आपके प्रीपेड मोबाइल रीचार्ज (Pre-paid mobile recharge) का बिल बढ़ने वाला है, क्योंकि टेलीकॉम कंपनियों ने चुपचाप अपने कई किफायती प्लान को बंद करना शुरू कर दिया हैं, जिससे यूज़र्स को अब महंगे प्लान चुनने पर मजबूर होना पड़ रहा है. पिछले साल जियो ने अगस्त में किया था, इस साल इसकी शुरुआत भारती एयरटेल ने कर दी है. जिसने ₹299, ₹579, ₹619 और ₹649 वाले चार लोकप्रिय प्रीपेड पैक को 12 अगस्त 2026 से पूरे देश में बंद कर दिया है. ये प्लांस अब एयरटेल के थैंक्स ऐप पर नहीं दिख रहे हैं. इसके अलावा, ₹319 और ₹799 वाले प्लान भी हटा दिए गए हैं.
यानी एयरटेल ने बिना दाम बढ़ाए ही, यूजर्स को महंगे रीचार्ज प्लान की तरफ धकेलना शुरू कर दिया है. बंद किए गये ये प्लान 28 दिन से लेकर 84 दिन तक की वैलिडिटी और रोजाना 1.5GB से 2GB तक डेटा देते थे. खासतौर पर ₹299 वाला प्लान अनलिमिटेड कॉलिंग और डेली डेटा के साथ मंथली रीचार्ज करने वालों के बीच बेहद लोकप्रिय था.
लेकिन अब ये प्लान नहीं है. 299 रुपये के प्लान की जगह अब यूजर्स के लिए सबसे सस्ता प्लान 349 रुपये का है. जिसमें अनलिमिटेड कॉलिंग और 28 दिन के लिए 2 GB डेटा प्रति दिन मिलता है. मगर, ये पुराने प्लान से 50 रुपये महंगा है यानी करीब 16% ज्यादा की बढ़ोतरी है.
अभी तो ये झांकी है, असली हाइक तो बाकी है
भले ही एयरटेल ने अभी प्रीपेड रीचार्ज के विकल्प हटाए हैं, लेकिन बड़ा झटका तो आना अभी बाकी है. क्योंकि टेलीकॉम कंपनियां अगले कुछ महीनों में टैरिफ बढ़ोतरी का भी ऐलान कर सकती है. ऐसा अनुमान कई ब्रोकरेज ने लगाया है.
Axis Capital
एक्सिस कैपिटल की रिपोर्ट कहती है कि टेलीकॉम कंपनियां अगले 3 से 6 महीनों में टैरिफ में 10% से 12% तक बढ़ोतरी कर सकती हैं. एक्सिस कैपिटल को पहले उम्मीद थी कि इस साल की पहली छमाही में टैरिफ बढ़ोतरी हो जाएगी, लेकिन अब इसकी समयसीमा आगे खिसक गई है. एक्सिस कैपिटल का कहना है कि भारती एयरटेल की ओर से ₹299 वाला प्रीपेड प्लान बंद करने का असर भी कंपनी के रेवेन्यू में पूरी तरह दिखने में एक तिमाही से ज्यादा समय लगेगा. यही एक वजह है कि एक व्यापक टैरिफ बढ़ोतरी अब कुछ देर से होगी.
Centrum Institutional
सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च का कहना है कि टेलीकॉम सेक्टर में केवल 3+1 खिलाड़ी होने से प्राइसिंग माहौल ज्यादा अनुकूल हो गया है, और हमें अगले 3 से 4 महीनों में एक और 12-15% टैरिफ हाइक देखने को मिल सकती है.
Morgan Stanley
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट इससे भी आगे जाती है, जो ये कहती है कि 2026 में 4G/5G दोनों प्लान यानी प्रीपेड और पोस्टपेड में करीब 16-20% की टैरिफ बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे FY27 में कंपनियों का ARPU काफी बढ़ेगा.
हालांकि ये बढ़ोतरी कब तक होगी, इसकी एक रेंज तो जरूर दी गई है, मगर एनालिस्ट ये भी कहते हैं कि कंपनियां त्यौहारों के समय यानी दिवाली या दशहरा के समय टैरिफ में बढ़ोतरी करने से बचेंगी ताकि लोगों की नाराज़गी से बचा जा सके, मगर इसके बाद सर्दियों की तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर के बीच टैरिफ बढ़ोतरियों का ऐलान होने की संभावना है.
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लेकिन कंपनियां टैरिफ क्यों बढ़ाना चाहेंगी
कोई भी कंपनी अपनी चीजें तभी महंगा करती है, जब उसे या तो घाटा हो रहा हो, या फिर अनुमान के मुताबिक मुनाफा न हो रहा हो, जो कंपनी की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है. देश में तीन ही टेलीकॉम कंपनियां है, जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया. तीनों के लिए टैरिफ बढ़ाने की वजह अलग-अलग हो सकती है. क्योंकि अगर घाटे की बात है तो एयरटेल और जियो दोनों ही मुनाफे में हैं.
