अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी को अमेरिका की एक अदालत से बड़ी राहत मिली है. अमेरिकी कोर्ट ने जज निकोलस गारौफिस ने इन दोनों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को खारिज कर दिया है. जिसमें इन दोनों पर साजिश में शामिल होने, सिक्योरिटीज मार्केट से जुड़े धोखाधड़ी के आरोप और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं. इस खबर की वजह से सोमवार, 11 अगस्त, 2026 को अदाणी ग्रुप के शेयरों में तेजी दिखाई दे रही है.
क्या है मामला जिसमें राहत मिली
ये वही मामला है जिसने नवंबर 2024 में काफी सुर्खियां बटोरी थीं. 20 नवंबर 2024 को अमेरिका के अभियोजकों ने गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और कुछ दूसरे अधिकारियों पर आरोप लगाए थे. अभियोजकों का आरोप था कि अदाणी ग्रीन एनर्जी से जुड़े एक सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए भारत के सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी.
इस योजना की जानकारी अमेरिकी निवेशकों से छिपाई गई और अमेरिकी बाज़ार से पैसा जुटाते समय गुमराह करने वाले बयान दिए गए. अमेरिका के अभियोजकों का आरोप था कि इस योजना से अदाणी ग्रीन एनर्जी को लगभग 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा का फायदा हो सकता था. हालांकि गौतम अदाणी शुरू से ही इन आरोपों को नकारते रहे हैं.
फिर अचानक केस कैसे खारिज हो गया
किसी के मन में भी ये सवाल आ सकता है कि इतने गंभीर आपराधिक आरोप अचानक से कैसे खत्म हो गए. मई 2026 में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) ने अदालत को बताया कि वो इस आपराधिक मुकदमे (Criminal Prosecution) को आगे नहीं बढ़ाना चाहता है, लेकिन यही जज निकोलस गारौफिस ने DOJ की अपील को तुरंत मंजूर करने से इनकार कर दिया. गारौफिस ने जस्टिस डिपार्टमेंट से पूछा कि आखिर इतने गंभीर आरोपों वाला केस क्यों खत्म किया जा रहा है?
जज ने जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) से इस फैसले के पीछे कारण बताने को कहा. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक कोर्ट इस बात से संतुष्ट नहीं थी कि सरकार ने शुरुआत में केस खत्म करने के लिए पर्याप्त कारण दिए हैं. फिर जुलाई में US अटॉर्नी रेयान नॉसेला ने भी संकेत दिया कि उनके वरिष्ठ अधिकारी के स्तर पर केस खत्म करने का फैसला लिया गया था और उन्होंने इस फैसले का विरोध नहीं किया. आखिरकार 10 अगस्त को जज गारौफिस ने आपराधिक मामले को खत्म करने का फैसला दिया.
जज ने उठाए DOJ के फैसले पर सवाल
जज गारौफिस ने भले ही गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ आपराधिक मामला खत्म कर दिया हो, लेकिन उन्होंने जस्टिस डिपार्टमेंट के फैसले लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, जज ने DOJ के प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल ट्रेंट मैकॉटर की ओर से जांचकर्ताओं और अभियोजकों की राय को बायपास किए जाने को लेकर चिंता जताई.
DOJ की तरफ से केस खत्म करने के लिए कई कारण बताए गए, इनमें ये भी शामिल था कि मामला अमेरिका से बाहर की गतिविधियों से जुड़ा था और इसे साबित करना मुश्किल हो सकता था. जज ने ये भी पूछा था कि क्या गौतम अदाणी के नवंबर 2024 में अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर निवेश करने के वादे का कोई रोल इस फैसले में था या नहीं. आखिर में, अदाणी के खिलाफ आरोप खारिज करते हुए जज गारौफिस ने कहा कि वे संतुष्ट हैं कि अदाणी के निवेश के वादे का जस्टिस डिपार्टमेंट के फैसले में कोई रोल नहीं था.
पहले भी सुलझाए कई मामले
यह पहला मौका नहीं है जब अदाणी ग्रुप ने अमेरिकी रेगुलेटर्स के साथ किसी विवाद को सुलझाया हो. इस साल की शुरुआत में, अदाणी एंटरप्राइजेज़ ने अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) के साथ 275 मिलियन डॉलर के समझौते पर सहमति जताई थी. ये समझौता ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के 32 उल्लंघनों की सिविल जिम्मेदारी को खत्म करने के लिए किया गया था, जो कि संभावित तौर पर LPG की खरीद से जुड़े हुए थे.
इसके अलावा, इस साल मई में अदाणी और उनके भतीजे सागर ने अमेरिकी सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन (US SEC) के साथ भी एक सिविल फ्रॉड मामले में समझौता किया था. इसके तहत गौतम अदाणी 60 लाख डॉलर और सागर अडानी 1.2 करोड़ डॉलर चुकाने पर राज़ी हुए, ताकि निवेशकों को गुमराह करने के आरोपों को सुलझाया जा सके.
हालांकि, जज ने ये भी कहा कि वे इस मामले के बाकी पांच दूसरे आरोपियों पर लगे अमेरिकी रिश्वतखोरी विरोधी कानूनों के उल्लंघन और न्याय में बाधा डालने के आरोपों को खारिज नहीं करेंगे. उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि वह इन आरोपों को क्यों हटाना चाहती है.
अब आगे क्या?
गौतम अदाणी और सागर अदाणी पर आरोप भले ही खारिज हो गए हैं, लेकिन बाकी पांच सह-आरोपियों से जुड़े रिश्वतखोरी और न्याय में बाधा डालने के आरोप अभी भी कानूनी प्रक्रिया के दायरे में हैं. कोर्ट ने सरकार से इन आरोपों को लेकर और स्पष्टीकरण मांगा है. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला आगे किस दिशा में जाता है, और क्या अदाणी ग्रुप से जुड़े बाकी सभी कानूनी विवाद भी जल्द ही सुलझ जाते हैं या नहीं.
