बजाज ऑटो लिमिटेड (Bajaj Auto Ltd) के शेयर बायबैक के लिए रिकॉर्ड डेट 24 जून तय की गई है, जिसका मतलब है कि निवेशकों के लिए बजाज ऑटो के शेयर खरीदने का मंगलवार आखिरी मौका है, ताकि वे इस बायबैक में हिस्सा ले सकें. बजाज ऑटो ने टेंडर ऑफर रूट के जरिए 12,000 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 46.94 लाख शेयरों के बायबैक की घोषणा की है, जिसकी वैल्यू कुल मिलाकर 5,633 करोड़ रुपये है.
बजाज ऑटो के बायबैक को जानिए
ये कंपनी के पेड-अप इक्विटी कैपिटल का 1.68% है. ये बजाज ऑटो का अबतक का सबसे बड़ा शेयर बायबैक है, जिसका ऐलान इसने मई 2026 में किया था. 12,000 रुपये का भाव मौजूदा शेयर प्राइस से करीब 19% के प्रीमियम पर है. निवेशकों को बजाज ऑटो के इस शेयर बायबैक से बेहतर रिटर्न की उम्मीद है. अगर आप भी शेयर बायबैक के पात्र हैं तो आपको इसके एंटाइटेलमेंट रेश्यो, एक्सेप्टेंस रेश्यो और कंपनी के पिछले बायबैक ट्रेंड्स के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए.
| बायबैक | विवरण |
| बायबैक साइज़ | ₹5,632.80 करोड़ |
| बायबैक प्राइस | ₹12,000/शेयर |
| रिकॉर्ड डेट | 24 जून, 2026 |
| बायबैक शेयरों की संख्या | 46.94 लाख |
| रिटेल के लिए रिजर्व | 15% (7.04 लाख शेयर) |
| रिटेल रिजर्व कोटा की वैल्यू | ₹845 करोड़ |
| एक्सेप्टेंस रेश्यो | 10% से 25% |
एंटाइटेलमेंट रेश्यो: इसका मतलब है कि कंपनी कानूनी रूप से आपके कितने शेयरों को खरीदने की गारंटी देती है. उदाहरण के लिए, अगर आपके पास 100 शेयर हैं और एंटाइटेलमेंट रेश्यो 10% है, तो कंपनी आपके 10 शेयर तो पक्का खरीदेगी ही खरीदेगी. ये रेश्यो रिटेल निवेशकों के लिए थोड़ा ज्यादा ही होता है.
एक्सेप्टेंस रेश्यो: मान लीजिए आपने बायबैक के लिए अपने सभी 100 शेयर टेंडर कर दिए हैं. मगर, कंपनी ने सिर्फ 30 शेयर ही खरीदे. तो यहां एक्सेप्टेंस रेश्यो 30% हुआ. बाकी बचे 70 शेयर आपके डीमैट खाते में वापस आ जाएंगे. यह रेश्यो इस बात पर निर्भर करता है कि बाजार से कितने लोगों ने अप्लाई किया है.
बायबैक ट्रेंड: बजाज ऑटो पहले भी बायबैक ला चुकी है, उसे देखना भी ज़रूरी है ताकि पता चल सके कि पिछली बार रिटेल निवेशकों के कितने प्रतिशत शेयर स्वीकार किए गए थे और बायबैक खत्म होने के बाद शेयर के भाव में तेजी आई थी या गिरावट.
रिटेल निवेशकों के लिए बायबैक में क्या?
साल 2024 में भी बजाज ऑटो शेयर बायबैक लेकर आई थी. रिटेल निवेशकों के लिए तब एंटाइटेलमेंट रेश्यो 25.9% था. जबकि अंत में एक्सेप्टेंस रेश्यो करीब 26% रहा था. यानी अगर आप बायबैक के लिए जितने भी शेयर रखेंगे, उनमें से कुछ ही वापस खरीदे जाएंग, बाकी आपके डीमैट में वापस आ जाएंगे.
एक्सेप्टेंस रेश्यो इस बात पर निर्भर करता है कि कुल मिलाकर कितने शेयरधारकों ने इसमें भाग लिया. अगर शेयरधारकों, खासतौर पर कंपनी के प्रमोटर्स की ओर से भारी भागीदारी होती है, तो एक्सेप्टेंस रेश्यो कम हो सकता है, यानी आपके कम शेयर स्वीकार होंगे. वो ऐसे कि जो प्रमोटर्स होंगे उनके पास भी बहुत ज्यादा शेयर होंगे, अगर वो भी बायबैक के लिए अपने शेयर रखता है तो रिटेल निवेशकों के लिए कोटा छोटा सिकुड़ जाता है. जब ज्यादा लोग अप्लाई करते हैं तो स्वीकार करने का चांस कम हो जाता है. इससे एक्सेप्टेंस रेश्यो कम हो जाता है.
