अब ड्राइविंग लाइसेंस के लिए लाने होंगे ज्यादा अंक! मगर प्रक्रिया होगी आसान, जानिए क्या हैं सरकार के प्रस्ताव

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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, उसमें नाम या पता बदलवाने और दूसरी जानकारियां अपडेट करवाना अब पहले से ज्यादा आसान होने वाला है. केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में कई बदलावों का प्रस्ताव रखा है. इनके लागू होने पर लाइसेंस के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है, जबकि सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़े ऑनलाइन ट्यूटोरियल को पास करने के लिए पहले से ज्यादा अंक लाने होंगे.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है. इसमें पहचान और पते के दस्तावेजों से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस के नए फॉर्मेट और ऑनलाइन सर्विसेज तक कई बदलाव शामिल हैं. हालांकि, ये अभी प्रस्ताव हैं. अब एक-एक करके समझते हैं कि वो क्या प्रस्ताव हैं, इनके लागू होने के बाद क्या फर्क पड़ेगा.

पास होने के लिए चाहिए ज्यादा नंबर

ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अगर आप अप्लाई करते हैं तो आपको सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़ी जानकारियां बहुत अच्छे तरह से पता होनी चाहिए. क्योंकि बिना इसके आप ऑनलाइन ट्यूटोरियल पास नहीं कर सकेंगे. सरकार ने इसे पूरा करने की समय-सीमा सात दिन से बढ़ाकर 15 दिन करने का प्रस्ताव रखा है. ट्यूटोरियल कम से कम 30 मिनट का होना चाहिए. साथ ही इसे पास करने के लिए जरूरी अंक 60% से बढ़ाकर 75% करने का प्रस्ताव है.

पहचान और पते के डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट बदलेगी

लाइसेंस बनवाते समय पहचान, उम्र और पते का प्रमाण देना पड़ता है. प्रस्तावित नियमों में इन दस्तावेजों की सूची स्पष्ट की गई है. एड्रेस प्रूफ यानी पते के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट, ई-राशन कार्ड और सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों की ओर से जारी कुछ पहचान पत्र स्वीकार किए जा सकेंगे.

इसके अलावा, बिजली का बिल या घरेलू गैस बिल भी पते के प्रमाण के तौर पर दिया जा सकेगा, बशर्ते वो 3 महीने से ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए. जन्मतिथि के प्रमाण के लिए पासपोर्ट, मान्यता प्राप्त बोर्ड या शिक्षण संस्थान का प्रमाणपत्र और जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज शामिल हैं. पहचान के प्रमाण के तौर पर PAN कार्ड भी दिया जा सकता है.
अगर कोई विदेशी नागरिक है तो उसको भारत में कानूनी रूप से रहने का प्रमाण भी देना होगा. इसलिए अगर आप ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई करने वाले हैं तो आपको इन डॉक्यूमेंट्स का पहले इंतज़ाम कर लेना चाहिए.

नाम, पता बदलना आसान होगा

ड्राइविंग लाइसेंस पर दर्ज नाम, पता या दूसरी जानकारियों में बदलाव कराने के लिए लोगों को संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होता है. नए प्रस्ताव में इसके लिए पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था शामिल है. इसके लिए नया फॉर्म 2A का प्रस्ताव दिया गया है और पहचान की पुष्टि ई-सिग्नेचर या सरकार की ओर से मान्य दूसरे तरीके से की जा सकेगी.

प्रस्ताव के मुताबिक, लाइसेंसिंग अथॉरिटी को आवेदन मिलने के 15 दिन के भीतर बदलाव मंजूर करना होगा या कारण बताते हुए आवेदन खारिज करना होगा. अगर पते में बदलाव के आवेदन पर 30 दिन के भीतर कोई फैसला नहीं होता, तो उसे मंजूर मान लिया जाएगा. इससे लोगों को अपने लाइसेंस में बदलाव कराने के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना होगा.

कुछ सर्विसेज की फीस माफ

सरकार की ओर से दिए गए प्रस्ताव में ऑनलाइन आधार वेरिफिकेशन के जरिए ली जाने वाली सेवाओं पर फीस नहीं लेने की बात कही गई है. ड्राइविंग लाइसेंस में नाम या पता बदलने और मोबाइल नंबर या ईमेल अपडेट करने जैसी सेवाओं के लिए भी फीस खत्म करने का प्रस्ताव है.

