जून का महीना सोने और चांदी के लिए अबतक बहुत बुरा साबित हुआ है. MCX पर सोना वायदा जून में अबतक करीब 11% टूट चुका है, चांदी का तो इससे भी बुरा हाल है, चांदी वायदा जून में अबतक करीब 17% फिसल चुका है. ऐसा अनुमान है कि आने वाले समय में ये गिरावट और गहरा सकती है.
MCX पर चांदी का अगस्त वायदा बीते तीन ट्रेडिंग सेशन में 4,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से भी ज्यादा टूटा है. सोना वायदा ने 24 जून, 2026 को 2,400 रुपये का गोता लगाया और ये इंट्राडे में 1,44,114 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया, मंगलवार 23 जून को सोना वायदा 1,46,529 रुपये पर बंद हुआ था. 28 जनवरी, 2026 को MCX पर सोना वायदा ने 2,04,375 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई बनाया था. इस ऊंचाई से सोना अब इस ऊंचाई से 29.4% तक टूट चुका है.
MCX पर चांदी जुलाई वायदा में भी 24 जून को 4,000 रुपये से ज्यादा की बड़ी गिरावट देखने को मिली, ये इंट्राडे में 2,21,658 रुपये प्रति किलो तक फिसल गया. 23 जून को चांदी वायदा 2,25,834 रुपये पर बंद हुआ था. चांदी वायदा ने भी इसी साल की शुरुआत में 4,57,328 रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था. इस ऊंचाई से चांदी 51% से ज्यादा टूट चुकी है.
घरेलू मार्केट में सोने और चांदी में ये गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आई बिकवाली का असर है, जहां पर सोने और चांदी टूटे हैं. कॉमेक्स पर सोना वायदा अब 4,100 डॉलर प्रति आउंस के नीचे फिसल गया है. फिलहाल 1.70% की गिरावट के साथ, 4,080 डॉलर प्रति आउंस के इर्द-गिर्द ट्रेड कर रहा है, 23 जून को सोना वायदा 4,149.40 पर बंद हुआ था. वायदा के साथ साथ स्पॉट गोल्ड में भी 1.1% की गिरावट है और ये 4,067 डॉलर प्रति आउंस के करीब है. शुरुआत में इसने 4,050.6 डॉलर प्रति आउंस का निचला स्तर भी छुआ था.
10 साल की सबसे बड़ी गिरावट
बीते 6 ट्रेडिंग सेशन में से 5 सेशन में सोना कमजोर हुआ है. इतना ही नहीं, साप्ताहिक स्तर पर देखें तो लगातार पिछले 3 हफ्तों से सोने की कीमतें नुकसान के साथ ही बंद हो रही हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब सोने की कीमतें दो हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. अब डर इस बात का है कि ये कभी भी 4,000 डॉलर प्रति आउंस का मनोवैज्ञानिक स्तर तोड़ सकता है.
सोने और चांदी की ये गिरावट बहुत डरावनी इसलिए भी है क्योंकि सोना और चांदी पिछली पांच तिमाहियों से लगातार पॉजिटिव रहे थे. मगर, जिस तेज़ी के साथ जून के महीने में गिरावट है, उससे ऐसा लगता है कि अप्रैल-जून तिमाही में सोना और चांदी निगेटिव रिटर्न के साथ बंद हो रहे हैं, क्योंकि जून के बाकी बचे दिनों में सोना जितना टूट चुका है, रिकवर होना मुश्किल है. ऐसे में सोना सोना पिछले एक दशक की अपनी सबसे बड़ी तिमाही गिरावट की ओर बढ़ रहा है, जबकि चांदी पिछले चार सालों में अपने सबसे खराब प्रदर्शन की ओर बढ़ चुकी है.
मगर, इस बेहद गहरी गिरावट से पहले सोने और चांदी के लिए बीते 2 साल बड़े ही शानदार गुजरे थे. जनवरी और मार्च 2026 के दौरान सोना 10% से ज्यादा चढ़ा था. जबकि साल 2025 में सोना 65% तक उछला था, जबकि साल 2024 में इसमें 28% की तेजी देखने को मिली थी. जबकि चांदी जनवरी-मार्च 2026 के दौरान 28% मजबूत हुई थी, साल 2025 में चांदी में 148% और साल 2024 में 22% की तेजी देखने को मिली थी.
सोने-चांदी में क्यों आई गिरावट
अब सोने और चांदी में ये गिरावट आ क्यों रही है. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला शुरू किया था. जिसकी वजह से पूरी दुनिया में अनिश्चतता फैल गई थी. मगर, सोने की कीमतें चढ़ने की बजाय गिरने लगीं, जबकि आमतौर पर ऐसा नहीं होता. इसकी सबसे बड़ी वजह थी कि इस जंग से कच्चे तेल की कीमतों की सप्लाई पर असर पड़ा था. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से क्रूड की सप्लाई बाधित हुई, क्रूड के दाम चढ़ने लगे. कच्चा तेल जब महंगा होता है तो महंगाई बढ़ने का खतरा होता है. इसलिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करने से बचता है. इसलिए ऐसा माहौल बनने लगा कि लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना.
अब जबकि ईरान-अमेरिका बीच जंग खत्म हो गई, बावजूद इसके सोने की कीमतों पर दबाव है. वो इसलिए क्योंकि अमेरिकी डॉलर में जबरदस्त मजबूती है. डॉलर इंडेक्स बुधवार को 101 के ऊपर है, जो कि 13 महीने की ऊंचाई है. मजबूत डॉलर की वजह से विदेशी ट्रेडर्स के लिए गोल्ड खरीदना महंगा पड़ता है, जिससे डिमांड गिर जाती है और सोने की कीमतों पर दबाव दिखता है. साथ ही, ब्याज दरें बढ़ने से भी सोने की कीमतें गिरती हैं, क्योंकि सोना एक नॉन-यील्ड असेट है, यानी कोई ब्याज नहीं देता है. इसलिए निवेशक उस एसेट की तरफ मुड़ जाते हैं जो ज्यादा यील्ड देता है.
अब डॉलर इंडेक्स में मजबूती इस वजह से है कि मार्केट ये मानकर चल रहा है कि फेडरल रिजर्व इस साल के अंत तक या 2027 की शुरुआत में ब्याज दर बढ़ा सकता है. मार्केट्स ये भी मानकर चल रहा है कि 70% संभावना है कि फेडरल रिजर्व सितंबर तक एक बार ब्याज दर बढ़ा सकता है, इसके बाद दिसंबर में भी एक बढ़ोतरी हो सकती है.

