की वैल्यू 1 ग्राम सोने के बराबर भी पहुंच जाती है. इसलिए यहां पर न्यूनतम निवेश थोड़ा ज्यादा है, जैसे कि आज की तारीख में 1 ग्राम गोल्ड की कीमत ₹14,800 रुपये से भी ज्यादा है. मगर गोल्ड फंड में आप 500 रुपये से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं.

लिक्विडिटी: गोल्ड फंड और गोल्ड ETF दोनों ही लिक्विडिटी ऊंची होती है. मतलब आप जब चाहें इन्हें खरीद या बेच सकते हैं. इसमें परेशानी नहीं आती है. गोल्ड फंड का रिडम्पशन AMC करती है उस दिन के NAV के आधार पर, लेकिन गोल्ड ETF को शेयर बाजार की ट्रेडिंग अवधि के दौरान कभी भी बेच खरीद सकते हैं.

एग्जिट लोड: गोल्ड ETF की ट्रेडिंग शेयर बाजार में होती है, इसलिए जब चाहें इसे बेच सकते हैं, इस पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगता है. मगर गोल्ड फंड में एग्जिट लोड लगता है. अगर आप 1 साल से पहले गोल्ड फंड को बेचते हैं तो 1%-2% तक भी एग्जिट लोड लग सकता है.

एक्सपेंस रेश्यो: गोल्ड फंड और गोल्ड ETF दोनों में ही एक्सपेंस रेश्यो लगता है क्योंकि दोनों ही AMC की ओर से मैनेज किए जाते हैं. गोल्ड ETF में गोल्ड फंड के मुकाबले थोड़ा कम एक्सपेंस रेश्यो लगता है.

रिटर्न: गोल्ड ETF में चूंकि डायरेक्ट गोल्ड में निवेश किया जाता है, इसलिए इसमें थोड़ा सा रिटर्न ज्यादा मिलता है. गोल्ड फंड में रिटर्न थोड़ा कम मिलता है क्योंकि ये ETF के जरिए इनडायरेक्ट तरीके से गोल्ड होल्डिंग होती है.

टैक्स कैसे लगता है?

दोनों ही निवेश विकल्पों में टैक्सेशन को लेकर बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है. तो चलिए समझते हैं कि गोल्ड ETF और गोल्ड फंड में कैसे टैक्स लगता है.

गोल्ड ETF: इसे लिस्टेड सिक्योरिटी की तरह देखा जाता है. 12 महीने से ज्यादा रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर 12.5% टैक्स लगता है. 12 महीने या उससे कम अवधि में बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है.

गोल्ड फंड: यहां होल्डिंग पीरियड अनलिस्टेड म्यूचुअल फंड यूनिट्स के हिसाब से देखी जाती है. 24 महीने से ज्यादा होल्डिंग पर LTCG और 12.5% टैक्स लागू होता है, जबकि 24 महीने या उससे कम होल्डिंग पर कैपिटल गेन स्लैब रेट के हिसाब से टैक्सेबल होता है.

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