सोने की तेज़ी को लेकर इस वक्त ज्यादातर एनालिस्ट बुलिश दिख रहे हैं, लेकिन Citi इस तेज़ी को लेकर एक सवाल खड़ा कर रहा है. रॉयटर्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक Citi ने मंगलवार को अपने क्लाइंट्स को दिए नोट में कहा है कि सोने की कीमतों में हाल की तेज़ी ने एक जरूरी टेक्निकल रेजिस्सेंस लेवल को पार कर लिया है, लेकिन ये तेज़ी खासतौर से सट्टेबाज़ी (speculation) की वजह से आई है न कि किसी ठोस बुनियादी वजह से. यानी बहुत सारे ट्रेडर्स सिर्फ कीमतें बढ़ने की उम्मीद में खरीदारी कर रहे हैं, जिससे भाव ऊपर गया है.
टेक्निकल रेजिस्टेंस एक ऐसा प्राइस लेवल होता है, जहां से अमूमन बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है और कीमतें थम जाती हैं या फिर नीचे आने लगती हैं. अगर कीमतों ने इस लेवल को पार कर लिया तो माना जाता है कि ये तेज़ी का संकेत है.
सोने में तेज़ी सट्टेबाज़ी के पैसों से आई
Citi का कहना है कि सोने की कीमतों में तेज़ी की सबसे बड़ी वजह कमज़ोर डॉलर और कम ब्याज दरें हैं. ये तब हुआ जब US ट्रेजरी ने ऐलान किया कि वो लंबी अवधि के बॉन्ड्स का बायबैक करेगा, यानी लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड्स को वापस खरीदेगा. जब सरकार बॉन्ड्स वापस खरीदती है, तो बाज़ार में उनकी सप्लाई कम हो जाती है, जिससे उनकी कीमतें बढ़ती हैं और यील्ड (ब्याज दर) घटती है.
कम ब्याज दरें और कमज़ोर डॉलर दोनों ही सोने के लिए अच्छे संकेत होते हैं, क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए जब बाकी निवेश, जैसे बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न कम हो जाए, तो सोना ज़्यादा आकर्षक लगने लगता है.
Citi ने अपने नोट में कहा कि जून के आखिर से जुलाई तक सोने ने $4,000 प्रति आउंस के आसपास एक मज़बूत बॉटम या निचला स्तर बनाया, अगस्त में इसमें रिबाउंड देखने को मिला और फिर ये अपने 100-Day Moving Average के आसपास, जो लगभग $4,380 था, कुछ समय तक स्थिर बना रहा. उसके बाद इसने इस स्तर को तोड़ते हुए आगे तेज़ी पकड़ी.
Citi ने लिखा कि हाल की तेज़ी अबतक मुख्य रूप से सट्टेबाज़ी वाले पैसों से आई है, खासकर फ्यूचर्स में आए पैसे से. यानी असली सोना खरीदने वालों जैसे कि जैसे ज्वेलरी बनाने वाले, रिटेल निवेशकों से नहीं, बल्कि फ्यूचर्स मार्केट में सट्टा लगाने वालों ने कीमतें ऊपर धकेली हैं. Citi का कहना है कि अगर सोने में इस तेजी को टिकाऊ बनाकर रखना है तो फिजिकल गोल्ड यानी ज्वेलरी, बुलियन की खरीद को भी बढ़ाना होगा. वरना सिर्फ सट्टेबाजी के दम पर यह रैली लंबे समय तक नहीं टिकेगी.
एक और दिलचस्प बात Citi ने बताई कि ज़्यादातर बढ़त US ट्रेडिंग घंटों के दौरान हुई, जबकि एशिया और यूरोप में कीमतें फ्लैट या हल्की गिरावट में रहीं. इसका मतलब है कि ये तेज़ी अमेरिकी ट्रेडर्स की वजह से ज़्यादा है, ग्लोबल लेवल पर व्यापक मांग की वजह से नहीं.
