अगर आप शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से परेशान हैं और अपने पोर्टफोलियो में ऐसा निवेश जोड़ना चाहते हैं जो नियमित ब्याज दे सकता है, जिसमें शेयर मार्केट के मुकाबले रिस्क भी कम होता है. तो बॉन्ड्स आपके लिए विकल्प सकते हैं. इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि आप बॉन्ड्स में कैसे निवेश कर सकते हैं, कितनी रकम से निवेश की शुरुआत कर सकते हैं, इसमें क्या जोखिम है और किन लोगों को बॉन्ड्स में निवेश करना चाहिए.
बॉन्ड में निवेश क्या होता है?
तो सबसे पहले ये समझ लीजिए कि बॉन्ड में निवेश होता क्या है? जब आप किसी बॉन्ड में निवेश करते हैं, तो असल में आप सरकार, कंपनी या किसी दूसरे जारीकर्ता (Issuer) को पैसा उधार लोन के रूप में देते हैं. बदले में आपको तय शर्तों के मुताबिक ब्याज मिलता है, जिसे कूपन (Coupon) कहा जाता है. जिस रेट पर ब्याज मिलता है उसे कूपन रेट कहा जाता है. बॉन्ड की मैच्योरिटी पूरी होने पर आपको अपना पूरा पैसा वापस मिलता है.
मान लीजिए किसी कंपनी को 100 करोड़ रुपये की जरूरत है. वो बैंक से पूरा कर्ज लेने के बजाय निवेशकों से पैसा जुटाने के लिए बॉन्ड्स जारी करती है. क्योंकि ये उसके लिए ज्यादा किफायती पड़ता है. जब कंपनी ने बॉन्ड जारी किया तो आपने उस कंपनी का 1 लाख रुपये का बॉन्ड खरीद लिया. कंपनी आपको 5 साल के लिए आपको बॉन्ड इश्यू करती है. इस पूरी अवधि के दौरान कंपनी आपको सालाना 8% की दर से ब्याज ऑफर करती है, इसको कूपन रेट कहते है. मतलब आपको हर साल 8000 रुपये का ब्याज मिलेगा.
5 साल बाद जब बॉन्ड की मैच्योरिटी पूरी होगी, तो कंपनी आपको पूरे 1 लाख रुपये वापस कर देगी. आपको इससे क्या मिला, 5 साल तक हर साल 8000 रुपये का ब्याज यानी पूरे 40,000 रुपये.
बॉन्ड्स कितने तरह के होते हैं?
अगर आप बॉन्ड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको इसके रिटर्न के साथ साथ इससे जुड़े जोखिमों को भी जानना चाहिए. भारत में निवेशकों के लिए बॉन्ड मोटे तौर पर दो तरह के होते हैं. जब कंपनी कोई बॉन्ड जारी करती है तो उसे कॉरपोरेट बॉन्ड कहते हैं, जब सरकार बॉन्ड जारी करती है, उसे गवर्नमेंट सिक्योरिटीज या सरकारी बॉन्ड कहते हैं.
- गवर्नमेंट बॉन्ड्स
ये केंद्र सरकार या राज्य सरकारों की ओर से जारी किया जाता है. इनमें ट्रेजरी बिल्स यानी T-Bills, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और स्टेट डेवलपेंट लोन यानी SDLs शामिल हैं. गवर्नमेंट सिक्योरिटीज को आमतौर कॉरपोरेट बॉन्ड के मुकाबले कम जोखिम वाला माना जाता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इनके मार्केट प्राइस कभी गिरते नहीं हैं.
- कॉरपोरेट बॉन्ड्स
कंपनियां भी पैसा जुटाने के लिए बॉन्ड्स या NCDs (Non-Convertible Debentures) जारी करती हैं. सरकारी बॉन्ड्स के मुकाबले ये ज्यादा जोखिम भरे होते हैं. हालांकि इन पर ज्यादा ब्याज या कूपन मिलता है. इसलिए हमेशा क्रेडिट रेटिंग को देखकर कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश जोखिम भरा हो सकता है.
बॉन्ड्स में निवेश कैसे करें?
अगर आप गवर्नमेंट बॉन्ड्स खरीदना चाहते हैं तो सबसे सही तरीका है कि आप रिजर्व बैंक के प्लेटफॉर्म RBI Retail Direct पर जाएं और वहां से खरीदें. इसके लिए आपको Retail Direct Gilt यानी RDG अकाउंट खोलना होता है. RBI के मुताबिक इसके लिए PAN, भारत में बचत खाता और वैध KYC डॉक्यूमेंट्स, ईमेल और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर होना चाहिए. रिटेल डायरेक्टर के जरिए निवेशक भारत सरकार के के T-Bills, सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) और स्टेट डेवलपमेंट लोन जैसी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकते हैं.
