10 साल बाद बच्चों की हायर एजुकेशन के लिए चाहिए होंगे लाखों रुपये, कहां से लाएंगे?

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Higher Education Costs Are Rising: How to Prepare for Your Child’s College Fees

Higher Education Planning: मां-बाप के लिए बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनका बेहतर भविष्य सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक होता है. हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे को अच्छे कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका मिले, ताकि करियर की मजबूत नींव तैयार हो सके. लेकिन अच्छी हायर एजुकेशन अब सिर्फ अच्छे नंबरों का मामला नहीं रह गया है, इसके लिए एक बड़ी रकम की भी जरूरत पड़ती है. कॉलेज और यूनिवर्सिटी की फीस लगातार बढ़ रही है. ऐसे में अगर समय रहते बच्चों की पढ़ाई के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग नहीं की गई, तो भविष्य में एकमुश्त बड़ी रकम जुटाना मुश्किल हो सकता है. इसलिए जरूरी है कि बच्चे की हायर एजुकेशन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आज से ही सही तरीके से पैसे का इंतजाम शुरू किया जाए.

हायर एजुकेशन फीस का इंतज़ाम कैसे करें?

अब सवाल है कि कैसे बच्चों की हायर एजुकेशन के लिए फंड का इंतज़ाम किया जाए. देखिए- लंबे समय का लक्ष्य होने की वजह से माता-पिता म्यूचुअल फंड में SIP जैसे विकल्पों के जरिए नियमित निवेश कर सकते हैं. इक्विटी बेस्ड रेगुलर इन्वेस्टमेंट महंगाई से ज्यादा रिटर्न देते हैं, इसलिए लंबे समय में एक अच्छा फंड भी इकट्ठा हो सकता है. निवेश कितना करना चाहिए, किस तरीके से करना चाहिए, ये बच्चे की उम्र, निवेश की अवधि और हायर एजुकेशन के लिए भविष्य में कितनी रकम की जरूरत है, इन सब बातों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए.

भविष्य में बच्चों की हायर एजुकेशन की लागत कितनी होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है. भारत में एजुकेशन की महंगाई हर साल कितनी होगी HDFC म्यूचुअल फंड चाइल्ड एजुकेशन कैलकुलेटर 7% एजुकेशन इंफ्लेशन को डिफॉल्ट मानता है, जबकि अनुमानित एजुकेशन इंफ्लेशन सालाना 10–12% है. मतलब कि अगले 6–7 साल में पढ़ाई लिखाई की लागत दोगुना हो जाएगी.

बीते कुछ वर्षों में बच्चों की पढ़ाई का खर्च तेजी से बढ़ा है. खासकर टियर-1, टियर 2 और टियर 3 शहरों में अच्छी क्वालिटी की स्कूली और हायर एजुकेशन हासिल करना अब पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है. महंगाई की सामान्य रफ्तार भले ही सीमित रही हो, लेकिन शिक्षा से जुड़े खर्च कई परिवारों के बजट पर लगातार दबाव बढ़ा रहे हैं.

इसकी एक बड़ी वजह अच्छी शिक्षा की बढ़ती मांग है. देश के प्रतिष्ठित सरकारी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में सीटें सीमित हैं, जबकि पढ़ने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऐसे में निजी संस्थानों की भूमिका बढ़ी है. हालांकि, प्राइवेट संस्थानों में फीस सरकारी संस्थानों के मुकाबले काफी ज्यादा हो सकती है.

देश में हायर एजुकेशन की अनुमानित लागत

आपका बच्चा इंजीनियरिंग लाइन में जाना चाहता है या फिर मेडिकल लाइन में, नीचे की टेबल में अलग-अलग हायर एजुकेशन कोर्स की मौजूदा अनुमानित लागत बताई गई है. साथ ही, अगर शिक्षा की लागत में सालाना 10% की बढ़ोतरी मानें, तो 10 और 15 साल बाद इन कोर्स की अनुमानित फीस कितनी हो सकती है, इसका भी एक अंदाजा लगाया गया है.

CourseCurrent CostIn 10 Years (10% p.a.)In 15 Years Inflation
B.Tech / EngineeringRs. 8L to Rs. 20LRs. 21L to Rs. 52LRs. 33L to Rs. 83L10% p.a.
MBBS / MedicalRs. 15L to Rs. 80LRs. 39L to Rs. 2.1 croreRs. 63L to Rs. 3.3 crore10% p.a.

