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OTP शेयर करने पर हुआ बैंक फ्रॉड; फिर भी ग्राहक को SBI से मिला ₹3.73 लाख का रिफंड

sureofficialmedia_admin
Last updated: October 20, 2026 12:49 pm
sureofficialmedia_admin
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7 Min Read

अगर आप किसी को अपना OTP शेयर करें और आपके साथ बैंक फ्रॉड हो जाए तो क्या आपको रिफंड मिल सकता है. आमतौर पर इसमें बैंक की नहीं बल्कि ग्राहक की गलती मानी जाती है, बैंक आपको रिफंड देने से इनकार कर सकता है. मगर, केरल हाईकोर्ट ने इस मामले में एक ऐसा फैसला दिया है जो एक नई मिसाल बन सकता है.

Contents
मामला क्या है, कोर्ट ने क्या फैसला दियाठगी कैसे की गई?हाई कोर्ट ने क्यों दिया ऐसा फैसलासाइबर ठगी से कैसे बचें?

मामला क्या है, कोर्ट ने क्या फैसला दिया

मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक कस्टमर से हुई साइबर ठगी से जुड़ा है. केरल हाई कोर्ट ने SBI को साइबर ठगी की शिकार एक रिटायर्ड कॉलेज प्रिंसिपल के ₹3.73 लाख लौटाने का आदेश दिया है. महिला के बैंक खाते से ठग ने ये रकम निकाल ली थी. महिला को इसकी शिकायत बैंक को कर दी, लेकिन बैंक ने पैसे नहीं लौटाए. इसके बाद उसने बैंकिंग लोकपाल से शिकायत की, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली. आखिरकार महिला ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने बैंकिंग लोकपाल के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें महिला की शिकायत खारिज कर दी गई थी. अदालत ने कहा कि महिला ने ठगी के दिन ही बैंक को इसकी जानकारी दे दी थी. इसके बावजूद बैंक ने उसके खाते से निकाली गई रकम वापस करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए. पुलिस की जांच में भी सामने आया कि ठगी में पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति का हाथ था.

ठगी कैसे की गई?

शिकायत में महिला ने बताया कि 13 जुलाई 2019 को उसके मोबाइल पर एक SMS आया. जिसमें लिखा था कि उनका डेबिट कार्ड ब्लॉक किया जा सकता है और उसे ऑनलाइन रीएक्टिवेट करना होगा. इसके बाद उसी नंबर से एक फोन आया. फोन करने वाले ने भी यही बात दोहराई और कार्ड दोबारा चालू करने के लिए कुछ जानकारी मांगी.

ठग ने महिला से ‘State Bank Secure App’ रजिस्टर करने के नाम पर वन टाइम पासवर्ड (OTP) मांगा. SMS में साफ चेतावनी दी गई थी कि OTP किसी के साथ साझा न करें, लेकिन महिला ने फोन करने वाले को OTP बता दिया. इसके कुछ ही समय बाद उसके बैंक खाते से ₹3.73 लाख निकल गए.

खाते से पैसे निकलने का पता चलते ही महिला ने SBI के कस्टमर केयर पर संपर्क किया. इसके बाद उसकी इंटरनेट बैंकिंग सेवा बंद कर दी गई. उसने बैंक और पुलिस, दोनों के पास शिकायत दर्ज कराई. पुलिस की जांच में पता चला कि पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति ने महिला के बैंकिंग डिटेल्स का इस्तेमाल करके रकम निकाली थी.

इसके बावजूद बैंक ने महिला को पैसे वापस नहीं किए. इसके बाद उसने बैंकिंग लोकपाल के पास शिकायत की, लेकिन वहां से भी उसे राहत नहीं मिली. आखिरकार मामला हाई कोर्ट पहुंचा.

हाई कोर्ट ने क्यों दिया ऐसा फैसला

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में RBI के उस नियम का हवाला दिया, जिसके तहत कुछ अनऑथराइज्ड डिजिटल ट्रांजैक्शन में ग्राहक की जिम्मेदारी जीरो हो सकती है. ये नियम उन मामलों में लागू हो सकता है, जहां किसी तीसरे व्यक्ति की धोखाधड़ी की वजह से खाते से पैसे निकलते हैं और न तो बैंक की और न ही ग्राहक की गलती होती है. इसके लिए ग्राहक को बैंक से अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन की सूचना मिलने के तीन कामकाजी दिनों के भीतर बैंक को इसकी जानकारी देनी होती है.

अदालत ने पाया कि महिला ने ठगी के तुरंत बाद शिकायत की थी. पुलिस की रिपोर्ट से भी ये साफ था कि महिला खुद इस धोखाधड़ी में शामिल नहीं थी. बैंक के पास ठग की पहचान सामने आने के बाद भी रकम लौटाने के लिए कार्रवाई करने का मौका था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने SBI को चार हफ्ते के भीतर महिला के ₹3.73 लाख लौटाने का निर्देश दिया.

साइबर ठगी से कैसे बचें?

साइबर ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, आप इसका शिकार न हों, इसके लिए आपको कुछ सावधानी बरतने की जरूरत है. यहां पर ऐसी 7 बातें बता रहे हैं, जिसका आपको ध्यान रखना चाहिए.

  1. किसी के साथ OTP साझा न करें: बैंक, पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति आपसे OTP मांगे, तो उसे न बताएं। OTP साझा करने से आपके खाते से पैसे निकल सकते हैं
  2. अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें: SMS, WhatsApp या ईमेल पर आए ऐसे लिंक से सावधान रहें, जिनमें बैंक खाता अपडेट करने, कार्ड चालू करने या KYC पूरा करने के लिए कहा जाए। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही इस्तेमाल करें
  3. डेबिट कार्ड ब्लॉक होने के नाम पर घबराएं नहीं: ठग अक्सर कार्ड बंद होने या बैंक खाता ब्लॉक होने का डर दिखाकर जल्दबाजी में जानकारी हासिल करते हैं. किसी संदेश या फोन कॉल पर भरोसा करने के बजाय बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करें.
  4. मोबाइल पर आने वाले ऐप इंस्टॉल करने के अनुरोध से सावधान रहें: अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप डाउनलोड न करें. खासकर ऐसे ऐप से बचें, जिनसे कोई दूसरा व्यक्ति आपके मोबाइल की स्क्रीन देख सके या उसे दूर से कंट्रोल कर सके.
  5. बैंक खाते के लेनदेन पर नजर रखें: SMS अलर्ट चालू रखें और नियमित रूप से बैंक स्टेटमेंट चेक करें. खाते से कोई अनजान लेनदेन दिखे, तो तुरंत बैंक को सूचित करें
  6. ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें: खाते से फ्रॉड होने पर बैंक को तुरंत जानकारी दें. साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराएं. जल्दी शिकायत करने से रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है.
  7. शिकायत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें: बैंक से मिले SMS, ट्रांजैक्शन डिटेल्स, शिकायत संख्या और पुलिस या साइबर अपराध पोर्टल की शिकायत का रिकॉर्ड संभालकर रखें, जरूरत पड़ने पर ये दस्तावेज बैंक, पुलिस या अदालत के सामने काम आ सकते हैं.
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