सोने-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Prices) में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. पिछले हफ्ते MCX पर सोने का अक्टूबर वायदा 5% से ज्यादा टूटा था. इस हफ्ते की शुरुआत भी बेहद खराब रही है. सोमवार, 31 अगस्त 2026 को MCX पर गोल्ड वायदा 1.5% से ज्यादा टूट चुका है.
पिछले हफ्ते की ऊंचाई से फिसला
31 अगस्त, 2026 को सुबह 10 बजे के करीब MCX पर चांदी का सितंबर वायदा भी 1% से ज्यादा की गिरावट के साथ यानी 2,600 रुपये प्रति किलो से ज्यादा टूटकर 2,34, 164 रुपये पर आ गया. हालांकि ये खुलते ही 2,32,501 तक फिसल गया था यानी पिछली क्लोजिंग से ये 1.77% टूटा है.
इंटरनेशनल मार्केट में कॉमेक्स पर गोल्ड वायदा 4,500 डॉलर प्रति आउंस के नीचे फिसल चुका है. 31 अगस्त, 2026 की सुबह ये करीब 1.5% फिसलकर 4,445.75 डॉलर पर आ गया. पिछले हफ्ते 24-28 अगस्त, 2026 के दौरान कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स में तेज़ी देखी गई थी. इस दौरान गोल्ड ने करीब जुलाई 30 से अगस्त 30 की अवधि में $4,755 का हाई बनाया था,
पिछले हफ्ते अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड्स के बायबैक बढ़ाने का ऐलान करने के बाद सोने की कीमतों में हमने जोरदार तेज़ी देखी थी. सोमवार 24 अगस्त को गोल्ड फ्यूचर्स करीब $4,738.50 के इंट्राडे हाई पर पहुंचा था, जबकि स्पॉट गोल्ड करीब $4,679 तक चढ़ा था. जो कि 15 हफ्तों का हाई था.
लेकिन इसके बाद, 28 अगस्त को जैक्सन होल संगोष्ठी में फेडरल रिजर्व चेयरमैन ने महंगाई और ब्याज दरों को लेकर जो हॉकिश बयान दिए, उसके बाद से ही सोने की कीमतों में जोरदार गिरावट है. पिछले हफ्ते के हाई 6.51% तक टूट चुका है. अकेले शुक्रवार को ही कॉमेक्स पर गोल्ड वायदा 3.2% फिसला था, जो कि जून के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट थी.
सोने की कीमतों में क्यों आ रही गिरावट?
पहली वजह से तो बिल्कुल साफ है, फेडरल रिजर्व का जैक्सन होल में दिया गया बयान, जिसके बाद से ही दुनिया भर में सोने की कीमतों ने गोता लगाया. जिसमें वार्श ने साफ संकेत दिया कि महंगाई को काबू करने में इतनी सफलता नहीं मिली है कि फेड बेफिक्र हो सके. उन्होंने कहा कि अगर महंगाई 2% के लक्ष्य की तरफ नहीं बढ़ती है तो फेड का काम करना होगा.
उनके बयान से ये साफ हो गया था कि वार्श महंगाई को काबू में करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने से भी नहीं हिचकेंगे. हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि वो ऐसा कब करेंगे, लेकिन रेट कट की उम्मीदों को झटका जरूर दे दिया. यही वो बात थी जिसने गोल्ड को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई. वार्श के इस बयान के बाद सितंबर में रेट हाइक की संभावना तेजी से बढ़ गई
कच्चा तेल 5% चढ़ा
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का सीज़फायर खत्म होते ही कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर से चढ़ने लगी हैं. सोमवार को 31 अगस्त, 2026 को ब्रेंट क्रूड पिछली क्लोजिंग 86.12 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 90.62 डॉलर के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया, यानी इसमें 5.2% का जोरदार उछाल देखने को मिला है.
60 दिन के सीज़फायर के दौरान अमेरिका और ईरान किसी औपचारिक समझौते या युद्धविराम के विस्तार पर सहमति नहीं बना सके. इससे मिडिल-ईस्ट में करीब 6 महीने से चल रहा संघर्ष और लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है. अमेरिका ने रविवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के लाराक द्वीप पर हमला कर वहां दो लॉन्चरों को निशाना बनाया है.
जुलाई के आखिर के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिका का ये पहला हमला था. इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में दो अमेरिकी एयरबेस पर हमला किया. इसके बाद से ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी आना शुरू हुई है.
IG के मार्केट एनालिस्ट टोनी साइकामोर के मुताबिक, ऐसा लगता है कि संघर्ष एक बार फिर से बढ़ने के दौर में पहुंच गया है और ये स्थिति कुछ दिनों से लेकर कई हफ्तों तक रह सकती है. अगर संघर्ष और बढ़ता है और WTI क्रूड 85.80–85.90 डॉलर प्रति बैरल के रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर निकल जाता है, तो इसकी कीमत पहले पिछले हफ्ते के 87.69 डॉलर के हाई और उसके बाद जुलाई के 93.50 डॉलर के हाई की तरफ बढ़ सकती है.
सोने की कीमतों पर असर
कच्चा तेल जब महंगा होता है तो महंगाई का खतरा बढ़ता है. अगर महंगाई बढ़ती है, फेडरल रिजर्व के पास ब्याज दरें बढ़ाने का रास्ता खुल जाएगा, जो कि सोने की कीमतों को और कमजोर कर सकता है. 16 सितंबर को फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का ऐलान होगा, मगर इसके पहले 11 सितंबर को CPI के डेटा आएंगे. अगर कच्चा तेल ऐसे ही चढ़ता रहा तो महंगाई के आंकड़ों पर इसका असर दिख सकता है. इसलिए गोल्ड पर आगे दबाव रह सकता है.
बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड ऊंचाई पर
10-साल की US ट्रेजरी यील्ड करीब 4.72% तक पहुंच गई है, जबकि लंबी अवधि की 30 साल की बॉन्ड यील्ड 5.2% से ऊपर हैं. लंबी अवधि की ऊंची बॉन्ड यील्ड सोने के लिए आमतौर पर निगेटिव होती हैं. क्योंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता जब सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड ज्यादा यील्ड देने लगते हैं, तो निवेशकों के लिए सोना रखने की अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है.
क्या सोने में आगे भी गिरावट आएगी
अभी जो माहौल और आर्थिक संकेत मिल रहे हैं, उसके हिसाब से सोने की कीमतों पर अभी दबाव देखने को मिल सकता है. अब चूंकि सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ गई है, जो कि सीधे तौर पर सोने के खिलाफ जाता है. CME फेडवॉच भी इसी ओर इशारा कर रहा है कि 28 अगस्ते के बाद से इसका तराजू उल्टा होने लगा है. अब करीब 60% संभावना इस बात की है कि सितंबर में फेड ब्याज दरें बढ़ा सकता है और 40% संभावना पॉज की है. फेड की पॉलिसी आने में अभी 2 हफ्ते से ज्यादा का वक्त है, इस दौरान लेबर मार्केट के भी डेटा आएंगे, महंगाई के भी डेटा आएंगे. जो फेड की पॉलिसी के फैसलों का आकार देंगे.
इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध भड़कने की वजह से क्रूड की कीमतों में जोरदार उछाल है. जो सोने के लिए निगेटिव है. इसलिए आने वाले कुछ हफ्ते सोने के लिए दबाव भरे हो सकते हैं.