Source: HDFC Fund.com

जिस इंजीनियिंग/B.Tech कोर्स की लागत आज की तारीख में 20 लाख रुपये है, 10 साल बाद 10% सालाना महंगाई के हिसाब से आपको 52 लाख रुपये चाहिए होंगे. 15 साल बाद इस कोर्ट की फीस 81 लाख रुपये हो जाएगी. MBBS का कोर्स ही आज की तारीख में 15 से 80 लाख रुपये है. 10 साल बाद आपको 2 करोड़ रुपये से ज्यादा चाहिए होंगे.

कैसे तैयार करें एजुकेशन फंड

तो अब सवाल आता है कि इतना पैसा इकट्ठा कैसे होगा, निवेश की शुरुआत की नींव कैसे रखी जाए. बच्चों की हायर एजुकेशन का खर्च देखकर शुरुआत में रकम काफी बड़ी लग सकती है, लेकिन अगर समय रहते प्लानिंग शुरू कर दी जाए और निवेश को सही तरीके से बांटा जाए, तो इस लक्ष्य को धीरे-धीरे हासिल किया जा सकता है. यहां सबसे अहम है कि निवेश आखिरी वक्त में शुरू करने के बजाय बच्चे की पढ़ाई के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी की जाए.

एजुकेशन कॉर्पस तैयार करने के लिए मुख्य तौर पर तीन चीजों पर ध्यान देना होगा

  • सही निवेश विकल्प चुनना
  • बच्चे की उम्र और लक्ष्य तक बचे समय के हिसाब से म्यूचुअल फंड की कैटेगरी तय करना
  • SIP जैसे नियमित निवेश के जरिए लंबे समय तक निवेश करते रहें

देखिए, अगर आप बिल्कुल रिस्क फ्री निवेश चाहते हैं. तो कई तरीके हैं. जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट जहां पर आपको 6-7% का रिटर्न मिल सकता है. अगर लड़की है तो सुकन्या समृद्धि योजना में भी निवेश कर सकते हैं, जहां पर आपको 8.2% का रिटर्न मिलता है लेकिन ये घट बढ़ भी सकता है. PPF में भी आप निवेश कर सकते हैं, इसमें पैसा 15 साल के लिए लॉक हो जाता है, रिटर्न सिर्फ 7.1% मिलता है.

मगर, इनमें निवेश करके आप जोखिमों से तो बच जाएंगे, लेकिन लॉन्ग टर्म में रिटर्न भी काफी कम मिलेगा. इसलिए हमें ऐसा असेट क्लास चुनना है जो कम से कम शिक्षा की महंगाई को मात दे. और ये काम करता है म्यूचुअल फंड्स, जो आपको 10-15% का रिटर्न औसतन दे ही देता है. हालांकि ये भी कोई फिक्स्ड नहीं है.

म्यूचुअल फंड में निवेश का रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस कैटेगरी का फंड चुना है.आम तौर पर ज्यादा जोखिम वाले फंड में लंबे समय में ज्यादा रिटर्न की संभावना होती है, जबकि कम जोखिम वाले विकल्पों में रिटर्न अपेक्षाकृत कम रह सकता है.

मोटे तौर पर सालाना रिटर्न का अनुमान

कंजर्वेटिव फंड: करीब 8–10%
बैलेंस्ड या हाइब्रिड फंड: करीब 10–12%
प्योर इक्विटी फंड: करीब 12–15%

यहां पर एक बात जरूर ध्यान में रखिए कि बच्चों के लिए हायर एजुकेशन के लिए फंड जुटाना 10-15 साल की अवधि का प्लान है. इसलिए निवेश में थोड़ा ज्यादा जोखिम लिया जा सकता है. इसकी वजह यह है कि आपके पास बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव से उबरने के लिए पर्याप्त समय होता है. ऐसे में हाइब्रिड से लेकर इक्विटी बेस्ड म्यूचुअल फंड तक पर विचार किया जा सकता है.

लंबी निवेश अवधि में इक्विटी में ज्यादा रिटर्न की संभावना रहती है, लेकिन इसके साथ बाजार का जोखिम भी जुड़ा होता है. इसलिए बच्चे की पढ़ाई का लक्ष्य जितना नजदीक आता जाए, निवेश में जोखिम को धीरे-धीरे कम करना जरूरी है, ताकि बाजार में अचानक गिरावट आने पर तैयार रकम पर बड़ा असर न पड़े.

कितने की SIP करें, कैसे करें?

अब सवाल है कि हर महीने कितनी रकम निवेश करने पर भविष्य में कितना कॉर्पस तैयार हो सकता है. मान लीजिए कि हमें आज से 10 साल बाद बच्चे के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए 52 लाख रुपये की रकम चाहिए, जबकि 15 साल बाद जरूरत होगी 83 लाख रुपये की. तो आज से ही कितने की SIP करना चाहिए.

