लगातार चार दिनों से सोने की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है, इंटरनेशनल मार्केट में सोना अब 4,300 डॉलर प्रति आउंस के ऊपर ट्रेड कर रहा है. लगातार तेजी के दम पर गुरुवार को सोना 7 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया है. इस हफ्ते सोना अबतक 6% तक मज़बूत हो चुका है.
इंटरनेशनल मार्केट में कॉमेक्स पर सोना वायदा करीब 0.5% की मज़बूती के साथ 4,324 डॉलर प्रति आउंस पर ट्रेड कर रहा है. इंट्राडे में सोना वायदा 4,363.60 डॉलर तक गया. घरेलू मार्केट में MCX पर गोल्ड अक्टूबर वायदा 750 रुपये की मामूली बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है, फिलहाल 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपर है
सोने की कीमतों में तेज़ी क्यों है?
सोने में तेजी की सबसे बड़ी वजह है होर्मुज को लेकर बढ़ी हुई उम्मीदें. मिडिल ईस्ट में तनाव के केंद्र में रहने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. ईरान और ओमान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए जहाजों की आवाजाही के लिए एक अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर बनाने पर सहमति जताई है. जिसके 2 से 4 महीने तक लागू रहने की उम्मीद है. हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि इसका मतलब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलना नहीं है.
गिरते क्रूड से सोने को मज़बूती
इस डील से बाजार में ये उम्मीद बढ़ी कि मिडिल ईस्ट से ऑयल सप्लाई बेहतर हो सकती है. इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आया, ब्रेंट क्रूड फिसलकर 78 डॉलर प्रति बैरल तक आ चुका है. WTI क्रूड लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है. इससे महंगाई बढ़ने की आशंका कुछ कम हुई. जब महंगाई का दबाव घटता है, तो निवेशकों को लगता है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरें ज्यादा आक्रामक तरीके से नहीं बढ़ा पाएगा.
रेट हाइक की संभावनाएं घटीं
पिछले हफ्ते तक बाज़ार इस बात को लेकर तनाव में था कि फेडरल रिजर्व इस साल दो बार ब्याज दरें बढ़ा सकता है, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है, क्योंकि महंगाई का दबाव कम हो रहा है.
कमोडिटी और बॉन्ड बाजार में आ रहे संकेतों के बाद अब निवेशकों का अनुमान है कि साल के अंत तक सिर्फ एक बार ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है.
ब्याज दरों में कम बढ़ोतरी या कटौती आमतौर पर सोने की कीमतो के लिए पॉजिटिव मानी जाती है, क्योंकि बॉन्ड जैसे एसेट पर जब ज्यादा ब्याज नहीं मिलता तो निवेशक गोल्ड की तेजी का फायदा उठाने के लिए इस तरफ मुड़ जाते हैं. चूंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, ऐसे में यील्ड्स और डॉलर के कमजोर पड़ने से ये मेटल निवेशकों के लिए और आकर्षक बन जाता है.
CME फेड वॉच के मुताबिक सितंबर में रेट हाइक की संभावना अब करीब 55% हो गई है, जबकि इसी हफ्ते की शुरुआत में ये अनुमान करीब 67% था. जिसमें से 50% से ज्यादा संभावना ये थी कि 25-50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है. यानी धीरे-धीरे ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाएं कमज़ोर पड़ रही हैं.
कमजोर जॉब डेटा का सपोर्ट
सोने की तेजी की एक और बड़ी वजह अमेरिका से आए कमजोर रोजगार आंकड़े भी हैं. ADP Employment Report के मुताबिक जुलाई में अमेरिकी प्राइवेट सेक्टर में सिर्फ 44,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जबकि बाजार को 70,000 नौकरियों की उम्मीद थी. ये जनवरी के बाद सबसे कमजोर मंथली जॉब ग्रोथ है. जब जॉब्स के आंकड़े कमजोर आते हैं, तो ये माना जाता है कि इकोनॉमी की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. ऐसे में फेड के पास ब्याज दरों को तेजी से बढ़ाने की गुंजाइश कम हो सकती है, जिसका फायदा सोने को मिलता है.
डॉलर 7 हफ्ते के निचले स्तर पर
बॉन्ड यील्ड पर दबाव का असर अमेरिकी डॉलर पर भी दिखा है. डॉलर इंडेक्स गुरुवार को करीब 99.6 पर कारोबार करता दिखा, जो लगभग 7 हफ्ते के निचले स्तर के आसपास है. चूंकि सोने का ट्रेड डॉलर में होता है, अगर डॉलर कमजोर होता है तो विदेशी निवेशकों के लिए सोना खरीदना सस्ता पड़ता है. जिससे डिमांड बढ़ जाती है और सोने की कीमतें ऊपर चढ़ती हैं.
बाज़ार को इंतजार अब अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली डील का है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर सहमति बननी है. मगर, अभी तक इस डील को लेकर कोई पुख्ता खबर नहीं आई है. सिर्फ अमेरिका की ओर से दावा किया जा रहा है कि डील पर अच्छी चर्चा हुई है, मगर कोई डिटेल्स नहीं दी गई. जबकि ईरान कह रहा है कि वो अमेरिका से कोई सीधी बातचीत नहीं कर रहा है. बल्कि ओमान के जरिए चर्चा हो रही है. तो अब सवाल यही है कि क्या ये भी पिछले कई दावों की तरह निकलेगा या सही में कोई ठोस डील हो सकेगी, जिस पर ईरान भी सहमत हो.

