सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट थमी! क्या केविन वॉर्श के बयान का दिख रहा असर

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Gold and Silver Stage a Recovery: Is the Fed’s Rate Outlook Shifting?

पिछले हफ्ते आई गिरावट के बाद सोमवार 19 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की बढ़त देखने को मिल रही है. हालांकि अब भी सोने की कीमतें एक तय दायरे में ही कारोबार करती दिख रही हैं, बहुत ज्यादा तेज़ी नहीं है, मगर ट्रेडर्स के बीच में एक पॉजिटिव सेंटीमेंट जरूर दिख रहा है और ये सेंटीमेंट बना है फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के एक बयान के बाद. 28 अक्टूबर को आने वाली फेड पॉलिसी से पहले, इस हफ्ते कई आर्थिक आंकड़े जारी होंगे जो फेड के पॉलिसी निर्धारण में भूमिका निभा सकते हैं. इसी से सोने की दिशा तय हो सकती है.

एक दायरे में घूम रहा सोना

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना वायदा अब भी 4200 डॉलर प्रति आउंस के इर्द-गिर्द घूम रहा है. घरेलू बाज़ार में MCX पर सोना वायदा 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपर टिकने की कोशिश में है. 0.25%-0.5% की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है.

सोने और चांदी की कीमतों में ये जो स्थिरता आई है, वो अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के उस बयान के बाद देखने को मिल रही है, जिसमें उन्होंने इशारा किया कि वो ब्याज दरें बढ़ाने की जल्दबाज़ी में नहीं है, यानी अक्टूबर में ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी.

वॉर्श ने किया इशारा, दरें बढ़ाने की जल्दी नहीं

दरअसल, फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने बैंकॉक में IMF की सालाना बैठक के दौरान ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि ब्याज दरों में जल्द बढ़ोतरी होने वाली है. इसके बाद बाजार को उम्मीद है कि 27-28 अक्टूबर की बैठक में फेड ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है. CME फेडवॉच के मुताबिक इसकी संभावना बढ़कर 85% हो गई है, जो गुरुवार को करीब 72% थी. हालांकि, दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना अभी भी बनी हुई है.

ये इसलिए जरूरी है क्योंकि पिछले हफ्ते आए महंगाई के आंकड़े अच्छे नहीं थे, अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड गुरुवार को कई हफ्तों के निचले स्तर पर आने के बाद फिर बढ़कर करीब 5.12% पर पहुंच गई और डॉलर पर दबाव बना हुआ है. फिर भी अक्टूबर में फेडरल रिज़र्व के ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद और कम हो गई. मगर, क्या खतरा पूरी तरह से टल गया है, ऐसा नहीं है. ट्रेडर्स अब भी मानते हैं कि दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना काफ़ी ज़्यादा है. यानी दरें बढ़ने का खतरा टला नहीं है, बस आगे खिसक गया है.

बॉन्ड नीचे, कच्चा तेल फिसला

सोमवार को अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.3% की रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरकर अब 5.07% पर आ चुकी है. इस वजह से भी सोना थोड़ां संभला हुआ है, मगर ज्यादा तेजी नहीं दिखा रहा है, क्योंकि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अब भी 101.95 के करीब है यानी मजबूती दिखा रहा है.

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दिख रही है. ब्रेंट क्रूड 2.5% की गिरावट के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया है. जबकि पिछले हफ्ते ये 109.86 डॉलर तक पहुंचा था. WTI क्रूड में भी 2% की गिरावट और ये 97 डॉलर के नीचे ट्रेड कर रहा है.

होर्मुज हलचल पर नजर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव एनर्जी मार्केट के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है. शुक्रवार को इस इलाके में कमर्शियल जहाजों पर हमले बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया. बाजार की नजर इस बात पर भी है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य तनाव और बढ़ता है या नहीं. ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी और कड़े प्रतिबंधों के जवाब में हमले तेज करने के संकेत दिए हैं. वहीं, जहाजों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं की वजह से खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य होने की रफ्तार धीमी पड़ गई है. इसलिए, शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड वायदा 109.86 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI सितंबर के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया.

इन डेटा पर रहेगी नजर

अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर है. मंगलवार, 20 अक्टूबर को सितंबर के हाउसिंग स्टार्ट्स यानी नए घरों के निर्माण से जुड़े आंकड़े जारी होंगे. गुरुवार को वीकली बेरोजगारी दावों और शुक्रवार को अक्टूबर के कंज्यूमर सेंटीमेंट्स सर्वे के आंकड़ों पर नजर रहेगी. इसके अलावा, 28 अक्टूबर को फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों पर फैसला आएगा, इसके बाद 29 अक्टूबर को आने वाला सितंबर का PCE महंगाई आंकड़ा भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.

सोने की कीमतों में सुधार इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी बॉन्ड की वास्तविक यील्ड में कितनी गिरावट आती है. वास्तविक यील्ड घटने से सोने को सहारा मिल सकता है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें बड़ा असर डाल सकती हैं. क्योंकि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो महंगाई का दबाव बना रहेगा, तो दिसंबर में फेड की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी. ऐसे में सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है.

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक आर्थिक घटनाओं, ब्याज दरों, महंगाई, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव सहित कई कारकों से प्रभावित होती हैं। लेख में व्यक्त विचार और बाजार का विश्लेषण निवेश की सलाह नहीं हैं। कमोडिटी बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है और कीमतों में उतार-चढ़ाव से नुकसान हो सकता है। निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

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