आज सोना फिर ₹2,000 टूटा, हफ्ते भर में ₹15,000 रुपये सस्ता हुआ! क्या आगे और आएगी गिरावट?

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Gold Plunges ₹15,000 in Just a Week After Another ₹2,000 Drop: Is the Worst Over?

सोने की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है. बीते तीन ट्रेडिंग सेशन में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में दोनों ही जगहों पर सोने की कीमतें 6.6% से ज्यादा टूट चुकी हैं. 28 अगस्त को फेड चेयरमैन केविन वार्श के जैक्सन होल में दिए गए बयानों के बाद शुरू हुई सोने की पिटाई अब भी जारी है, बल्कि और ज्यादा बढ़ी है. क्योंकि मजबूत डॉलर और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों ने सोने पर दबाव बढ़ाया है.

हफ्ते भर में सोना ₹15,000 टूटा

सबसे पहले घरेलू मार्केट की बात करते हैं, जहां सोने की कीमतें सिर्फ हफ्ते भर में ही 15,000 रुपये से ज्यादा नीचे आ चुकी हैं, और ये गिरावट अब भी जारी है. 24 अगस्त, 2026 को MCX पर सोना वायदा ने 1,64,773 रुपये प्रति 10 ग्राम का हाई बनाया था, वहां से कीमतें गिरते गिरते अब बुधवार 2 सितंबर, 2026 को 1.50 लाख रुपये के नीचे फिसल गईं हैं. सोना वायदा ने 2 सितंबर को 2,000 रुपये से ज्यादा टूटकर 1,49,665 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया.

इंटरनेशनल मार्केट में भी सोना वायदा अब 4,400 डॉलर के नीचे फिसल गया है. 2 सितंबर को कॉमेक्स पर सोना वायदा 1% से ज्यादा की गिरावट के साथ 4,329 डॉलर प्रति आउंस तक लुढ़क गया, जो कि 4 हफ्ते का निचला स्तर है.

टेक्निकल चार्ट पर सोना

टेक्निकल चार्ट्स पर भी सोने में फिलहाल कमजोरी के संकेत दिखाई दे रहे हैं. अगर सोना अपने हालिया रिकवरी के 50% Fibonacci retracement level के नीचे इंट्राडे ब्रेक देता है, तो इसे मंदी के लिए एक अहम बियरिश ट्रिगर माना जा सकता है. वहीं, MACD काफी निगेटिव है और जीरो लाइन के नीचे बना हुआ है, जो बाजार में बढ़ते बियरिश प्रेशर का संकेत देता है. इसके अलावा RSI करीब 44 पर है, जिससे पता चलता है कि सोने में बुलिश मोमेंटम कमजोर पड़ रहा है. हालांकि, बड़ी गिरावट की पक्की पुष्टि के लिए सोने का $4,276 के आसपास मौजूद 200-day EMA के नीचे लगातार टिकना जरूरी होगा. अगर सोना इस सपोर्ट के नीचे बना रहता है तो आगे और कमजोरी देखने को मिल सकती है.

सोने में क्यों आ रही है भारी गिरावट

फेड गवर्नर का हॉकिश बयान

28 अगस्त को फेड चेयरमैन वार्श के हॉकिश भाषण के बाद से ही सोने की कीमतों में हमने भारी गिरावट देखी, फिर इसके बाद फेडरल रिजर्व के एक गवर्नर माइकल बार ने मंगलवार को कहा कि अगर महंगाई तेजी से कम नहीं होती है, तो अमेरिकी सेंट्रल बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका में महंगाई अभी भी काफी ऊंची है और पिछले पांच साल से ज्यादा समय से ये समस्या बनी हुई है.

सितंबर 15-16 को होने वाली फेड की बैठक का जिक्र करते हुए बार ने कहा कि अगर आंकड़े ये संकेत देते हैं कि महंगाई तेजी से नीचे नहीं आ रही है, तो फेड को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए कदम उठाने होंगे. बार की इस बात को बाजार ने हल्के में नहीं लिया क्योंकि उनके पास FOMC में वोटिंग राइट्स भी हैं. इसलिए, ये माना जा सकता है कि अगर ऐसी नौबत आई तो, बार ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में ही वोट देंगे. ये फेड चेयरमैन केविन वार्श के बाद सबसे हॉकिश बयान है.

मिडिल ईस्ट तनाव, क्रूड में उछाल

सोने में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में से एक इस समय मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव भी है. अमेरिका और ईरान के बीच टकराव फिर तेज हुआ है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अधिकार जताने की होड़ भी बढ़ गई है. इसका असर ये हुआ है कि कच्चा तेल 2 सितंबर, 2026 को 4.5% की तेज़ी के साथ 97 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है, जो कि 24 जुलाई के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. महंगा कच्चा तेल बाजार में महंगाई बढ़ने की चिंता पैदा करता है, जिससे निवेशकों को डर है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, इसलिए सोने पर दबाव दिख रहा है.

डॉलर में मज़बूती

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 99.7 के ऊपर पहुंच गया है, जो करीब 3 हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है. जब डॉलर महंगा होता है तो विदेशी खरीदारों के लिए सोने में निवेश की लागत बढ़ जाती है, इसलिए वो निवेश से बचते हैं, जिससे डिमांड कमजोर होती है और सोने पर दबाव आता है.

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल

सोने पर एक और बड़ा दबाव US ट्रेजरी यील्ड से आ रहा है. अमेरिकी 10-साल ट्रेजरी यील्ड जनवरी 2025 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. निवेशकों के लिए यह जरूरी है क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता है, जबकि US बॉन्ड्स ऊंची यील्ड दे रहे हैं. ऐसे में कुछ निवेशक गोल्ड से पैसा निकालकर बॉन्ड्स की तरफ जा सकते हैं.

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