मिडिल ईस्ट में इस वक्त शांति है, बीते दो दिनों से ईरान और अमेरिका ने एक दूसरे के ऊपर कोई हमला नहीं किया है. कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर के नीचे फिसल चुकी हैं. जिसकी वजह से सोने और चांदी की कीमतों में हल्की फु्ल्की बढ़त देखने को मिल रही है. तो सवाल यही कि क्या अब सोना खरीदने का टाइम आ गया है, क्योंकि जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों में सुधार के संकेतों के अलावा, इस हफ्ते कई बड़े डेटा आएंगे, जो काफी हद तक सोने की चाल तय करेंगे.
आगे बढ़ने से पहले ये जान लें कि आज सोने में हुआ क्या. सोमवार, 27 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने और चांदी वायदा में करीब 1% की मज़बूती के साथ ट्रेड हो रहा है. कॉमेक्स पर सोना वायदा ने इंट्राडे में 4,118.75 डॉलर प्रति आउंस का हाई बनाया, जबकि चांदी ने 60.385 डॉलर प्रति आउंस का इंट्राडे हाई बनाया. सोना वायदा दो हफ्ते पहले 4,000 डॉलर के नीचे फिसल गया था. क्योंकि तब महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा था.
सोने में क्यों आई तेज़ी?
सोना वायदा में तेजी की बड़ी वजह है, कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट. ब्रेंट क्रूड सोमवार को 6.5% से ज्यादा टूटकर 84 डॉलर के करीब आ गया. क्रूड ने पिछले कुछ हफ्तों में जितना भी वॉर प्रीमियम कमाया था, वो एक ही दिन में गायब हो गया. क्रूड के भाव पिछले हफ्ते 102 डॉलर तक उछल गए थे, लेकिन अब ये उस ऊंचाई से काफी नीचे आ चुके हैं.
हालांकि घरेलू मार्केट में MCX पर सोना वायदा एक बेहद सीमित दायरे में ट्रेड करता हुआ दिख रहा है. हालांकि सोना वायदा इंट्राडे में 1,100 रुपये प्रति 10 ग्राम तक मज़बूत जरूर हुआ, लेकिन 650 रुपये की मामूली सी रेंज में ही ट्रेड करता हुआ दिख रहा है. घरेलू बाज़ार अभी मिडिल ईस्ट की स्थिति पर नजर रखे हुए है और इंतज़ार करने के मूड में है. कोई भी ऐसी खबर जो इस बात की पुष्टि करे कि अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज़ पर बैठकर चर्चा कर रहे हैं, सोने की कीमतों को नई ताकत देगा.
सोने की कीमतों पर किन बातों का असर
अमेरिका ने रोके ईरान पर हमले
अमेरिका पिछले करीब दो हफ्तों से ईरान पर लगातार हमले कर रहा था, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार देर रात बमबारी अभियान रोकने का फैसला किया. ईरान ने भी अमेरिका के सैन्य ठिकानों को पिछले हफ्ते से ही निशाना बनाना बंद कर दिया. बाज़ार इसको अच्छे संकेत के नजरिये से देख रहा है. क्योंकि मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है.
कल से शुरू होगी फेड की बैठक
कच्चे तेल की कीमतें गिरी हैं, तो इस बात की उम्मीद जागी है कि महंगाई भी कम होगी. 28 जुलाई यानी मंगलवार से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक शुरू होगी, 29 जुलाई की फेड चेयरमैन केविन वॉर्श पॉलिसी का ऐलान करेंगे. मार्केट की नज़रें इस बात पर होंगी कि फेड मौजूदा जियो-पॉलिटिकल स्थिति को ब्याज दरों के पैमाने पर कैसे परिभाषित करता है. ऐसा कोई भी संकेत जो ब्याज दरों में भविष्य में ब्याज दरों में नरमी का संकेत देता है तो ये सोने की कीमतों को सपोर्ट करेगा. मगर, हॉकिश रुख सोने पर दबाव बनाएगा.