SEBI के नियमों के मुताबिक कुल ऑफर साइज का 15% हिस्सा रिटेल शेयरहोल्डर्स के लिए रिजर्व होना चाहिए. यानी 46.94 लाख शेयर हैं, तो 7.04 लाख शेयर रिजर्व होंगे. अब बायबैक में ‘रिटेल कैटेगरी’ शेयरों के मौजूदा मार्केट वैल्यू के आधार पर तय होती है. मतलब, अगर आपके पास बजाज ऑटो के इतने शेयर हैं जिनकी वैल्यू 2 लाख रुपये तक है, तो उसे रिटेल शेयरहोल्डिंग माना जाएगा.
बजाज ऑटो के शेयर बायबैक का रिकॉर्ड डेट 24 जून है. मान लिया जाए कि 24 जून को आपके डीमैट अकाउंट में 19 शेयर हैं, और बजाज ऑटो का शेयर प्राइस 10,070 रुपये है तो 10,070×19 = 1.91 लाख रुपये इसकी वैल्यू हुई. यानी आप रिटेल कैटेगरी में आएंगे. मान लीजिए की रिकॉर्ड डेट पर भाव बढ़कर 11,000 रुपये हो जाते हैं तो इसकी वैल्यू 2.09 लाख रुपये हो जाएगी. तब ये रिटेल कैटेगरी में नहीं आएंगे.
प्रमोटर्स नहीं लेंगे बायबैक में हिस्सा
कंपनी के प्रमोटर्स, प्रमोटर ग्रुप और कंपनी का नियंत्रण रखने वाले व्यक्तियों ने इस बायबैक में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है. मतलब ये कि जब एंटाइटेलमेंट रेश्यो की कैलकुलेशने की जाएगी तब इनके शेयरों को शामिल नहीं किया जाएगा. इस वजह से एंटाइटेलमेंट और एक्सेप्टेंस रेश्यो बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा. यानी प्रमोटर्स के हटने से अब पूरा का पूरा 5,633 रुपये करोड़ का बजट सिर्फ रिटेल और बाकी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए बच गया है.
शेयर टेंडर करने का समय
अगर आप शेयर बायबैक का फायदा उठाने की सोच रहे हैं तो इसके लिए आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा. 1 जुलाई से 7 जुलाई 2026 के बीच ही आपको अपने डीमैट अकाउंट या ब्रोकर के ऐप में जाकर बायबैक के लिए अप्लाई करना होगा. इसे ‘टेंडर करना’ कहते हैं.
कई नए निवेशक सोचते हैं कि रिकॉर्ड डेट पर शेयर होने से वे अपने आप बायबैक का हिस्सा बन जाएंगे. तो आप गलतफहमी में हैं. आपको 1 जुलाई से 7 जुलाई के बीच खुद जाकर बायबैक के लिए अप्लाई करना होगा, तभी कंपनी आपके शेयर खरीदेगी
फिर आपको अपने शेयर कंपनी को 12,000 रुपये के भाव पर बेचने के लिए अप्लाई करने के लिए कुल 5 कामकाजी दिनों का समय मिलेगा. इसमें शनिवार और रविवार शामिल नहीं होंगे.
याद रहे कि कोई भी योग्य शेयरधारक बायबैक के तहत ज्यादा से ज्यादा उतने ही शेयर बेचने के लिए अप्लाई कर सकता है, जितने शेयर रिकॉर्ड डेट के दिन उसके पास मौजूद थे. आप रिकॉर्ड डेट पर अपनी कुल होल्डिंग से ज्यादा शेयरों के लिए अप्लाई नहीं कर सकते. मान लीजिए कि 24 जून को रिकॉर्ड डेट पर आपके पास 5 शेयर थे, लेकिन 25 जून को आपने 5 शेयर और खरीद लिए और सोचा कि कुल 10 शेयरों के लिए अप्लाई कर देता हूं तो ऐसा नहीं माना जाएगा.
टेंडर फॉर्म कैसे मिलेगा
एक तय समय पर सभी योग्य शेयरधारकों को ‘लेटर ऑफ ऑफर’ के साथ एक ‘टेंडर फॉर्म’ मिलेगा. इस फॉर्म में ये लिखा होगा कि वो शेयरधारक इस बायबैक में भाग लेने के लिए कितने शेयरों का हकदार या Entitled है.
हालांकि, अगर किसी योग्य शेयरधारक को लेटर ऑफ ऑफर और टेंडर फॉर्म नहीं भी मिलता है, तो भी वे बायबैक में भाग ले सकते हैं और अपने शेयर बेचने के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इसके लिए आप सीधे अपने ब्रोकर (Zerodha, Groww, Upstox) के ऐप में ‘Corporate Actions’ या ‘Buyback’ सेक्शन में जाकर 1 जुलाई से सीधे अप्लाई कर सकते हैं.
ये लेटर ऑफ ऑफर रिकॉर्ड डेट 24 जून से दो कामकाजी दिनों के भीतर ई-मेल के जरिए भेजा जाएगा. अगर किसी को इसकी फिजिकल कॉपी चाहिए, तो उन्हें कंपनी या बायबैक के रजिस्ट्रार, यानी KFin Technologies Limited को एक अपील भेजनी होगी.