चीन, भारत में रिटेल मांग कमज़ोर
जैसे कि चीन में रिटेल डिमांड कमजोर बनी हुई है. वहां के निवेशक ट्रेंड के बहाव में आकर सोने में खरीदारी नहीं कर रहे हैं. बल्कि एक दायरे में रहकर ही ट्रेड कर रहे हैं. यानी कीमत बढ़ने पर पीछे नहीं भाग रहे. जबकि भारत जो कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है, यहां पर प्रीमियम निगेटिव है. क्योंकि आमतौर पर भारत में सोने पर अंतरराष्ट्रीय भाव से थोड़ा ज़्यादा कीमत ली जाती है, क्योंकि मांग ज़्यादा होती है.
लेकिन यहां प्रीमियम निगेटिव है, इसका मतलब है कि भारत में सोना अंतरराष्ट्रीय भाव से भी सस्ता बिक रहा है, या निवेशक ज्यादा कीमत देने को राज़ी नहीं है. ये दिखाता है कि भारत में भी मांग कमज़ोर है, लोग ऊंची कीमतों पर खरीदने से बच रहे हैं. यानी दोनों सबसे बड़े सोना खरीदने वाले देशों चीन, भारत में असली मांग सुस्त है, जो Citi की इस बात को पुख्ता करता है कि तेज़ी सिर्फ़ सट्टेबाज़ी पर टिकी है.
सोने के टेक्निकल पॉजिटिव
Citi ने कुछ टेक्निकल इंडिकेटर्स के ज़रिए भी समझाने की कोशिश की है. MACD और DMI ये दोनों ट्रेंड मापने वाले इंडिकेटर्स हैं. दोनों पॉजिटिव बने हुए हैं. मतलब मौजूदा तेज़ी का रुझान अभी मज़बूत है. साथ ही, RSI (Relative Strength Index) जो ये बताता है कि कोई एसेट कितना “overbought” या “oversold” है. ये 0 से 100 के बीच होता है, और आमतौर पर 70 से ऊपर जाने पर “overbought” माना जाता है. यहां RSI 72 है, जो बताता है कि सोना “stretched” यानी थोड़ा महंगा है, लेकिन “extreme” यानी बहुत ज़्यादा के स्तर पर नहीं पहुंचा है. मतलब, अभी गिरावट की तुरंत संभावना नहीं, पर सावधानी की ज़रूरत है.
Citi के मुताबिक ये बात CFTC डेटा (अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन का डेटा) से मेल खाती है, जिसमें दिखाया गया है कि “managed money net length” यानी बड़े संस्थागत निवेशकों/फंड मैनेजरों की सोने में खरीद पोज़िशन, साल के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर के करीब है, लेकिन अभी भी 2024-25 के पिछले उच्चतम स्तर से नीचे है. यानी बड़े निवेशक भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, पर अभी उतनी हद तक नहीं जितना पहले कभी खरीदा था.
अगला ट्रिगर क्या है?
अब बाज़ार की नजरें जैक्सन होल संगोष्ठी पर टिकी हैं जो कि 27-29 अगस्त के बीच होना वाला है. यहां पर 28 अगस्त को फेड चेयरमैन केविन वार्श का भाषण होगा. Citi का कहना है कि वार्श ने अगर हॉकिश संकेत दिए तो इससे सोने की मौजूदा रैली रुक सकती है, ऐसी स्थिति में अगर सोना $4,000 के निचले स्तर पर फिसलता है तो ये खरीदारी का मौका होगा. मगर, ये गिरावट ज़्यादा बड़ी या लंबी नहीं होगी. अगर वार्श डविश नजर आते हैं यानी ब्याज दरें नीचे रखने के पक्ष में दिखते हैं तो ये सोने के लिए “ultra-bullish” होगा, यानी बहुत ज़्यादा तेज़ी ला सकता है.