इसका फायदा उन लोगों को मिल सकता है जिन्हें लाइसेंस की जानकारी अपडेट कराने के लिए आवेदन करना पड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या उससे जुड़ी हर सेवा मुफ्त हो जाएगी. फीस में छूट उन्हीं सेवाओं पर लागू होगी जिन्हें अंतिम नियमों में शामिल किया जाएगा.

ड्राइविंग लाइसेंस का कार्ड और QR कोड बदलेगा

ड्राइविंग लाइसेंस को लैमिनेटेड या PVC कार्ड पर जारी किया जाएगा. भारतीय और विदेशी नागरिकों के लाइसेंस के लिए अलग-अलग फॉर्मेट रखने का प्रस्ताव है. कार्ड का आकार और बनावट तय स्टैंडर्ड के मुताबिक होगी.

लाइसेंस पर मौजूद मशीन से पढ़ी जाने वाली जानकारी वाले हिस्से को QR Code Readable Zone में बदलने का प्रस्ताव है. इस हिस्से में लाइसेंस धारक की जानकारी के अलावा कुछ अन्य जानकारियां भी शामिल की जा सकती हैं.

स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां देनी होंगी

अगर आप ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो ये प्रस्ताव आपको जरूर जानना चाहिए. आवेदन फॉर्म में कुछ अतिरिक्त मेडिकल सवाल शामिल किए जाने का प्रस्ताव है. इनमें मिर्गी आना या दौरा पड़ना, एलर्जी और शरीर में मौजूद मेडिकल या सर्जिकल इम्प्लांट से जुड़ी जानकारी शामिल है. लाइसेंस के नए फॉर्मेट में दवाओं, मेडिकल इम्प्लांट और कुछ दूसरी हेल्थ से जुड़ी डिटेल्स देने का भी प्रस्ताव है.

इसका मकसद जरूरी स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध रखना हो सकता है, लेकिन प्रस्ताव में कुछ सवालों के जवाब के आधार पर मेडिकल मंजूरी पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए आवेदकों को अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही तरीके से देनी होगी.

फोटो के लिए भी तय होंगे मानक

ड्राइविंग लाइसेंस के लिए फोटो अपलोड करते समय भी कुछ शर्तों का पालन करना होगा. प्रस्ताव के मुताबिक, फोटो का आकार 1 MB से ज्यादा नहीं होना चाहिए, बैकग्राउंड सफेद होना चाहिए और चेहरे को तस्वीर के लगभग 70% हिस्से में दिखना चाहिए. डिजिटल रंगीन फोटो का रिजॉल्यूशन 900 × 1200 से 2250 × 3000 पिक्सल के बीच रखने का प्रस्ताव है. आवेदन करते समय इन शर्तों का ध्यान रखने से फोटो के कारण आवेदन में आने वाली दिक्कतों से बचने में मदद मिल सकती है।

वाहन की कैटेगरी हटाने पर एक साल की रोक

अगर कोई व्यक्ति अपने ड्राइविंग लाइसेंस से किसी वाहन की कैटेगरी को स्थायी रूप से हटवाना चाहता है, तो प्रस्ताव के मुताबिक आवेदन मिलने के सात दिन के भीतर उस कैटेगरी को लाइसेंस से हटाया जा सकेगा, लेकिन इसके साथ एक अहम शर्त भी है. जिस कैटेगरी को स्थायी रूप से हटाया गया है, उसके लिए एक साल तक दोबारा लर्नर लाइसेंस या ड्राइविंग लाइसेंस लेने की पात्रता नहीं होगी. इसलिए वाहन की किसी श्रेणी को लाइसेंस से हटवाने से पहले उसके नतीजों को समझना जरूरी है।

पता बदलने पर देरी में हटेगी फीस

गाड़ी के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है. अगर कोई व्यक्ति निवास बदलने के बाद NOC जमा करने में देरी करता है, तो हर महीने लगने वाली अतिरिक्त फीस को हटाने का प्रस्ताव है. इससे उन गाड़ी मालिकों को राहत मिल सकती है जिन्हें पता बदलने या डॉक्यूमेंट्स की प्रोसेसिंग पूरी करने में देरी हो जाती है.

सरकार ने ड्रॉफ्ट नोटिफिकेशन पर लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. 30 दिन की अवधि पूरी होने पर सरकार सुझावों पर विचार करेगी. इसके बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे

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