दूसरा तरीका किसी ब्रोकर या प्लेटफॉर्म के जरिए बॉन्ड्स खरीदना है. यहां आपको उपलब्ध बॉन्ड्स को देखकर उनकी मैच्योरिटी, कूपन, यील्ड, रेटिंग, जारीकर्ता और लिक्विडिटी जैसी चीजों को ध्यान से देखना चाहिए. उसकी जांच परख करनी चाहिए, तभी निवेश करना चाहिए.
NSE, BSE से बॉन्ड कैसे खरीदें
कॉरपोरेट बॉन्ड के लिए:
अगर कोई बॉन्ड एक्सचेंज पर लिस्ट है और उसकी ट्रेडिंग होती है तो आप उसे अपने डीमैट + ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए खरीद सकते हैं, बिल्कुल शेयरों की तरह. NSE के डेट सेगमेंट में पब्लिकली इश्यूड बॉन्ड्स के लिए रिटेल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है. यानी अगर आपके ब्रोकर के प्लेटफॉर्म पर कोई लिस्टेड कॉरपोरेट बॉन्ड दिखाई दे रहा है, तो आप उसे खरीदने के लिए ऑर्डर डाल सकते हैं.
गवर्नमेंट बॉन्ड के लिए: अगर आप NSE से गवर्नमेंट बॉन्ड खरीदना चाहते हैं तो NSE का goBID प्लेटफॉर्म रिटेल निवेशकों को गवर्नेंट सिक्योरिटीज खरीदने की सुविधा देता है. यहां से T-Bills, भारत सरकार के बॉन्ड्स, और कुछ गवर्नमेंट सिक्योरिटीज खरीदी जा सकती हैं.
कितने पैसों से शुरू कर सकते हैं बॉन्ड में निवेश
निवेश की शुरुआत कितने पैसों से हो सकती है, ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन से विकल्प चुन रहे हैं. न्यूनतम निवेश राशि बॉन्ड के प्रकार, उसके इश्यू और जिस प्लेटफॉर्म से आप उसे खरीद रहे हैं, उस पर निर्भर करती है. यानी हर बॉन्ड में ₹10,000 या ₹1 लाख की ही जरूरत होगी, ऐसा नहीं है.
अगर आप बिल्कुल नए निवेशक हैं और पहली बार बॉन्ड में पैसा लगाने जा रहे हैं, तो ₹10,000 से ₹25,000 जैसी छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश करते समय आप उनकी मैच्योरिटी, कूपन और यील्ड को समझ सकते हैं और ये देख सकते हैं कि ब्याज का भुगतान कैसे होता है और मैच्योरिटी पर प्रिंसिपल कैसे वापस मिलता है. वहीं कॉरपोरेट बॉन्ड्स में जाने पर आपको ये भी समझना होगा कि ज्यादा इंटरेस्ट रेट के साथ जारीकर्ता का क्रेडिट रिस्क भी बढ़ सकता है.
बॉन्ड में निवेश करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
बॉन्ड में निवेश करने से पहले सिर्फ क्रेडिट रेटिंग (Credit Rating) देखकर फैसला न करें. क्रेडिट रेटिंग किसी कंपनी की कर्ज चुकाने की क्षमता के बारे में एक रेटिंग एजेंसी की राय होती है, ये किसी तरह की गारंटी नहीं है. साथ ही, कंपनी की रेटिंग, समय के साथ बदल भी सकती है.
इसलिए ये समझना जरूरी है कि कंपनी भविष्य में अपने कर्ज और ब्याज का भुगतान करने की स्थिति में है या नहीं. इसके लिए कंपनी के पिछले बॉन्ड इश्यू, उसकी प्रॉफिटिबिलिटी, कर्ज का स्तर, सॉल्वेंसी रेश्यो और दूसरे क्रेडिट मेट्रिक्स को भी देखना चाहिए.
इसके अलावा, निवेश करने से पहले यह भी तय करें कि आप बॉन्ड को कितने समय तक अपने पास रखना चाहते हैं. अगर आप मैच्योरिटी तक बॉन्ड रखने की योजना बना रहे हैं, तो उसके मैच्योरिटी पीरियड और जारीकर्ता की रीपेमेंट क्षमता को समझना जरूरी है. वहीं अगर आपको मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड बेचने की जरूरत पड़ सकती है, तो लिक्विडिटी, मार्केट प्राइस रिस्क को भी देखना होगा.
बॉन्ड पर ब्याज दर, बाजार की परिस्थितियों और जारीकर्ता के क्रेडिट के हिसाब से ऊपर-नीचे हो सकती है. ध्यान रहे कि किसी भी निवेश में रिटर्न की गारंटी नहीं होती. इसलिए बॉन्ड खरीदने से पहले उसके कूपन, YTM, मैच्योरिटी, क्रेडिट रेटिंग और जारीकर्ता की वित्तीय सेहत की जांच पहले करें.

