US-ईरान में फिर तनातनी; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल सप्लाई की चिंताएं बढ़ीं, कच्चा तेल $80 के करीब पहुंचा

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Crude Oil Nears 80 dollar as US-Iran Conflict Escalates, Hormuz Supply Risks Mount

मिडिल ईस्ट में तनाव (Middle East Tension) की स्थिति फिर बनने से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उबाल आ गया है. अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरे दिन हमले किए हैं. इससे दोनों देशों के बीच शांति समझौते की उम्मीदें खत्म होती दिख रही हैं. एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस बात से नाराज़ थे कि बार-बार कहने के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने पूरी तरह से नहीं खोला है. साथ ही, जब ट्रंप NATO के शिखर सम्मेलन में थे तब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुज़रने वाले जहाजों को निशाना बनाया. इसलिए ट्रंप ने ईरान पर ताज़ा हमले शुरू कर दिए.

ईरान पर अमेरिका के नए हमले

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1% की मज़बूती के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. WTI क्रूड भी 75 डॉलर प्रति के करीब है. इसके पिछले सत्र में दोनों ही बेंचमार्क में 8% से ज्यादा का उछाल देखने को मिला था. इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ये ऐलान था जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के साथ युद्ध विराम अब खत्म हो चुका है.

ट्रंप के इस बयान के बाद ही अमेरिकी सैनिकों ने ईरान पर नए सैन्य हमले शुरू करने का ऐलान कर दिया. अमेरिका सेना का कहना है कि ये हमले इसलिए किए गए ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए खुला रखा जाए और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. इसमें ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कोस्टल सर्विलांस ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज सेंटर्स और सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया. अमेरिकी सेना ने बताया कि ये कार्रवाई एक दिन पहले किए गए सफल हमलों के बाद आगे की सैन्य कार्रवाई का हिस्सा थीं.

ईरान की जवाबी कार्रवाई

इधर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन में मौजूद उसके सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए हैं. इस हमले में कुवैत के कैंप अरिफजान और अली अल सलेम एयर बेस के अलावा बहरीन के शेख ईसा एयर बेस और जुफैर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है.

IRGC का कहना है कि ये हमला उसका जवाब है जो अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों और पूर्वी ईरान के दो पुलों पर किया था. इसके पहले ईरान की तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया था कि अमेरिकी सेना ने तेहरान के उत्तर-पूर्व में अक्काला के एक रेलवे पुल को भी निशाना बनाया था. ईरानी मीडिया की ओर से जारी वीडियो में इस पुल का एक वीडियो भी जारी किया गया, जिसमें ये पुल पूरी तरह से टूटा हुआ दिखाई दे रहा है.

तेल सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट में एक बार से तनाव बढ़ने की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं. बीते दो दिनों में इस रास्ते के आसपास कई कमर्शियल जहाजों पर अलग-अलग हमले हुए. इनमें कतर का एक LNG टैंकर, सऊदी अरब का एक कच्चे तेल का टैंकर और एक दूसरा कमर्शियल जहाज शामिल है. ओमान के तट के पास एक टैंकर पर भी हमला हुआ, जिससे उसमें आग लग गई. इन हमलों के बाद कई तेल और गैस टैंकरों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की योजना को टाल दिया, जो रास्ते में थे उन्होंने अपना रास्ता बदल दिया या वापस लौट गए.

अब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर इसका असर पड़ेगा और कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं. हालांकि तेल सप्लाई को लेकर चिंता सिर्फ मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से नहीं बढ़ रही है, बल्कि अमेरिका में ईंधन का भंडार घटने से भी बाजार की चिंता बढ़ गई है. पिछले हफ्ते अमेरिका के कमर्शियल कच्चे तेल के भंडार में करीब 30 लाख बैरल की बढ़ोतरी हुई, लेकिन सरकार ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से 62 लाख बैरल तेल निकाला. इसके चलते देश का कुल तेल भंडार 30 लाख बैरल से ज्यादा घट गया.

इसके साथ ही, डीज़ल और हीटिंग ऑयल जैसे ईंधनों को शामिल करने वाले डिस्टिलेट का भंडार भी 50 लाख बैरल तक घट गया. पेट्रोल (Gasoline) का स्टॉक भी घटकर 2012 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. कहने का मतलब ये कि अमेरिका में ईंधन की उपलब्धता पहले के मुकाबले कम हो रही है, जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.

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