पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय कार बाज़ार में खरीदारों का मूड और मिजाज़ बदल दिया है. लोग अब इलेक्ट्रिक और दूसरे अल्टरनेटिव फ्यूल वाली गाड़ियों की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं, ये कोई कही-सुनी बात नहीं बल्कि जून महीने के ऑटोमोबाइल रिटेल बिक्री के आंकड़े बता रहे हैं.
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जून महीने में गाड़ियों की रिटेल बिक्री में सालाना आधार पर 21.8% का इज़ाफा हुआ है, जो कि एक मज़बूत सेल्स ग्रोथ को दर्शाता है और ऑटो रिटेल इंडस्ट्री के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन जून का महीना बन गया है.
EV, CNG, हाइब्रिड गाड़ियों ने पकड़ी रफ्तार
दरअसल, सरकार ने मई में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की, जिससे प्रति लीटर फ्यूल की कीमतें अचानक ही 7-8 रुपये तक बढ़ गईं. इसने लोगों की जेब पर बड़ा बोझ डाला. इसलिए लोगों ने गाड़ियों की कीमत से ज्यादा गाड़ियों की रनिंग कॉस्ट को तवज्जो दी, जो उन्हें लॉन्ग टर्म में किफायती पड़े.
जून में पैसेंजर गाड़ियों की की बिक्री 28.6% सालाना आधार पर बढ़कर 4,10,853 यूनिट रही. कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में ये तेज़ी वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों को लेकर पैदा हुई डिमांड की वजह से आई है. FADA के आंकड़ों के मुताबिक जून में अल्टरनेटिव फ्यूल व्हीकल्स यानी इलेक्ट्रिक, CNG और हाइब्रिड गाड़ियों की बिक्री का हिस्सा कुल बिक्री का 40.35% रहा, जो कि एक महीने पहले 38% था. इनकी हिस्सेदारी पहली बार 40% से ज्यादा बढ़ी है.
कुल रिटेल बिक्री में सबसे ज्यादा 24.33% हिस्सा CNG गाड़ियों का है, इसके बाद हाइब्रिड 8.27% और फिर EV का 7.75% रहा. इस महीने के पैसेंजर इलेक्ट्रिक गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 31,823 यूनिट के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया.
जून में गाड़ियों का कुल रजिस्ट्रेशन 25,57,234 यूनिट रहा, जो पिछले साल इसी महीने के 20,98,996 यूनिट से ज्यादा है, यानी कुल 21.8% की दमदार बढ़ोतरी
जबकि महीने के आधार पर रिटेल बिक्री में 1.03% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
FADA के प्रेसिडेंट सी.एस. विग्नेश्वर ने सोमवार को रॉयटर्स को बताया, ‘हमें ये देखने की ज़रूरत है कि क्या ये ग्राहकों की ओर से एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है या फिर यह बढ़त आगे भी बनी रहने वाली है.’ FADA चेयरमैन ने कहा कि जून का ये रिकॉर्ड प्रदर्शन भारत के ऑटोमोबाइल मार्केट की स्ट्रक्चरल मजबूती को दर्शाता है, जिसे मैन्युफैक्चरर्स की बेहतर होती सप्लाई और शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मजबूत मांग से मदद मिली है.
इसमें भी शहरी बाजारों के मुकाबले ग्रामीण भारत में बढ़त तेजी से बनी रही, जहां पैसेंजर व्हीकल के रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 35.1% की बढ़ोतरी देखी गई. जबकि शहरों में ये ग्रोथ 24.67% रही. हालांकि, मंथली बेसिस पर मॉनसून की देरी के चलते ग्रामीण मांग सुस्त रही.
2-व्हीलर, 3-व्हीलर बिक्री का हाल
अब जरा व्हीकल्स के दूसरे सेगमेंट पर भी नज़र डालते हैं. 2-व्हीलर की रिटेल बिक्री सालाना आधार (YoY) पर 21.22% बढ़कर 18,28,458 यूनिट रही, कमर्शियल व्हीकल की बिक्री 16.88% बढ़कर 90,972 यूनिट रही, जबकि 3-व्हीलर की बिक्री 16.20% बढ़कर 1,20,889 यूनिट पर पहुंच गई. ट्रैक्टर की बिक्री भी मजबूत बनी रही, जो 25.31% बढ़कर 1,00,818 यूनिट रही है.
बढ़ती इन्वेंट्रा बड़ी चिंता
जून के दमदार आंकड़ों के साथ-साथ FADA को एक चिंता भी है, जिसे लेकर इंडस्ट्री को आगाह भी किया है, वो है पैसेंजर व्हीकल्स की लगातार बढ़ती इन्वेंट्री. जो कि अब 32-34 दिनों की हो चुकी है, जबकि बेंचमार्क 21 दिनों का है. FADA ने कार निर्माताओं से कहा है कि वो मॉनसून के समय के दौरान होलसेल डिस्पैच को रिटेल डिमांड के साथ मिलाकर चलें.

