US फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद सोने-चांदी की कीमतों में कमजोरी के बजाय हमें बढ़त देखी है. अब जो लोग ये जानना चाहते हैं कि इस साल और अगले साल सोने की कीमतें कहां तक जाएंगी तो ये खबर उनके लिए काम की है. दुनिया की जानी माने इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्ड मैन सैक्स की ताजा रिपोर्ट आई है, जिसमें उसने एक बार फिर से दावा किया है कि सोना साल 2027 के अंत तक 5400 डॉलर प्रति आउंस तक पहुंच जाएगा.
सोने पर बुलिश गोल्डमैन सैक्स
18 सितंबर की अपनी ताजा Gold call में गोल्डमैन सैक्स की एनालिस्ट लीना थॉमस ने कहा है कि फेडरल रिजर्व की ऊंची ब्याज दरें सोने की तेजी को धीमा कर सकती हैं, लेकिन इस तेजी को खत्म करने की वजह नहीं बनेंगी. लीना थॉमस ने 2027 के अंत के लिए सोने का अनुमान 5,400 डॉलर प्रति आउंस पर बरकरार रखा है.
भारत के लिहाज से देखें तो रुपये में ये 1.90 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम बैठता है. ये इसलिए भी काफी दिलचस्प हो जाता है कि इस हफ्ते फेड की ब्याज दर में बढ़ोतरी के बाद भी उनका ये रुख़ नहीं बदला है, जबकि इकोनॉमिस्ट्स अक्टूबर में एक और बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं.
फेड 3 बार रेट कट करेगा: गोल्डमैन सैक्स
थॉमस के मुताबिक, ऊंची ब्याज दरें निकट भविष्य में ETF की मांग घटाकर सोने पर दबाव बनाए रखेंगी, फिर भी वे मानती हैं कि फेड सितंबर 2027 से मार्च 2028 के बीच तीन बार दरें घटाएगा, इसलिए अंतिम दर वही रहेगी. उनका कहना है कि कड़ी मॉनिटरी पॉलिसी का असर सोने की कीमत को नीचे ले जाने के बजाय उसकी बढ़त की रफ़्तार धीमी करेगा. इसलिए उन्होंने साल 2026 के अंत के लिए सोने की कीमतों का अनुमान 4,900 डॉलर से घटाकर 4,650 डॉलर प्रति आउंस कर दिया है. ये अब भी मौजूदा स्पॉट रेट करीब 4,350 डॉलर से ऊपर है.
तर्क क्या है?
लीना कहती हैं कि सख़्ती का बड़ा हिस्सा ETF डिमांड में पहले ही शामिल हो चुका है. थॉमस को ये भी उम्मीद है कि निकट भविष्य में सोना धीरे-धीरे चढ़ता रहेगा, क्योंकि उम्मीद से ज़्यादा सेंट्रल बैंकों की खरीदारी दरों के बचे हुए दबाव को बैलेंस कर देगी. सेंट्रल बैंकों की सोने की खरीदारी अब भी एक बड़ा फैक्टर है और गोल्डमैन का 5400 डॉलर का टारगेट भी इसी वजह से है. सेंट्रल बैंक्स हर महीने करीब 91 टन सोना ख़रीद रहे हैं, जो 2022 से पहले के औसत 17 टन से कहीं ज़्यादा है.
जेफरीज ने दिया $10,000 का टारगेट
गोल्डमैन सैक्स के बाद जेफरीज का भी सोने पर एक बहुत जबरदस्त अनुमान आया है. जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटजीज क्रिस्टोफर वुड का कहना है कि सोने की कीमत आखिरकार $10,000 प्रति आउंस तक पहुंच सकती है. हालांकि ये किसी खास साल या तारीख का टारगेट नहीं है. वुड का कहना है कि ये टारगेट उस स्थिति में ही संभव है, जब अमेरिका अपने बढ़ती ट्रेजरी यील्ड की ज्यादा ऊपर जाने से रोकने के लिए कुछ कदम उठाता है.
तर्क क्या है?
17 सितंबर 2026 को जेफरीज इंडिया फोरम में वुड ने कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी समस्या उसका बढ़ता कर्ज है. अगर US ट्रेजरी यील्ड लगातार ऊपर जाती हैं, तो अमेरिकी सरकार के लिए कर्ज पर ब्याज चुकाने की लागत और बढ़ेगी. 10-साल की ट्रेजरी यील्ड अगर 5% से ऊपर जाती है और 5.5%-6% की तरफ बढ़ती है, तो अमेरिकी बाजार पर दबाव काफी बढ़ सकता है.
ऐसी स्थिति में अमेरिका के सामने ट्रेजरी यील्ड को काबू में करने के लिए विकल्प बढ़ सकते हैं. इनमें ट्रेजरी के लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स की खरीद बढ़ाना या उधारी को शॉर्ट टर्म हिस्से की तरफ ज्यादा ले जाना जैसे कदम शामिल हो सकते हैं.
यहीं से उनका सोने वाला तर्क शुरू होता है. वुड के मुताबिक अगर अमेरिका ट्रेजरी यील्ड को दबाता है, तो इससे लंबे समय में US डॉलर के कमजोर होने का दबाव बन सकता है. और कमजोर डॉलर आमतौर पर सोने को सपोर्ट करता है. क्योंकि सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत डॉलर में तय होती है. इस स्थिति में सोने के लिए $10,000 प्रति आउंस का स्तर संभव हो सकता है.
उनके तर्क में भारत का एक खास एंगल भी है. भारत के हाउसहोल्ड के पास बड़ी मात्रा में सोना मौजूद है. देश में गोल्ड-लेंडिंग मार्केट के बढ़ने से घरों में रखा सोना धीरे-धीरे कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल होकर मॉनेटाइज हो रहा है. यानी भारत के परिवार अपने सोने की वैल्यू के आधार पर लोन लेकर उसे खपत या दूसरे खर्चों में इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर सोने की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ती है,
तो परिवारों में रखे इस सोने की मॉनिटरी वैल्यू भी काफी बढ़ जाएगी. यानी भारत के लोगों के पास घरों में रखा सोना- जैसे ज्वेलरी, सिक्के और बार काफी महंगा हो जाएगा. इससे लोग अपने सोने को बेचकर या गिरवी रखकर पैसे जुटाने का एक चलन शुरू हो सकता है.
शुक्रवार को MCX पर सोने का अक्टूबर वायदा 1282 रुपये चढ़कर 1,54,263 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ है. हालांकि इंट्राडे में इसने 1,54,600 रुपये को छुआ था. जबकि कॉमेक्स पर सोना वायदा शुक्रवार 18 सितंबर 2026 को 4,439.60 डॉलर प्रति आउंस तक पहुंचा था.

