सोने की कीमतें 7 हफ्ते के निचले स्तरों पर चली गई हैं, लेकिन क्या ये सोने की स्टोरी का The End है, या फिर ये एक मौका है, क्योंकि एनालिस्ट इस बात का दावा कर रहे हैं कि भले ही सोने में अभी गिरावट है, मगर इसकी लॉन्ग टर्म स्टोरी अब भी मौजूद है, जो आने वाले 6 महीनों में देखने को मिलेगा.
हमने देखा कि कैसे सोमवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव करीब 4% तक टूटे थे. आज मंगलवार को भी सोना वायदा की शुरुआत एक दायरे में ही दिख रही है. हालांकि बाजार खुलने के थोड़ी देर बाद ही, MCX पर सोने का अक्टूबर वायदा 1,200 रुपये से ज्यादा गिरकर 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे चला गया था. फिलहाल सुबह 11 बजे तक ये हल्की कमजोरी के साथ 1.46 लाख रुपये के ऊपर ट्रेड कर रहा था.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सोने का वायदा मंगलवार को हल्की बढ़त के साथ खुला था, लेकिन इंट्राडे में ये 4,145.40 डॉलर प्रति आउंस तक फिसल गया. फिलहाल ये एकदम फ्लैट 4,167 डॉलर प्रति आउंस के आस-पास ट्रेड कर रहा है.
सितंबर में सोना क्यों टूटा?
एक महीने में सोना करीब 8% तक गिर चुका है, जबकि हफ्ते भर में इसमें करीब 5% की कमजोरी आ चुकी है. सितंबर महीने की शुरुआत में सोना करीब $4,510 प्रति आउंस तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद इसमें लगातार दबाव देखने को मिला और भाव करीब $4,130 प्रति आउंस तक फिसल गए. यानी सितंबर के महीने में सोना 380 डॉलर तक कमजोर हो चुका है.
अब सवाल है कि सोना इतने दबाव में क्यों है, इसके कई कारण हैं. लेकिन जो सबसे जरूरी दो कारण हैं वो इस तरह से है –
ब्याज दरें बढ़ने की आशंका
सितंबर में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की थी. साल 2023 के बाद फेड ने ब्याज दरें बढ़ाईं थीं, वहीं से सेंटीमेंट्स खराब होना शुरू हुए. इसके बाद महंगाई को लेकर फेडरल रिजर्व की चिंताओं से बाजार को ये लगा कि आगे भी ब्याज दरें बढ़ सकती हैं. सितंबर के फेड अनुमानों में भी 2026 के अंत तक ब्याज दरें 4%–4.25% के आसपास रहने का संकेत मिला है. यानी मौजूदा 3.75%–4% से एक और 25 bps हाइक की गुंजाइश दिखती है. कुछ पॉलिसीमेकर्स ने 2026 में दो और रेट हाइ का अनुमान भी लगाया है.
FedWatch टूल में भी इस बात की संभावना 70% दिखाई दे रही है कि अक्टूबर में ब्याज दरें 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ सकती हैं. साथ ही, दिसंबर की पॉलिसी को लेकर बाजार का अनुमान यही है कि दरें बढ़ सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो ये सोने के लिए निगेटिव साबित होगा और कीमतों पर आगे भी दबाव देखने को मिल सकता है.
US बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव
अमेरिका की बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर पहुंच गई है. 10 साल की US-बॉन्ड यील्ड 5.24 के पार निकल गई है, जबकि 30 साल की बॉन्ड यील्ड 5.56 तक पहुंच गई है. इन दोनों ने आज ही नया 52 वीक हाई बनाया है.
ANZ के एनालिस्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी ने सोने में एक बार फिर बिकवाली बढ़ा दी है. ANZ का कहना है कि आने वाले समय में सोने के लिए मैक्रो इकोनॉमिक माहौल चुनौतीपूर्ण रह सकता है. ऊंची ट्रेजरी यील्ड्स और महंगाई का जोखिम दोनों ही सोने पर दबाव बनाए रख सकते हैं.
सोना $5,000 तक जाएगा
हालांकि, दोशी का मानना है कि ये गिरावट सोने की लॉन्ग टर्म स्टोरी को नहीं बदलता है. उनका कहना है कि ब्याज दरें बढ़ने से अमेरिका की बड़ी आर्थिक समस्या, खासकर बढ़ता सरकारी कर्ज, खत्म नहीं होगा. उल्टा, ज्यादा ब्याज दरों से सरकार को अपने कर्ज पर ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा. इसलिए मौजूदा दबाव के बावजूद सोने में आगे तेजी की संभावना बनी हुई है और अगले छह महीनों में इसके $5,000 प्रति आउंस तक पहुंचने की उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
यही वजह हो सकती है कि दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ने के बावजूद सोने की कीमतों में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं आई है. आकाश दोशी के मुताबिक, कोरोना महामारी से पहले अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड करीब 1.5% थी. उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि करीब साढ़े 6 साल बाद ये यील्ड 5.3% के आसपास पहुंच जाएगी और इसके बावजूद सोना करीब $4,000 प्रति आउंस के स्तर पर बना रहेगा. इससे पता चलता है कि सोने की कीमत अब सिर्फ ब्याज दरों से तय नहीं हो रही है. सरकारी कर्ज, महंगाई और दुनिया में बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता भी सोने की डिमांड को सपोर्ट दे रही है.
कहां से आ रही है डिमांड
अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में लंबी अवधि के बॉन्ड पर मिलने वाला अतिरिक्त रिटर्न 2011 के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में पहुंच गया है. इसकी वजह बढ़ता सरकारी कर्ज, महंगाई की चिंता और ज्यादा मात्रा में सरकारी बॉन्ड जारी होना है. इसके बावजूद सोने की फिजिकल और इन्वेस्टमेंट डिमांड बनी हुई है, खासकर चीन से. 2026 के पहले 7 महीनों में चीन ने करीब 1,000 टन गोल्ड इंपोर्ट किया, जो पिछले साल की इसी अवधि से 78% ज्यादा है.
वहीं पश्चिमी देशों के निवेशक भी गोल्ड ETF में पैसा लगा रहे हैं. अगस्त में दुनियाभर के गोल्ड बैक्ड ETFs में करीब $17.1 बिलियन का निवेश आया, जबकि अमेरिकी गोल्ड ETFs में करीब $7.9 बिलियन की इनफ्लो रही. यानी ऊंची कीमत और बॉन्ड यील्ड के बावजूद कई निवेशक गोल्ड को महंगाई, कमजोर होती करेंसीज और आर्थिक अनिश्चितता से बचाव के लिए पोर्टफोलियो में बनाए हुए हैं.

