सोना $5,000 पहुंचा तो भारत के ज्वेलरी मार्केट पर क्या होगा असर? लोग ज्वेलरी कैसे खरीदेंगे!

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सोना $5,000 पहुंचा तो भारत के ज्वेलरी मार्केट पर क्या होगा असर? लोग ज्वेलरी कैसे खरीदेंगे!

सोने की कीमत अगर आने वाले समय में $5,000 प्रति आउंस तक पहुंचती है तो भारत में ज्वेलरी मार्केट पर इसका क्या असर होगा. क्या ग्राहकों के सेंटीमेंट्स बदलेंगे. क्या इतनी ऊंची कीमत पर ग्राहक सोने की ज्वेलरी खरीदना जारी रखेंगे. उनकी खरीदारी बर्ताव में किस तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे. अब कुछ दिनों में ही फेस्टिव सीजन शुरू होगा, फिर शादियों का सीजन भी शुरू होगा. इस दौरान लोग ज्वेलरी खरीदते हैं, लेकिन क्या वो इस बार भी उसी तरह ज्वेलरी खरीद पाएंगे जैसा कि उन्होंने इसके पहले खरीदारी की थी. क्योंकि सोने के भाव बीते 1-2 साल में काफी तेज़ी से बढ़े हैं.

ये वो सवाल हैं जिनके जवाब जानने के लिए कुछ बेहद सटीक डेटा चाहिए होंगे, जिससे ये पता चल सके कि सोने के भाव बढ़ने पर ग्राहकों का खरीदारी को लेकर व्यवहार कैसे बदलता है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के Q1 और Q2 के आंकड़े काफी हद तक ये काम कर देते हैं. इन आंकड़ों को देखने के बाद एक बात स्पष्ट समझ आने लगती है कि सोने की कीमत बढ़ने पर भारतीय ग्राहक गोल्ड ज्वेलरी खरीदना पूरी तरह बंद नहीं करते, लेकिन खरीदारी का तरीका जरूर बदल जाता है.

Q1 की तस्वीर देखिए

2026 की पहली तिमाही से शुरुआत करते हैं. WGC के मुताबिक, जनवरी से मार्च 2026 के दौरान भारत में गोल्ड ज्वेलरी की मांग 66 टन रही. ये पिछले साल की पहली तिमाही के 82 टन के मुकाबले 19% कम थी. यानी भारतीयों ने मात्रा के हिसाब से कम ज्वेलरी खरीदी, मगर इस पर भारतीयों का खर्च 47% बढ़कर 99,900 करोड़ रुपये हो गया.
यानी सोना खरीदा कम गया, लेकिन उस पर खर्च ज्यादा हुआ. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि Q1 2026 में भारत में सोने की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं थी और ये 1,51,108 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं.

Q2 में भी यही ट्रेड रहा

दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत में ज्वेलरी डिमांड 75.1 टन रही, जबकि इसके पिछले साल 88.8 टन थी, यानी 15% कम रही. हालांकि Q1 के 66.1 टन के मुकाबले Q2 में मांग करीब 14% बढ़ी. इसके बावजूद ज्वेलरी पर सालाना आधार पर खर्च 34% बढ़कर 1.13 लाख करोड़ रुपये हो गया. यहां भी वही ट्रेंड देखने को मिला कि सोने की ज्वेलरी तो कम खरीदी गई लेकिन उसकी कीमत ज्यादा चुकानी पड़ी.

तो अब सवाल है कि जब सोना महंगा हो रहा है तो ग्राहक अपनी खरीदारी को कैसे संभाल रहा है? WGC के Q1 के आंकड़े बताते हैं कि ऊंची कीमतों ने खासकर बड़े बाजार के ग्राहकों को हल्के वजन, कम कैरेट और जड़ी हुई ज्वेलरी की तरफ जाने के लिए मजबूर किया. मतलब, लोगों ने ज्वेलरी तो खरीदी, लेकिन अपने बजट के दायरे में रहकर. उन्होंने उसी बजट में कम वजन की और कम कैरेट की ज्वेलरी खरीदी, जिससे डिमांड तो कम दिखी मगर सोने की कीमतें काफी ऊंची होने की वजह से खर्च काफी बढ़ गया.

इसलिए अगर इंटरनेशनल मार्केट में सोना 5,000 डॉलर तक पहुंचता है तो 96 रुपये के रुपी-डॉलर एक्सचेंज पर घरेलू बाजार में सोने का भाव करीब 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के होता है. तो ऐसे में जो पिछली दो तिमाहियों में हमने ट्रेंड देखा, उसी नजरिये से देखा जाए तो इसका असर ये होगा कि ज्वेलरी मार्केट में सबसे पहले वजन पर दबाव पड़ सकता है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई ग्राहक पहले 10 ग्राम ज्वेलरी लेने की योजना बना रहा था, तो अब जब सोने की कीमतें 1.80 लाख के आस-पास होंगी तो वो 10 ग्राम की जगह 7-8 ग्राम की ही कोई ज्वेलरी लेगा.

पुरानी गोल्ड ज्वेलरी एक्सचेंज का क्रेज

एक और बड़ा ही दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिला है. लोगों ने अपनी पुरानी गोल्ड ज्वेलरी को एक्सचेंज किया, इसके ऊपर जो भी रकम बनी, उसे देकर नई गोल्ड ज्वेलरी खरीद ली.
WGC के मुताबिक पहली तिमाही में अलग-अलग रिटेलर्स के बीच पुरानी गोल्ड एक्सचेंज कुल बिक्री का करीब 40% से 60% तक था. यानी ग्राहकों ने अपनी पुरानी ज्वेलरी देकर नई ज्वेलरी खरीदी. ये उनके लिए अफोर्डेबल भी था. क्योंकि सोने की बढ़ी हुई कीमतों की वजह से नई ज्वेलरी उनकी जेब के लिए ज्यादा भारी सौदा होता.

पहली तिमाही के बाद दूसरी तिमाही में ये ट्रेंड और मजबूत हुआ. WGC के मुताबिक ज्वेलर्स ने बताया कि एक्सचेंज वॉल्यूम में 10% से 20% की बढ़ोतरी हुई. कुछ मामलों में पुराने गोल्ड के एक्सचेंज से होने वाली खरीदारी कुल बिक्री के 70% तक पहुंच गई.

इसलिए अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड 5,000 डॉलर या घरेलू बाजार में करीब 1.8 लाख रुपये पहुंच जाता है तो ऐसे में नई ज्वेलरी बहुत महंगी हो जाएगी, तब ग्राहक को पूरी रकम अपनी जेब से लगाने की जरूरत नहीं होगी, वह अपनी पुरानी ज्वेलरी को एक्सचेंज करके नई ज्वेलरी खरीद सकता है. ऊपर से उसे कुछ रकम एक्स्ट्रा देनी होगी. इसलिए महंगे सोने के दौर में पुरानी गोल्ड एक्सचेंज ज्वेलरी मार्केट के लिए एक बड़ा सहारा बन सकता है.

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