Airtel, Jio: घाटे में नहीं, फिर टैरिफ हाइक क्यों
एयरटेल का जून 2026 तिमाही में कंसोलिडेटे नेट प्रॉफिट 37.3% बढ़कर ₹8,167 करोड़ हो गया, रेवेन्यू में भी 18.4% की बढ़ोतरी रही. इसी तरह, Jio का बिजनेस भी मजबूत है. जून तिमाही में Jio प्लेटफॉर्म का रेवेन्यू करीब 11.8% बढ़कर ₹39,173 करोड़ रहा और प्रॉफिट करीब 9.2% बढ़कर ₹7,764 करोड़ हो गया.
अब इन दोनों कंपनियों का मुनाफा भी बढ़ रहा है और रेवेन्यू भी, तो फिर ये कंपनियां टैरिफ हाइक बढ़ाने की तैयारी क्यों करेंगी. क्योंकि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है ARPU यानी एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर. मतलब एक उपभोक्ता से होने वाली औसत कमाई.
- Airtel का ARPU बढ़कर ₹264 हो गया, Reuters के मुताबिक ये बढ़ोतरी खास तौर से ग्राहकों के ज्यादा कीमत वाले प्लान की तरफ जाने और 4G/5G यूजर्स के बढ़ने से हुई
- Jio का ARPU भी ₹208.8 से बढ़कर करीब ₹215.6 हो गया. साथ ही, कंपनी ने जून तिमाही में 89 लाख नए सब्सक्राइबर्स भी जोड़े.
मगर टेलीकॉम बिजनेस में सिर्फ ग्राहक जोड़ना काफी नहीं होता, हर ग्राहक से मिलने वाला औसत रेवेन्यू भी बढ़ाना पड़ता है. इसलिए, टैरिफ हाइक का डायरेक्ट कनेक्शन कंपनी के प्रॉफिट से ज्यादा रिटर्न में सुधार और प्रीमियम प्लान की तरफ ग्राहकों को ले जाने को लेकर है. यानी कंपनी चाहती है कि कम कीमत वाले ग्राहकों की संख्या के बजाय ज्यादा कमाई देने वाले ग्राहकों का रेश्यो बढ़े. कंपनियां चाहती हैं कि हर यूज़र से ज्यादा औसत कमाई हो, जिससे मुनाफा और स्थिर हो. साथ ही, 5G नेटवर्क बिछाने में कंपनियों ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, अब फोकस नेटवर्क विस्तार से हटकर प्रीमियम डेटा प्लान के जरिए इस निवेश की कमाई निकालने पर है.
Vodafone-Idea की कहानी अलग है
Vodafone Idea का मामला एयरटेल और जियो से काफी अलग है. कंपनी अब भी वित्तीय दबाव से जूझ रही है. जून 2026 तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड घाटा ₹3,754 करोड़ रहा, हालांकि ये पिछले साल के ₹6,608 करोड़ के नुकसान से काफी कम था. कंपनी का ARPU भी बढ़कर ₹195 हुआ, लेकिन यह अभी भी Jio और Airtel से नीचे है.
वोडाफोन-आइडिया के लिए परेशानी ये है कि वो एक साथ कई मोर्चों पर वित्तीय संकट से जूझ रही है. उसे कई जगह पर एक साथ पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं जैसे- नेटवर्क विस्तार, 4G/5G रोलआउट और स्पेक्ट्रम. हर तिमाही में ये लाखों ग्राहक गंवा रही है, इसलिए ग्राहकों को जोड़े रखना भी इसके लिए चुनौती है.
कंपनी ने अगले 3 वर्षों में करीब ₹45,000 करोड़ के कैपेक्स की योजना भी बताई है. इसका मकसद नेटवर्क को मजबूत करना और रेवेन्यू ग्रोथ को को तेज करना है. यानी वोडाफोन आइडिया के लिए ज्यादा ARPU सिर्फ मुनाफा बढ़ाने का मामला नहीं है, कंपनी के भविष्य के नेटवर्क निवेश के लिए भी ज्यादा ARPU जरूरी है.
हालांकि अभी किसी भी कंपनी ने टैरिफ हाइक नहीं किया है, लेकिन एनालिस्ट जैसा अनुमान जता रहे हैं, अगले कुछ महीनों में या अगले साल टैरिफ हाइक देखने को मिल सकता है. अगर शुरुआत एयरटेल और जियो ने की, तो वोडाफोन को भी टैरिफ के दाम बढ़ाने पड़ेंगे.
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