₹10,000 करोड़ के Clean Energy IPO को SEBI ने क्यों रोका? अब वजह आई सामने!

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Why SEBI Pauses Inox Clean Energy’s Rs 10,000 Crore IPO? Here’s What We Know

Inox Clean Energy के 10,000 करोड़ रुपये के IPO को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है. 1 अक्टूबर को SEBI ने कंपनी के IPO से जुड़े ड्राफ्ट पेपर पर अपनी मंजूरी की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया था. उस समय SEBI ने ये नहीं बताया था कि आखिर IPO को क्यों रोका गया है. अब इसकी वजह सामने आती दिख रही है.

न्यूज पोर्टल मनीकंट्रोल की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट रेलुगेटर SEBI ने यह कदम INOXGFL Group की कुछ कंपनियों से जुड़े मामलों में चल रही जांच और पूछताछ की वजह से उठाया है. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि खास तौर पर Inox Green Energy Services की ओर से Inox Clean Energy और उसकी तीन सब्सिडियरी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने से जुड़े कुछ लेनदेन रेगुलेटर की जांच के दायरे में हैं.

ध्यान रहे कि SEBI ने आधिकारिक तौर पर IPO को रोकने की वजह नहीं बताई है, ये जानकारी मनीकंट्रोल ने सूत्रों के हवाले से दी है. मनीकंट्रोल के मुताबिक, SEBI और Inox Clean Energy से इस मामले में जवाब मांगा गया था, लेकिन अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं आया है.

ओनरशिप को लेकर क्या विवाद है?

इस पूरे मामले को समझने से पहले ये जानना जरूरी है कि Inox Clean Energy की ओनरशिप को लेकर क्या विवाद है, इसकी ओनरशिप कैसे बदली. Inox Clean Energy पहले Inox Green Energy Services की 100% सब्सिडियरी थी. यानी कंपनी की पूरी हिस्सेदारी Inox Green के पास थी, लेकिन 29 नवंबर 2024 को Inox Green ने Inox Clean Energy में अपनी पूरी हिस्सेदारी IGREL Renewables को ट्रांसफर कर दी. इसके बाद ये हिस्सेदारी आगे जैन परिवार के सदस्यों को ट्रांसफर हो गई.

कंपनी के DRHP के मुताबिक, अब Inox Clean Energy में मुख्य हिस्सेदारी देवांश जैन के पास है और अवर्णा जैन भी हिस्सेदारी रखती हैं. यही पुरान ओनरशिप ट्रांसफर अब SEBI की पूछताछ का एक अहम हिस्सा बताए जा रहे हैं.

अब समझिए आगे का मामला?

Inox Clean Energy ने 29 सितंबर को IPO के लिए अपना DRHP यानी Draft Red Herring Prospectus दाखिल किया था. कंपनी इस IPO से कुल 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है. इसमें 8,000 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे जबकि 2,000 करोड़ रुपये का हिस्सा OFS यानी Offer for Sale के जरिए आएगा. OFS में प्रमोटर देवांश जैन अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. कंपनी ने बताया है कि नए शेयरों से मिलने वाली रकम में से करीब 6,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में किया जाएगा,
लेकिन IPO से पहले कंपनी के पुराने कुछ लेनदेन SEBI की जांच के दायरे में आ गए.

DRHP में दी गई जानकारी के मुताबिक, SEBI ने दिसंबर में Inox Green Energy Services से Inox Clean Energy में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने से जुड़े लेनदेन पर सवाल पूछे थे.

मामला करीब 290 करोड़ रुपये की रकम का है. Inox Green के बोर्ड और शेयरधारकों ने Inox Clean Energy में हिस्सेदारी बेचने के लिए 290 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी, लेकिन कंपनी के FY25 के स्टैंडअलोन अकाउंट्स में इस लेन-देन से सिर्फ 90 करोड़ रुपये मिलने की बात दिखाई गई थी. SEBI ने इसी अंतर को लेकर जवाब और सफाई मांगी है.

Inox Green ने बताया कि 290 करोड़ रुपये पूरी तरह शेयर बेचने से मिली रकम नहीं थी. इसमें करीब 200 करोड़ रुपये Inox Clean Energy के Power Finance Corporation के कर्ज को चुकाने के लिए थे, जबकि करीब 90 करोड़ रुपये इक्विटी से मिले थे. कंपनी ने यह भी कहा कि इस लेन-देन के लिए जरूरी मंजूरी ली गई थी और स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी गई थी.

तीन कंपनियों को लेकर भी SEBI ने सवाल पूछे

SEBI की पूछताछ सिर्फ Inox Clean Energy की हिस्सेदारी बेचने तक सीमित नहीं रही. बल्कि DRHP के मुताबिक, सेबी ने तीन कंपनियों Inox Neo Energies, Flurry Wind Energy और Flutter Wind Energy को Inox Clean Energy में फेस वैल्यू पर ट्रांसफर किए जाने पर भी सवाल पूछे.

सवाल इसलिए उठा क्योंकि बाद में Inox Neo Energies ने करीब 292 करोड़ रुपये जुटाए और शेयर 265 रुपये प्रति शेयर के भाव पर जारी किए. ऐसे में SEBI ने इस बात पर सफाई मांगी कि अगर बाद में कंपनी के शेयर 265 रुपये के भाव पर जारी हुए, तो पहले इन्हें फेस वैल्यू पर Inox Clean Energy को क्यों ट्रांसफर किया गया?

Inox Green ने इसके जवाब में कहा कि जब इन कंपनियों को ट्रांसफर किया गया था, तब इनके पास कोई कारोबार या कमाई देने वाली संपत्ति नहीं थी, इसलिए इनकी वैल्युएशन बुक वैल्यू के आधार पर निकाली गई थी. कंपनी ने ये भी कहा कि इन कंपनियों को बेचने से उसे अपने मुख्य ऑपरेशंस एंड मेनटेनेंस यानी O&M कारोबार पर ज्यादा ध्यान देने में मदद मिली.

वैल्युएशन की दो अलग रिपोर्ट्स क्यों?

SEBI ने Inox Clean Energy की वैल्युएशन को लेकर भी कंपनी से जानकारी मांगी. DRHP के मुताबिक, 20 अक्टूबर 2023 को एक ही Inox Clean Energy की वैल्युएशन को लेकर दो रिपोर्ट्स जारी की गईं थीं. दोनों रिपोर्ट्स में कंपनी की वैल्युएशन में काफी फर्क था. SEBI ने पूछा कि इन दोनों में से किस वैल्युएशन रिपोर्ट के आधार पर ऑडिट कमेटी और बोर्ड ने फैसला लिया था और शेयरहोल्डर्स और ऑडिटर्स के सामने कौन-सी रिपोर्ट रखी गई थी.

Inox Green ने इसे अनजाने में हुई गलती बताया, उसने कहा कि पहली वैल्युएशन रिपोर्ट में कर्ज का एडजस्टमेंट छूट गया था. बाद में इसको सुधारकर दूसरी रिपोर्ट तैयार की गई. उसी का इस्तेमाल मंजूरियों और ऑडिट के लिए किया गया.

तो ये पूरी कहानी है, अब देखते हैं कि क्या SEBI कंपनी की ओर से दी गई सफाई से संतुष्ट होता है और 10,000 करोड़ रुपये के इस IPO को हरी झंडी देता है.

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