CIBIL रिपोर्ट में डिफॉल्ट है? ऐसे ठीक करें ताकि लोन मिले आसानी से, स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

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How to Fix a CIBIL Default A Complete Guide to Correcting Your Credit Report

होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन (Home Loan, Car Loan, Personal Loan) लेने से पहले आपको अपना CIBIL रिपोर्ट जरूर चेक कर लेना चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि आपके CIBIL रिपोर्ट में कोई ‘डिफॉल्ट’ हो या फिर ‘Settled’ कैटेगरी में हो और आपको पता तक न हो. ऐसे में आपको लोन मिलने में दिक्कत आ सकती है, ज्यादातर रेगुलर बैंक्स आपको लोन देने से इनकार कर सकते हैं.

मगर, इसका ये कतई मतलब नहीं कि आपकी क्रेडिट हिस्ट्री हमेशा के लिए कटघरे में खड़ी हो गई और आप उसे सही नहीं कर सकते हैं. आप अपना CIBIL रिपोर्ट भी सुधार सकते हैं और आपको लोन भी मिल सकता है, लेकिन ये किसी शॉर्टकट तरीके से नहीं होगा बल्कि सही कदम उठाने से होगा.

सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि हर मामले में डिफॉल्ट को रिपोर्ट से पूरी तरह नहीं हटाया जा सकता है. अगर बैंक ने सही जानकारी दर्ज की है, तो सिर्फ शिकायत करने या किसी एजेंसी को पैसे देने से वो मिट नहीं जाएगी. इसके लिए कर्ज की स्थिति और रिपोर्ट में दर्ज जानकारी के हिसाब से कदम उठाने होंगे.

CIBIL रिपोर्ट में डिफॉल्ट का मतलब क्या है?

मान लीजिए कि आपने लोन की EMI या क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर नहीं चुकाया, तो बैंक इसकी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को भेज सकता है. अगर आपने लगातार 90 दिनों तक भुगतान नहीं किया है तो मामला गंभीर हो जाता है और लोन अकाउंट को बैंक के नियमों के मुताबिक यानी Non-Performing Asset (NPA) या फिर ‘Defaulted Account’ की कैटेगरी में डाल दिया जाता है.

CIBIL क्या होता है?

CIBIL यानी TransUnion CIBIL एक क्रेडिट ब्यूरो है, जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिली जानकारी के आधार पर लोगों की क्रेडिट हिस्ट्री तैयार करता है. ये खुद तय नहीं करता कि किस व्यक्ति को लोन देना है या नहीं. लोन मंजूर करने का फैसला बैंक या वित्तीय संस्थान अपनी नीतियों और लोन अप्लाई करने वाले की वित्तीय स्थिति के आधार पर करता है. https://www.cibil.com/faq/loan-rejections-disputes

सबसे पहले आपको अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करना चाहिए. आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में अलग-अलग तरह की निगेटिव एंट्री हो सकती हैं. आपको पहले समझना होगा कि आपकी एंट्री किस कैटेगरी में हुई है .

Overdue: भुगतान की तारीख निकल चुकी है, लेकिन रकम बकाया है

Default: कर्ज की शर्तों के मुताबिक भुगतान नहीं हुआ है

Written-off: बैंक ने कर्ज की पूरी या कुछ रकम को अपने रिकॉर्ड में घाटे के रूप में दर्ज किया, इसका मतलब कर्ज माफ होना नहीं है

Settled: बैंक और ग्राहक के बीच तय शर्तों के तहत बकाया से कम रकम देकर खाते का निपटारा हुआ है

Suit filed: बैंक ने कर्ज की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई की जानकारी दर्ज कराई है

अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में इसमें से कोई भी एक एंट्री दिखाई देती है, तो आपको तुरंत एक्शन लेना होगा, क्योंकि जितनी देरी आप करेंगे, मामला उतना बिगड़ता जाएगा. एक बात और ध्यान रहे कि इन सभी स्थितियों का हल एक जैसा नहीं है. इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले अपनी पूरी क्रेडिट रिपोर्ट देखना जरूरी है.

क्रेडिट रिपोर्ट में गलती है, या बकाया है?

सबसे पहले पता करें कि रिपोर्ट में गलती है या कर्ज वास्तव में बकाया है. मान लीजिए, आपने दो साल पहले अपना पर्सनल लोन पूरा चुका दिया था। इसके बावजूद CIBIL रिपोर्ट में वो अब भी एक्टिव दिखा रहा है तो ऐसी स्थिति में संभव है कि बैंक ने क्रेडिट ब्यूरो को सही जानकारी न भेजी हो या रिपोर्ट अपडेट होने में देरी हुई हो.

इसी तरह, किसी दूसरे व्यक्ति का लोन आपकी रिपोर्ट में दर्ज हो सकता है. गलत बकाया रकम, भुगतान की गलत तारीख या बंद हो चुके खाते का सक्रिय दिखना भी जांच का विषय है. ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए, ध्यान से समझिए- स्टेप बाय स्टेप

1- CIBIL की ऑफिशियल वेबसाइट से अपनी पूरी क्रेडिट रिपोर्ट निकालें. आपको साल में एक बार मुफ्त फुल क्रेडिट रिपोर्ट पाने का अधिकार है.