एक बात ध्यान रहे कि जब भी आप SIP की शुरुआत करें, उसको हर साल 10% बढ़ाते रहना चाहिए. इससे कंपाउंडिंग तेजी से होता है.

निवेश की अवधि – 10 साल
अनुमानित रिटर्न – 12%
SIP – ₹16,000
स्टेप-अप – 10%
कुल फंड – ₹52 लाख

निवेश की अवधि – 15 साल
अनुमानित रिटर्न – 12%
SIP – ₹10,100
स्टेप-अप – 10%
कुल फंड – ₹83 लाख

अब किसी अच्छे मेडिकल कॉलेज की फीस आज से 10 साल बाद 50 लाख रुपये से 2 करोड़ रुपये मानकर चलते हैं, 15 साल बाद जरूरत होगी 3.3 करोड़ रुपये की. हालांकि ये लक्ष्य काफी बड़ा है, इसलिए जरूरी है कि हर साल स्टेप-अप के जरिए 15% SIP बढ़ाए. नियमित निवेश करते रहे तो एजुकेशन के लिए फंड आसानी से इकट्ठा हो जाएगा.
इसके लिए कैलकुलेशन ये रही-

निवेश की अवधि – 10 साल
अनुमानित रिटर्न – 12%
SIP – ₹55,000
स्टेप-अप – 15%
कुल फंड – ₹2.19 करोड़

निवेश की अवधि – 15 साल
अनुमानित रिटर्न – 12%
SIP – ₹28,000
स्टेप-अप – 15%
कुल फंड – ₹3.18 करोड़

सही म्यूचुअल फंड चुनने का तरीका

निवेश की रकम और हर महीने की SIP तय करने के बाद अगला बड़ा सवाल आता है. आखिर किस म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया जाए? बच्चों की हायर एजुकेशन जैसे लंबे लक्ष्य के लिए सिर्फ किसी फंड का पिछला रिटर्न देखकर फैसला करना सही तरीका नहीं है. फंड चुनते समय निवेश की अवधि, जोखिम और लक्ष्य तक बचे समय को भी देखना जरूरी है.

1- ज्यादा रिटर्न के लिए कौन-से फंड?

    अगर बच्चे की पढ़ाई का लक्ष्य अभी काफी दूर है, तो पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा ज्यादा रख सकते हैं. इसकी वजह है कि लंबी अवधि में शेयर बाजार से जुड़े निवेश में रिटर्न बढ़ने की संभावना रहती है, हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव और नुकसान का जोखिम भी होता है.

    लंबी अवधि के एजुकेशन गोल के लिए ऐसे म्यूचुअल फंड पर विचार किया जा सकता है, जिनमें रिटर्न बढ़ाने की क्षमता के साथ जोखिम का स्तर भी निवेश की अवधि के हिसाब से रखा जा सके.

    बैलेंस्ड एडवांटेज फंड: इनमें आमतौर पर इक्विटी और डेट दोनों का मिश्रण होता है. उदाहरण के तौर पर करीब 60% शेयर और 40% बॉन्ड वाला पोर्टफोलियो ज्यादा संतुलित जोखिम के साथ आगे बढ़ने का विकल्प देता है.

    एक्टिव इक्विटी फंड: इनमें करीब 80–100% तक निवेश शेयरों में हो सकता है. लंबे समय में ज्यादा ग्रोथ की संभावना रहती है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव भी ज्यादा देखने को मिल सकता है.

    इंडेक्स फंड: ये Nifty 50 या Nifty Smallcap 250 जैसे किसी इंडेक्स को ट्रैक करते हैं. इनका खर्च आमतौर पर कम होता है और निवेश का प्रदर्शन संबंधित इंडेक्स की चाल से जुड़ा रहता है.

    बच्चों की हायर एजुकेशन जैसे लंबे लक्ष्य के लिए पूरी रकम को सिर्फ डेट फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले विकल्पों में रखना हर निवेशक के लिए काफी नहीं हो सकता. वजह ये है कि अगर इन निवेशों का रिटर्न भविष्य में बढ़ने वाली शिक्षा की लागत से कम रहा, तो लक्ष्य तक पहुंचने के लिए ज्यादा रकम निवेश करनी पड़ सकती है.

    हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि डेट फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट सही नहीं है, उसे अपने पोर्टफोलियो में रखना ही नहीं चाहिए. बल्कि बच्चे की पढ़ाई का लक्ष्य जैसे-जैसे करीब आता है, तब पोर्टफोलियो के कुछ हिस्से को कम जोखिम वाले विकल्पों में शिफ्ट करना बाजार में अचानक गिरावट से बचाव के लिए जरूरी होता है.

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