सोने की ज्वेलरी बनवाना चाहते हैं या निवेश करना चाहते हैं तो अच्छी खबर है. सोने की कीमतों में मंगलवार 22 सितंबर, 2026 को अचानक गिरावट आ गई. MCX पर सोने का अक्टूबर वायदा आज सुबह हल्की फुल्की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा था, मगर करीब 11 बजे इसमें तेज़ गिरावट आई और ये करीब 1,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गया. सोमवार को सोना वायदा 1,53,094 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, फिलहाल ये 1,52,150 रुपये पर कारोबार कर रहा है.
इंटरनेशनल मार्केट में भी कॉमेक्स पर सोना वायदा 1% से ज्यादा की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है. इंट्राडे में ये 4,337.76 डॉलर तक फिसला है. जबकि स्पॉट गोल्ड में करीब 0.5% की गिरावट है और ये $4,320.63 प्रति आउंस तक फिसल गया. इतना ही नहीं, सोने की रिटेल कीमतों में भी अच्छी खासी गिरावट आई है.
रिटेल गोल्ड सस्ता हुआ
ज्वेलर्स के पास जाकर गोल्ड ज्वेलरी बनवाना चाहते हैं तो अच्छा मौका है, क्योंकि गोल्ड ज्वेलरी के लिए रिटेल कीमतें सस्ती हुई हैं. IBJA की वेबसाइट के मुताबिक 21 सितंबर को 24 कैरेट गोल्ड की रिटेल कीमत 1,53,337 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, आज 22 सितंबर को रिटेल कीमत 1,52,130 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है, यानी सोना आज 1200 रुपये सस्ता हुआ है. इसी तरह, 22 सितंबर को 22 कैरेट गोल्ड 1,48,480 रुपये प्रति 10 ग्राम पर मिल रहा है और 20 कैरेट गोल्ड 1,35,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है. हालांकि ये रिटेल कीमतें सांकेतिक हैं. IBJA रिटेल गोल्ड प्राइस के लिए एक बेंचमार्क की तरह काम करता है.
रिटेल गोल्ड कीमतें
22 सितंबर, 2026
| Gold Purity | Price (per 10 gm) |
|---|---|
| 24 KT | ₹1,52,130 |
| 22 KT | ₹1,48,480 |
| 20 KT | ₹1,35,400 |
| 18 KT | ₹1,23,230 |
सोने की कीमतों में अचानक गिरावट क्यों?
दरअसल, डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता ने सोने पर दबाव बनाया है. पिछले हफ्ते फेडरल रिजर्व की दरों में बढ़ोतरी के बाद अब बाजार ये समझने की कोशिश कर रहा है कि आगे भी ब्याज दरें बढ़ सकती हैं या नहीं.
सोने पर दबाव की एक बड़ी वजह डॉलर भी है. US डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.49 पर पहुंच गया है. पिछले हफ्ते इसमें 1% से ज्यादा की तेजी आई थी. आम तौर पर डॉलर मजबूत होने पर डॉलर में खरीदा जाने वाला सोना दूसरे देशों के निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है, इससे इसकी मांग पर दबाव आता है और कीमतें गिरती हैं.
फेड पर फोकस
अब बाजार का फोकस फिर से फेडरल रिजर्व की मॉनिटरी पॉलिसी पर लौट आया है. ANZ के एनालिस्ट्स का कहना है कि महंगाई का जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और इसी वजह से फेड का रुख आगे भी सख्त रह सकता है.
हालांकि, हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट ने सोने को कुछ राहत दी है. तेल की कीमतें गिरने से आगे महंगाई का दबाव कम हो सकता है. इसका मतलब ये है कि फेडरल रिजर्व को महंगाई से निपटने के लिए और ज्यादा सख्त कदम उठाने की जरूरत कुछ कम हो सकती है.
लंबी अवधि में गोल्ड को सपोर्ट
भले ही छोटी अवधि में ब्याज दर और डॉलर सोने के लिए चुनौती बने हुए हैं, लेकिन लंबी अवधि में तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं है. Gold ETFs में निवेश का रुझान फिर से सुधर रहा है, जो बताता है कि निवेश डिमांड वापस आ रही है. इसके अलावा सेंट्रल बैंकों की खरीदारी भी सोने के लिए एक बड़ा सपोर्ट बनी हुई है.
चीन ने अगस्त में करीब 20 टन सोना खरीदा, जो पिछले तीन साल में उसकी एक महीने में सबसे बड़ी खरीदारी है. चीन के गोल्ड इंपोर्ट में सालाना आधार पर 80% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. इससे भारत से आने वाली कमजोर गोल्ड इंपोर्ट की भरपाई करने में मदद मिल रही है.
यानी फिलहाल सोने के सामने फेड की सख्त पॉलिसी और मजबूत डॉलर जैसी शॉर्ट टर्म चुनौतियां हैं, लेकिन सेंट्रल बैंकों की खरीदारी, गोल्ड ETF डिमांड और वित्तीय और कर्ज से जुड़ी चिंताएं लंबी अवधि में गोल्ड को सपोर्ट दे सकती हैं.