2- रिपोर्ट में संबंधित लोन या क्रेडिट कार्ड का खाता, बकाया रकम, भुगतान का रिकॉर्ड और खाते की स्थिति देखें.

3- बैंक स्टेटमेंट, EMI की रसीदें, लोन क्लोजर लेटर और नो-ड्यूज सर्टिफिकेट जैसे डॉक्यूमेंट्स जुटाएं

4- अगर जानकारी गलत है, तो उस बैंक और CIBIL के पास शिकायत दर्ज करें.

5- ध्यान रखें कि CIBIL अपने स्तर पर जानकारी को नहीं बदल सकता है. आपके अकाउंट में गलती तभी सुधारी जा सकती है जब बैंक इस बात की पुष्टि करता है. LINK – CIBIL PORTAL

डिफॉल्ट को ठीक करने के लिए क्या करें?

अब आते हैं मुद्दे की बात पर कि अगर रिपोर्ट में दर्ज डिफॉल्ट सही है, उसे कैसे ठीक किया जाए. इसके कुछ तरीके होते हैं. जिसे आपको अपनना होता है. क्योंकि केवल विवाद दर्ज कराने से वो नहीं हटेगा. इसलिए सबसे पहला काम ये करें कि आप उस बैंक या NBFC से बात करें और भुगतान का ऑफर करें. इसके लिए आपके पास मुख्य रूप से दो विकल्प होते हैं

पहला विकल्प: पूरा बकाया चुकाना

अगर हो सके तो आप पूरी बकाया रकम चुका दें, ये सबसे बढ़िया विकल्प है. पेमेंट करने बाद रसीद, NOC) या लोन क्लोजर लेटर जरूर लें. बैंक से ये बात एकदम साफ-साफ पूछें कि पूरी पेमेंट करने के बाद अकाउंट का स्टेटस क्रेडिट ब्यूरो को कबतक अपडेट किया जाएगा. अगर बैंक काफी समय तक ऐसा नहीं करता है तो आप CIBIL की वेबसाइट पर जाकर डिस्प्यूट को दर्ज करवा सकते हैं. ध्यान रहे कि पूरा पेमेंट करने पर खाते को Closed दिखाया जा सकता है, लेकिन इससे पुरानी Payment Default का इतिहास तुरंत मिटने की गारंटी नहीं होती.

दूसरा विकल्प: बैंक से सेटलमेंट पर बातचीत

अगर आपके इतने पैसे नहीं है कि पूरा बकाया एक साथ निपटा सकें तो आप बैंक से वन-टाइम सेटलमेंट यानी OTS के विकल्प के बारे में पूछ सकते हैं. इसमें बैंक अपनी सहमति से कम रकम लेकर बकाया खाते का निपटारा कर सकता है.

मगर, फुल पेमेंट और वन टाइम सेटलमेंट एक बड़ा अंतर है. OTS में अकाउंट ‘Settled’ कैटेगरी में दर्ज हो जाता है न कि ‘Closed’ कैटेगरी में. इससे भविष्य में बैंक इसे निगेटिव मानकर लोन देने से इनकार कर सकता है. इसलिए सेटलमेंट करने से पहले उसकी शर्तें लिखित में लें. ये भी स्पष्ट कराएं कि भुगतान के बाद क्रेडिट रिपोर्ट में अकाउंट स्टेटस को किस कैटेगरी में डाला जाएगा.

CIBIL रिपोर्ट में सुधार कब तक दिखेगा?

यहां तक करने के बाद अब अगला सवाल ये है कि CIBIL रिपोर्ट में कब तक दिखाई देगा. कोई भी बैंक आपको ये नहीं कह सकता है कि आपको पक्के तौर पर ये महीने भर में या दो महीने में दिखने लगेगा. क्योंकि ये इस बात पर निर्भर करता है कि मामला गलत जानकारी का है, बकाया रकम का है या सेटलमेंट का है.

अगर बैंक को भुगतान मिल चुका है लेकिन रिपोर्ट अपडेट नहीं हुई, तो बैंक से जानकारी सुधारने के लिए कहें. अगर एंट्री गलती है, तो क्रेडिट ब्यूरो के विवाद निपटान सिस्टम का इस्तेमाल करें, इसमें थोड़ा वक्त लगता है.

हालांकि रिजर्व बैंक का नियम कहता है कि क्रेडिट रिपोर्ट में जानकारी सुधारने की शिकायत का निपटारा आमतौर पर 30 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए. इसमें संबंधित वित्तीय संस्थान को जानकारी सुधारकर भेजने के लिए 21 दिन तक और क्रेडिट ब्यूरो को प्रक्रिया पूरी करने के लिए बाकी समय मिलता है. तय समय से अधिक देरी होने पर निर्धारित शर्तों के तहत प्रतिदिन 100 रुपये के मुआवजे का प्रावधान भी है.

