सोना और चांदी की कीमतों में तेज़ी जारी है. घरेलू मार्केट में सोना इस हफ्ते अबतक 4,000 रुपये से ज्यादा मजबूत हो चुका है. बुधवार, 22 जुलाई को सोना वायदा 2,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा तेजी के साथ 1,44,950 रुपये प्रति 10 ग्राम तक चला गया.
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी सोना वायदा दो हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया है. भारतीय समय के मुताबकि शाम 4 बजे तक स्पॉट गोल्ड की कीमत में 1% की तेज़ी आई और ये 4,118 डॉलर प्रति आउंस पर पहुंच गई. जबकि गोल्ड फ्यूचर्स 1.1% चढ़कर 4,123 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था.
क्रूड महंगा, डॉलर मजबूत फिर भी सोना क्यों चढ़ा
गजब विडंबना है! सोने की कीमतों में तेज़ी उस वक्त देखी जा रही है, जब कच्चा तेल उफान पर है और डॉलर भी मजबूत है. इस वक्त ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है, इसमें करीब 3.75% की तेजी है. कच्चे तेल की कीमतें 11 जून के बाद पहली बार 95 डॉलर प्रति बैरल के पार गईं हैं. अमूमन जब क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती हैं तो सोने की कीमतों पर दबाव आता है. क्योंकि महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है, तो सेंट्रल बैंक्स ब्याज दरों को ऊंचा रखते हैं, लेकिन बुधवार को तेल की कीमतें एक बार फिर ऊपर जाने के बावजूद सोने में तेज़ी देखी गई.
तो ऐसा हो क्यों रहा है? सोने की कीमतें दो बातों से चलती है, पहली है ब्याज दर और दूसरी है सेफ हेवन डिमांड. मतलब जब बाज़ार में डर या अनिश्चितता का माहौल हो, तो लोग सोने की तरफ भागते हैं. इस वक्त दोनों फैक्टर्स आपस में टकरा रहे हैं. तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, महंगाई का खतरा बढ़ रहा है, फेड ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है, इसका भी खतरा है और डॉलर भी मजबूत हो रहा है. ये सारी बातें सोने के लिए निगेटिव माहौल बनाते हैं. फिर भी सोना चढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि मार्केट फिलहाल “रेट रिस्क” को नज़रअंदाज़ करके सिर्फ “जियोपॉलिटिकल रिस्क” पर ही चल रहा है. यानी ईरान-अमेरिका का टकराव जो फिर से शुरू हो चुका है, जिसकी वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे शिपिंग रूट्स पर खतरा बढ़ गया है. यही सोने की कीमत तय करने वाला मुख्य फैक्टर बन गई है. मतलब सोना अब वॉर रिस्क प्रीमियम को ज्यादा तवज्जो दे रहा है.
ईरान को लेकर तनाव और गहराया
अमेरिकी सेना ने बुधवार को बताया कि उसने लगातार 11वीं रात ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसमें मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, कमांड-एंड-कंट्रोल फैसिलिटीज़, एयर डिफेंस सिस्टम्स और दूसरे सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया. वॉशिंगटन तेहरान के खिलाफ अपना अभियान और तेज़ कर रहा है, भले ही मध्यस्थ अब भी इस टकराव को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को ईरान पर आरोप लगाया कि वो शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं ले रहा है.
इस पूरे विवाद को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की कोशिशों के बीच इस बात का भी डर है कि ये टकराव अब गल्फ के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है, इसका अंदेशा जताया जा रहा है. बाज़ार की नज़र खासतौर पर उन अहम एनर्जी शिपिंग रूट्स पर टिकी है जहां लड़ाई तेज़ हो रही है, इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ और रेड सी जैसे इलाके शामिल हैं, जो ग्लोबल तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माने जाते हैं.
फेड बैठक पर सबकी निगाहें
निवेशकों का ध्यान अब अगले हफ्ते होने वाली फेडरल रिजर्व की पॉलिसी बैठक पर भी है, जो कि 28-29 जुलाई को होगी. ज्यादातर एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि फेड ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन अगर एनर्जी की कीमतों की वजह से महंगाई का खतरा बना रहा, तो फेड लंबे समय तक ऊंची दरें बनाए रखने का संकेत दोहरा सकता है. FedWatch टूल इस वक्त दिखा रहा है कि 71% से ज्यादा चांस है कि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नही होगा. जबकि सितंबर की बैठक में 66% अनुमान है कि दरों में बढ़ोतरी हो सकती है.

