ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स को झटका! सरकार ने एक्सपोर्ट पर मिलने वाली राहत घटाई; क्या होगा असर?

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Govt Cuts Duty Drawback on Gold and Silver Jewellery Exports What It Means for Exporters

सोने और चांदी की ज्वेलरी के एक्सपोर्टर्स को झटका लगा है. सरकार ने सोने और चांदी के गहनों के एक्सपोर्ट पर मिलने वाला ड्यूटी ड्रॉबैक घटा दिया है. सोने के गहनों पर ये दर करीब 3.1% और चांदी की दो कैटेगरी के लिए इस करीब 9% घटाया गया है. इसका सीधा मतलब है कि ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स की लागत अब थोड़ी बढ़ जाएगी.

ड्यूटी ड्रॉबैक क्या होता है?

खबर को आगे समझने से से पहले जान लीजिए कि ड्यूटी ड्रॉबैक क्या होता है. मान लीजिए कोई कारोबारी ज्वेलरी बनाने के लिए विदेश से कच्चा माल मंगाता है और उस पर कस्टम ड्यूटी चुकाता है. फिर वो उस माल से तैयार सामान बनाकर दूसरे देश को बेच देता है. चूँकि ये सामान भारत में बिका ही नहीं, इसलिए सरकार चुकाई गई ड्यूटी का पूरा या कुछ हिस्सा एक्सपोर्टर्स को वापस लौटा देती है. इसी रिफंड को ड्यूटी ड्रॉबैक कहते हैं. इसका मकसद ये है कि देश के एक्सपोर्टर्स पर टैक्स का बोझ न रहे, उनकी लागत का कुछ हिस्सा उन्हें लौटा दिया जाए जिससे वो विदेशी बाज़ार में दूसरे देशों के कारोबारियों से बराबरी के साथ मुकाबला कर सके.

किन दरों में हुआ बदलाव?

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इसी ड्यूटी ड्रॉबैक या रिफंड को कम कर दिया है.

  • सोने के गहनों पर मिलने वाला ड्यूटी ड्रॉबैक ₹1,851.99 प्रति ग्राम से घटाकर ₹1,794.11 प्रति ग्राम कर दिया है
  • चांदी की ज्वेलरी पर मिलने वाला ड्यूटी ड्रॉबैक ₹29,501.09 प्रति किलो से घटाकर ₹26,859.02 प्रति किलो किया
  • चांदी के दूसरे आइटम्स पर ड्यूटी ड्रॉबैक ₹29,501.09 प्रति किलो से घटाकर ₹26,859.02 प्रति किलो किया

जुलाई में दोगुना किया था ड्यूटी ड्रॉबैक

इसके पहले सरकार ने सोने और चांदी के गहनों के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें लगभग दोगुनी कर दी थीं. इसका मकसद बढ़ती इनपुट लागत और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक्सपोर्टर्स की मदद करना था, ताकि वो कंपटीशन में डटे रहें. सोने के गहनों और उनके पुर्जों पर ड्रॉबैक ₹773.17 प्रति ग्राम से बढ़ाकर ₹1,851.99 प्रति ग्राम किया गया था. चांदी के गहनों और चांदी से बने सामान पर इसे ₹14,990.66 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹29,501.09 प्रति किलो किया गया था.

इसका क्या असर होगा?

ड्यूटी ड्रॉबैक का सबसे सीधा असर सोने-चांदी के गहनों का एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों पर पड़ सकता है. रिफंड कम होने से उनकी लागत की भरपाई के लिए मिलने वाली रकम घट सकती है. अगर कंपनियां इस कमी की भरपाई दूसरे तरीकों से नहीं कर पाती हैं, तो उनके मुनाफे पर दबाव आ सकता है. मुंबई, सूरत, जयपुर और कोलकाता जैसे जेम्स-ज्वेलरी हब के कारोबारी इससे प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि जुलाई में रिफंड को दोगुना किया गया था, उसके मुकाबले 15 अक्टूबर को जो कटौती की गई है, वो बहुत मामूली है. तो इसका असर बहुत ज्यादा पड़ेगा, ऐसा नहीं लगता. आम खरीदारों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि ड्रॉबैक सिर्फ एक्सपोर्ट पर मिलता है. सोने-चांदी के घरेलू भाव या गहनों की कीमत पर इसका असर नहीं होगा.

क्यों घटाया ड्यूटी ड्रॉबैक?

अब सवाल ये उठता है कि सरकार ने अचानक से ही ड्यूटी ड्रॉबैक क्यों कम किया. नोटिफिकेशन में इसकी कोई वजह नहीं बताई गई है. इसलिए यह दावा करना सही नहीं होगा कि सरकार ने यह कदम सोने-चांदी की कीमतें नियंत्रित करने, एक्सपोर्ट बढ़ाने या रेवेन्यू बढ़ाने के लिए ही उठाया है.

ये दर इस आधार पर तय होती है कि एक्सपोर्ट होने वाले सामान में कितना इंपोर्टेड माल लगता है और उस पर कितनी ड्यूटी लगी. सोने-चांदी की कीमतें या इंपोर्ट ड्यूटी बदलने पर दरें भी नए सिरे से तय की जाती हैं. अगर तय दर असल में चुकाई गई ड्यूटी से ज़्यादा बैठ रही हो, तो एक्सपोर्टर को ज़रूरत से ज़्यादा रिफंड मिलता है. उसे सुधारने के लिए दर घटाई जाती है.

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