अब इसका मतलब ये भी नहीं है कि हर डिफॉल्ट 30 दिन में हट जाएगा. ये समय शिकायत के निपटारे के लिए है, सही निगेटिव जानकारी को मिटाने की गारंटी नहीं है.

डिफॉल्ट के बाद भी लोन मिल सकता है?

अगर लोन डिफॉल्ट किया है तो लोन मिलने में हमेशा मुश्किल आएगी, लेकिन ऐसा नहीं है कि लोन मिलेगा ही नहीं. बैंक केवल CIBIL स्कोर ही नहीं, बल्कि आय, नौकरी या कारोबार की स्थिरता, मौजूदा कर्ज, भुगतान का रिकॉर्ड और लोन की रकम भी देखते हैं.

अगर रिपोर्ट में हाल का Default या बकाया दिखाई दे रहा है, तो नया लोन मिलने में मुश्किल हो सकती है. फिर भी हर बैंक की नीति अलग होती है और किसी एक स्कोर के आधार पर सभी आवेदनों का फैसला नहीं होता है.

आप अपनी स्थिति के मुताबिक इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं-

सिक्योर्ड लोन: सोना या संपत्ति गिरवी रखकर लिया जाने वाला लोन कुछ मामलों में विकल्प हो सकता है, क्योंकि इस स्थिति में बैंक के पास कौलैटरल होता है.

NBFC और फिनटेक: कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां अलग लोन दे देती हैं, लेकिन उनकी शर्तें अलग होती है. इसलिए अप्लाई करने से पहले ब्याज दर, चार्ज और भुगतान की शर्तें ध्यान से समझ लें. आजकल तो तमाम फिनटेक कंपनियां हैं जो छोटे-छोटे लोन दे देती है. लेकिन उनकी ब्याज दरें काफी ऊंची होती है.

सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड: अगर आप पात्र हैं और बैंक जमा राशि के बदले कार्ड देता है, तो उसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल भविष्य की भुगतान हिस्ट्री बनाने में मदद कर सकता है

को-एप्लिकेंट: किसी ऐसे व्यक्ति के साथ आवेदन करना, जिसकी आय और क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी है, कुछ लोन में मदद कर सकता है. हालांकि, इससे को-अप्लिकेंट की भी वित्तीय जिम्मेदारी बन सकती है.

कम स्कोर होने पर तुरंत कई बैंकों में आवेदन करने के बजाय पहले अपनी रिपोर्ट की समस्याएं समझना और उन्हें ठीक करना बेहतर है.

CIBIL स्कोर सुधारने के लिए इन गलतियों से बचें

रिपोर्ट में डिफॉल्ट आने के बाद जल्दबाजी में उठाए गए कदम समस्या बढ़ा सकते हैं. इन बातों का ध्यान रखें:

1- NOC और पेमेंट का प्रूफ संभालकर रखें. सिर्फ रकम चुका देना काफी नहीं है. बैंक से लिखित पुष्टि लेना जरूरी है.

2- ‘Settled’ को ‘Closed’ न समझें. दोनों की रिपोर्टिंग अलग है और भविष्य में लोन के फैसले पर इनका असर अलग हो सकता है.

3- बार-बार लोन के लिए आवेदन न करें. कम समय में कई आवेदन करने से क्रेडिट रिपोर्ट में कई हार्ड इन्क्वायरी दर्ज हो सकती हैं. इससे बैंकों पर आपकी निगेटिव इमेज बनती है.
4- CIBIL रिपोर्ट की पूरी जांच करें, केवल एक डिफॉल्ट ठीक कराने से काम पूरा नहीं होगा, अगर दूसरे अकाउंट्स में भी बकाया या गलत जानकारी दर्ज है.

5- रेगुलर पेमेंट करें, EMI और क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर चुकाएं. क्रेडिट कार्ड की सीमा का बहुत अधिक इस्तेमाल करने से बचें और अपनी आय के हिसाब से ही नया कर्ज लें.

क्रेडिट रिपोर्ट में गलती ठीक न हो तो कहां शिकायत करें?

पहले बैंक या NBFC के शिकायत निवारण विभाग और CIBIL के आधिकारिक विवाद पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें. खाता संख्या, गलत प्रविष्टि, भुगतान के प्रमाण और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराएं. शिकायत का रेफरेंस नंबर सुरक्षित रखें.

अगर मामला तय समय में हल नहीं होता या शिकायत का समाधान संतोषजनक नहीं है, तो RBI के शिकायत निवारण तंत्र का सहारा लिया जा सकता है. शिकायत दर्ज करने के लिए RBI का आधिकारिक पोर्टल है: https://cms.rbi.org.in

किसी ऐसी एजेंसी से सावधान रहें जो पैसे लेकर सही डिफॉल्ट को हटाने या निश्चित समय में CIBIL स्कोर 750 या उससे ऊपर पहुंचाने की गारंटी देती है. कोई भी तीसरा पक्ष वैध क्रेडिट रिकॉर्ड को मनमाने ढंग से मिटा नहीं सकता.

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