जुलाई में सोने की कीमतें एक ट्रैप में फंस गई हैं. भाव 1.45 लाख रुपये से 1.41 लाख रुपये के बीच ही घूम रहे हैं. MCX पर सोने का अगस्त वायदा कुछ मौकों पर 1.46 लाख रुपये के पार गया भी, लेकिन ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया.
13 जुलाई, 2026 को भी सोने का अगस्त वायदा 1.3% टूटा है और 1.42 लाख रुपये से नीचे फिसलकर 1,41,557 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. फिलहाल सोना वायदा 1,000-1,100 रुपये की रेंज में घूम रहा है.
चांदी की कीमतों पर भी भारी दबाव है, चांदी का सितंबर वायदा 13 जुलाई को 5,300 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा टूट गया. इसने इंट्राडे में 2,17,277 रुपये का निचला स्तर भी छुआ, हालांकि ये चांदी निचले स्तरों से करीब 3,000 रुपये तक रिकवर हो चुकी है. फिलहाल ये 2,20,800 रुपये के करीब ट्रेड कर रही है.
अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी यही हाल है, 13 जुलाई को भारतीय समय के मुताबिक दोपहर 2 बजे तक कॉमेक्स पर सोना वायदा 1% से ज्यादा टूटकर 4,051.97 डॉलर प्रति आउंस तक लुढ़क गया. फिलहाल इसमें हल्का सुधार देखने को मिल रहा है और ये 4,080 डॉलर प्रति आउंस के करीब ट्रेड कर रहा है.
सोने में क्या आ रही है गिरावट
जब से मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ा है, सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव भी बढ़ा है. बीते वीकेंड में अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में साइप्रस के झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर हमला हुआ था, इसके बाद ही तनाव और बढ़ गया.
ईरान दावा कर रहा है कि वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोलेगा, जबकि अमेरिका इस बात को मानने को राजी नहीं है. इसी को लेकर दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने हैं, हालात हर दिन बदतर होते जा रहे हैं, जो शांति वार्ता की उम्मीदें थीं वो भी अब कम होती जा रही हैं.
इसका असर ये हो रहा है कि दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का 20% सप्लाई होता है. जब दोनों देशों के बीच सीज़फायर का ऐलान हुआ था, जुलाई की शुरुआत में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया था, लेकिन जब दोबारा हालात बिगड़े तो ये 80 डॉलर के करीब पहुंच गया है. यानी महज 10 दिनों में ही ये 10 डॉलर तक चढ़ चुका है. 13 जुलाई को कच्चा तेल 3% की मजबूती के साथ 78.15 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है.
अगर कच्चे तेल की कीमतें ऐसे ही ऊपर बनी रहीं तो महंगाई बढ़ने का खतरा मंडराएगा. ये अमेरिकी फेडरल रिजर्व को मजबूर करेगा कि वो लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखे. जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ता है. क्योंकि सोना एक नॉन-यील्ड असेट है, यानी सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए निवेशक उन एसेट्स की ओर भागते हैं, जहां उन्हें ज्यादा ब्याज मिलता है.
जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो आमतौर पर डॉलर भी मजबूत होता है. ये विदेशी निवेशकों के लिए सोने की खरीद लागत भी बढ़ा देती है, जिससे सोने की डिमांड कम हो जाती है और सोने के भाव गिरने लगते हैं. ब्याज दरें बढ़ने का खतरा इसलिए भी निवेशकों के लिए चिंताजनक है क्योंकि पिछले हफ्ते जारी जून फेड मिनट्स में ये बात निकलकर सामने आई थी कि पॉलिसीमेकर्स ने जरूरत पड़ने पर ब्याज दरें फिर बढ़ाने की संभावना जताई थी. क्योंकि उनका मानना है कि महंगाई का जोखिम अभी भी बना हुआ है.
सोने के लिए दो सबसे बड़े ट्रिगर्स
इस हफ्ते सोने की चाल क्या होगी, इसे तय करेंगे इसी महीने आने वाले दो बहुत जरूरी इवेंट्स. पहला है फेडरल रिजर्व केविन वॉर्श की अमेरिका कांग्रेस के सामने पहली बार पेशी. जहां वो अपनी गवाही ये टेस्टीमनी देगे. जिसमें ब्याज दरों को लेकर कोई संकेत मिल सकता है.
- पहली टेस्टीमन अमेरिकी समय के मुताबिक, 14 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे, ‘House Financial Services Committee’ के सामने होगी
- केविन वॉर्श की दूसरी टेस्टीमनी 15 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे ‘Senate Banking Committee’ के सामने होगी
बाज़ार को अभी तक इस बात की भनक नहीं लग पाई है कि केविन वॉर्श आखिर ब्याज दरों को लेकर क्या सोचते हैं, क्योंकि ज्यादातर मौकों पर उन्होंने दरों को लेकर खुलकर कुछ नहीं बोला है. इसलिए बाजार को इन दो टेस्टीमनी से बड़ी उम्मीदें हैं कि शायद वो संसद के सामने दरों को लेकर अपने पत्ते खोलें या फिर कोई इशारा ही दें.
फेड का चेयरमैन चुने जाने से पहले तक केविन वॉर्श को राष्ट्रपति ट्रंप की पहली पसंद बताया जा रहा था, ट्रंप हमेशा से ही ब्याज दरों को घटाने के लिए पूर्व चेयरमैन जेरोमी पॉवेल पर दबाव बनाते रहे, लेकिन उन्होंने ट्रंप की एक नहीं सुनी. अब जब वॉर्श फेड के चेयरमैन बने हैं तब भी ट्रंप को दरों की कटौती की खुशखबरी नहीं मिली है. इसलिए देखना होगा कि वॉर्श का अगला कदम क्या होगा, क्या वो फेड की स्वतंत्रता को बरकरार रखते हुए फैसला करते हैं या ट्रंप की चाहत के मुताबिक.
रिटेल महंगाई के आंकड़े
दूसरा महत्वपूर्ण इवेंट है अमेरिका रिटेल महंगाई का आंकड़ा, जो कि 14 जुलाई को ही जारी होगा. मई में हेडलाइन CPI बढ़कर 4.2% रही थी, इस बार उम्मीद है कि ये थोड़ी कम होकर 3.9% पर आ जाए. अगर CPI अनुमान से ज्यादा आता है, तो ये सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ाएगा, क्योंकि फेड ब्याज दरों को ऊंचा रखने पर मजबूर होगा.

