13 साल की सबसे खराब तिमाही दर्ज करने के बाद सोने की कीमतों की चमक एक बार फिर लौट आई है. अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाज़ार दोनों में ही सोना बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है. हालांकि तेजी बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन ब्याज दरें बढ़ने का खतरा अगर कम हुआ तो ये तेज़ी आगे बढ़ भी सकती है.
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोना वायदा लगातार दो दिनों से कमजोरी दिखा रहा था, 1 जुलाई को ये 4,000 डॉलर के नीचे फिसल गया था, लेकिन आज 2 जुलाई को एक बार फिर ये 4,080 डॉलर प्रति आउंस के ऊपर ट्रेड कर रहा है.
घरेलू मार्केट में MCX पर सोना वायदा में बुधवार, 1 जुलाई को जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली. बुधवार को सोना इंट्राडे में 1,40,552 रुपये तक फिसल गया था, यानी तकरीबन 2,000 रुपये कमजोर हुआ था, लेकिन इसके बाद इसमें जरबदस्त रिकवरी लौटी और ये 1,44,430 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, यानी निचले स्तरों से ये 3,800 रुपये प्रति 10 ग्राम से भी ज्यादा मज़बूत हुआ. 2 जुलाई को MCX सोना वायदा हल्की कमजोरी पर खुला, इसमें फिलहाल उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. हालांकि ये 1200-1300 रुपये की रेंज में घूम रहा है.
फेड चीफ वॉर्श पड़े नरम!
बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व केविन वॉर्श का पुर्तगाल में ‘यूरोपीय सेंट्रल बैंक’ के मंच पर दिया गया भाषण सोने की दिशा तय करने वाला था. जून की पॉलिसी में फेड के हॉकिश रवैये ने सोने पर भारी दबाव बनाया था, इसलिए वॉर्श के इस भाषण पर दुनिया भर के बाजारों की नज़रें टिकी थीं.
फेड के नए नए बॉस बने केविन वॉर्श जो कि पहले काफी हॉकिश नज़र आ रहे थे, फेड पॉलिसी के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में थोड़ा कम हॉकिश नजर आए. उनके इस भाषण के बाद फेडरल रिजर्व के अगले कदमों को लेकर बनी चिंताएं थोड़ी कम हुईं.
दरअसल, मिडिल ईस्ट जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गईं थी, जिससे महंगाई बढ़ने लगी थी. डर इस बात का था कि फेड महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ा सकता है. ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो सोने पर दबाव बढ़ता है.
वॉर्श ने पिछले महीने फेड चेयरमैन के रूप में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वो कीमतों में स्थिरता पर काम करेंगे, इस बात को वॉर्श ने यहां भी दोहराया. उन्होंने कहा कि महंगाई को 2% के लक्ष्य पर लेकर आना उनका दृढ़ संकल्प है.
मजे की बात ये रही कि बुधवार को अपने संबोधन में वॉर्श ने एक बार फिर से ब्याज दरों पर कोई भी ‘फॉरवर्ड गाइडेंस’ देने से इनकार कर दिया, यानी उन्होंने ये बताने से साफ मना कर दिया कि जुलाई की बैठक में ब्याज दरें बढ़ेंगी या घटेंगी. उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि मीटिंग में इस पर आपस में ज़बरदस्त बहस होगी.
लेकिन साथ ही उन्होंने इस बात की भी जिक्र किया कि ‘महंगाई के जोखिम’ अब कम हुए हैं. जबकि, फरवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ही फेड अधिकारियों का पूरा ध्यान एनर्जी प्राइसेज की वजह से बढ़ रही महंगाई पर था, लेकिन पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें जंग शुरू होने से पहले के स्तर पर आ गई हैं, जिससे महंगाई की चिंताएं काफी कम हो गई हैं.
कच्चा तेल $70 तक लुढ़का
28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच जंग की शुरुआत हुई थी, इसके पहले तक ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर के आस-पास ट्रेड कर रहा था. लेकिन जंग शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही ये 120 डॉलर तक उछल गया था. अब दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. जंग बंद है, इसलिए कच्चा तेल एक बार फिर से 70 डॉलर पर आ चुका है.
कच्चा तेल सस्ता होने से महंगाई बढ़ने का जोखिम कम हो जाता है, इसलिए ब्याज दरें बढ़ने का संभावना भी कम हो जाती है. जिससे सोने की कीमतों को सपोर्ट मिलता है और भाव बढ़ते हैं. इस वक्त हम यही देख रहे हैं.
इस साल कहां तक जाएंगे भाव?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की नई छमाही रिपोर्ट कहती है कि सोने की कीमतों में इस साल की शुरुआत में आई भारी गिरावट के बावजूद, सोना पिछले एक साल में सबसे अच्छा रिटर्न देने वाले एसेट्स में से एक बना हुआ है. रिपोर्ट का कहना है कि सेंट्रल बैंकों और लंबी अवधि के निवेशकों की तरफ से आने वाली भारी मांग की वजह से अब सोने की कीमतों में और बड़ी गिरावट आने का जोखिम कम हो गया है और 2026 के बाकी महीनों में सोने की कीमतों में फिर से बड़ी बढ़त देखने को मिल सकती है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की छमाही रिपोर्ट में ये अनुमान जताया गया है कि अगर आर्थिक मंदी बढ़ती है या ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें फिर से जागती हैं, तो सोने की कीमतें फिर से बढ़ेंगी $4,500 प्रति औंस या इससे ऊपर जा सकता है. अगर आर्थिक संकेत बहुत मजबूत और साफ रहे तो सोना स्थिरता के साथ $5,000 प्रति आउंस के स्तर को छू सकता है.
सेंट्रल बैंक्स ने साल 2022 से हर साल औसतन 1,000 टन सोना खरीद रहे हैं और यह ट्रेंड आगे भी जारी रहने की उम्मीद है. WGC के मुताबिक अगर सेंट्रल बैंक्स अपने सालाना औसत से सिर्फ 20-30 टन भी ज़्यादा सोना खरीदते हैं, तो सोने की कीमतों में सीधा 1% का उछाल आता है. ये निवेशकों के बीच एक पॉजिटिव सिग्नल है.