हालांकि मार्केट जुलाई की पॉलिसी के लिए पूरी तरह आश्वस्त है कि फेडरल रिजर्व रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा. CME FedWatch Tool भी ये दिखा रहा है कि 66% संभावना है कि ब्याज दरें नहीं बदलेंगी. जबकि 33% संभावना इस बात की है दरें बढ़ें. इसलिए, निवेशकों की खास नजर फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के बयान पर रहेगी. बाजार ये समझने की कोशिश करेगा कि फेड भविष्य में ब्याज दरों में कटौती कब शुरू कर सकता है और महंगाई को लेकर फेडरल रिजर्व का ताजा आंकलन क्या है.
लेबर मार्केट, महंगाई के डेटा पर नजरें
इसके अलावा, इस हफ्ते अमेरिका की महंगाई और लेबर मार्केट के डेटा आएंगे. बाजार इन आंकड़ों को गंभीरता से देखेगा. क्योंकि ये आंकड़े आगे फेड की ब्याज दरों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.
गुरुवार, 30 जुलाई को जून के कोर PCE महंगाई का डेटा आएगा जो कि फेड का सबसे पसंदीदा इंफ्लेशन इंडेक्स है. कोर PCE जो खाने-पीने और फ्यूल की कीमतें हटाकर निकाला जाता है, ये महीने-दर-महीने 0.19% और सालाना 3.33% के आसपास रहने का अनुमान है.
30 जुलाई को ही वीकली जॉबलेस क्लेम्स आएंगे. इसके अलावा, 31 जुलाई को Employment Cost Index (ECI) दूसरी तिमाही के डेटा आएंगे. ये अमेरिका में कर्मचारियों की सैलरी और रोजगार लागत में बदलाव बताता है. फेड इसे वेतन आधारित महंगाई का अहम संकेतक मानता है.
कमजोर डॉलर, बॉन्ड यील्ड
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी ने भी सोने की कीमतों का सहारा दिया है. जब डॉलर सस्ता होता है, तो विदेशी खरीदारों के लिए सोना खरीदना पहले से सस्ता पड़ता है. इसलिए डिमांड बढ़ जाती है और सोने के भाव ऊपर जाने लगते हैं. आगे डॉलर की चाल कैसे रहेगी, इस पर बाज़ार की नज़रें रहेंगी.
दूसरा, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट आई है. यील्ड काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि निवेशक आगे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर क्या सोचते हैं. अगर लगे कि महंगाई कम रहेगी, तो हो सकता है कि फेड आगे ब्याज दरें नहीं बढ़ाए या घटा ही दे. जब निवेशकों को रेट ज्यादा नहीं मिलता है तो बॉन्ड यील्ड नीचे आ जाती है. यही वजह है कि 10-साल की यील्ड में इस महीने की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली.
जब बॉन्ड जैसी चीज़ों पर मिलने वाला ब्याज (यील्ड) ज़्यादा होता है तो लोग सोने की बजाय बॉन्ड में पैसा लगाना पसंद करते हैं, क्योंकि वहां “इंटरेस्ट” मिलता है, लेकिन सोने कोई इंटरेस्ट नहीं देता, लेकिन जब यील्ड गिरती है, तो बॉन्ड का ये फायदा कम हो जाता है, तो निवेशक सोने को पोर्टफोलियो में बनाए रखते हैं.
साल 2026 में सोना अबतक कैसा रहा?
सोना 2026 में अब तक एक रोलरकोस्टर की तरह रहा है. जनवरी में $5,600 के करीब का रिकॉर्ड हाई छूने के बाद, ये अब तक करीब 26% नीचे आ चुका है. हालांकि साल की शुरुआत से देखें तो सोना अब भी करीब 6% नीचे ट्रेड कर रहा है, यानी आज की तेजी के बावजूद ये अभी तक साल के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाया है.

