पेट्रोल, डीज़ल के दाम आगे और बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है, क्योंकि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से आग लग गई है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड 3% तक उछलकर इंट्राडे में 91.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. सोमवार सुबह 9:30 बजे तक ये 90 डॉलर के ऊपर ही ट्रेड करता हुआ दिख रहा है. WTI क्रूड भी इंट्राडे में 84.59 डॉलर तक पहुंच गया. सोमवार की शुरुआती ट्रेडिंग में तेल मार्केटिंग कंपनियों के शेयर दबाव में दिखे
कच्चे तेल की कीमतों में ये अचानक आया उछाल है, क्योंकि इससे पहले जुलाई की शुरुआत में क्रूड $67-73 के दायरे में ठंडा हो चुका था. बाज़ार की सबसे बड़ी चिंता ये है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ता है तो दुनिया की तेल सप्लाई पर असर पड़ेगा. जो कि सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल, महंगाई और ग्लोबल इकोनॉमी पर भी पड़ सकता है.
महंगे क्रूड से मार्जिन पर पड़ेगा असर
ICICI सिक्योरिटीज के मुताबिक देश की सरकारी तेल कंपनियों IOC, HPCL, BPCL को इस वित्त वर्ष अप्रैल-जून तिमाही में प्रति लीटर डीजल पर 18.9 रुपये का घाटा हो रहा था, जबकि प्रति लीटर पेट्रोल पर 6 रुपये का घाटा हो रहा था. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने बताया था कि इस तिमाही में पेट्रोल, डीजल, LPG और ATF को मार्केट रेट से नीचे बेचने की वजह से OMCs को करीब 75,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. तेल कंपनियों ने एक साल पहले इसी तिमाही में पेट्रोल पर 8.2 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 10.3 रुपये प्रति लीटर का मार्जिन कमाया था.
मिडिल ईस्ट में जब लड़ाई अपने पीक पर थी, तब क्रूड 100 डॉलर के ऊपर बना रहा, जिससे OMCs की अंडर रिकवरी यानी घाटा बढ़कर करीब ₹30,000 करोड़ प्रति महीना तक पहुंच गया था. मगर, जुलाई की शुरुआत में जब शांति समझौते का ऐलान हुआ तो क्रूड कीमतें नीचे आ गईं. तब DAM Capital की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 73 डॉलर प्रति बैरल क्रूड पर OMCs को पेट्रोल-डीजल की हर लीटर बिक्री पर करीब 10 रुपये का फायदा होने लगा था.
Antique Stock Broking का अनुमान था कि मार्जिन अगर ऐसे ही सुधरता रहा तो OMCs अगली 1-2 तिमाहियों में करीब 35,000 करोड़ रुपये का घाटा रिकवर कर सकती हैं. मगर, अब चूंकि क्रूड की कीमतें एक बार फिर से 90 डॉलर के पार है तो तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव फिर से बढ़ेगा. ताजा आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 3 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 27 रुपये प्रति लीटर और घरेलू LPG पर करीब 700 रुपये प्रति सिलेंडर की अंडर-रिकवरी झेल रही हैं.
मार्जिन अगर ऐसे ही सुधरता रहा तो OMCs अगली 1-2 तिमाहियों में करीब 35,000 करोड़ रुपये का घाटा रिकवर कर सकती हैं: Antique Stock Broking
मई में ईंधन की कीमतें बढ़ाने के बाद उनका दैनिक रोजाना का घाटा करीब 1,000 करोड़ रुपये से घटकर 500-600 करोड़ रुपये रह गया था, लेकिन यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो यह दबाव फिर बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में तेल मार्केटिंग कंपनियां सारा बोझ अपने ऊपर लेने की बजाय कुछ ग्राहकों पर भी डाल सकती हैं. अक्सर ऐसी स्थितियों में कंपनियां पहले कमर्शियल LPG जैसी कीमतों में बदलाव करती हैं, हालांकि अंतिम फैसला सरकार और OMCs पर निर्भर करेगा.
भारतीय क्रूड बास्केट महंगा
हालांकि ये अभी एक झटके में होने की संभावना नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे दबाव बढ़ रहा है. भारतीय क्रूड बास्केट का भाव लगातार महंगा हो रहा है. 8 जुलाई को भारतीय क्रूड बास्केट 76.68 डॉलर प्रति बैरल था, जो कि 81.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. जैसे जैसे कच्चा तेल महंगा होता जाएगा, भारतीय क्रूड बास्केट भी महंगा होगा. इसका असर ये होगा कि कच्चे तेल में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का सब्सिडी बिल $13-15 अरब तक बढ़ सकता है, जिससे चालू खाते का घाटा भी बढ़ने का खतरा रहता है. यानी क्रूड की बढ़ती कीमतें देश की इकोनॉमी की सेहत के लिए सही नहीं हैं.
Crude Oil FOB Price (Indian Basket)
FY: 2026-2027 ($/bbl) Source: https://ppac.gov.in/prices/international-prices-of-crude-oil
| April | May | June | July |
| 114.48 | 106.23 | 83.22 | 74.11 |
हालांकि महीने के आधार पर देखें तो अप्रैल में भारतीय क्रूड बास्केट 114.48 डॉलर प्रति बैरल पर था, मई में ये गिरकर 106.23 पर आया. उसी दौरान बढ़ती क्रूड की कीमतों की वजह से भारत सरकार ने मई में चार बार पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाए. 15 मई से 26 मई के बीच कुल मिलाकर पेट्रोल 7.38 रुपये/लीटर और डीजल 7.52 रुपये/लीटर महंगा हुआ.
इस बढ़ोतरी के बाद क्रूड की कीमतें नीचे आईं तो जून में भारतीय क्रूड बास्केट भी सस्ता होकर 83.22 डॉलर पर आ गया, फिर जुलाई में 74.11 डॉलर तक सस्ता हो गया है. मगर बीते कुछ दिनों से इसमें एक बार फिर से तेजी देखने को मिल रही है. यानी तेल कंपनियों पर एक बार फिर से मई वाला दबाव देखने को मिला तो कंपनियों को कोई कड़ा कदम उठाना पड़ सकता है. यानी फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत बढ़ेंगी, ऐसा कहना जल्दबाज़ी होगी, लेकिन अगर ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के ऊपर लंबे समय तक बना रहता है, तो तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और उसका असर आम लोगों की जेब तक पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

