करीब तीन साल मैराथान चर्चा और लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकर भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज यानी 15 जुलाई, 2026 से लागू हो गया है. इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को CETA यानी Comprehensive Economic and Trade Agreement कहते हैं.
इस डील पर पिछले साल जुलाई 2025 में लंदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की मौजूदगी में मुहर लगी थी. करीब 14 राउंड की बातचीत के बाद ये डील तैयार की गई. अब सरकार ने इसे लागू करने के लिए एक कस्टम नोटिफिकेशन जारी किया है. इस डील को लेकर सरकार बहुत उत्साहित रही है, अब चूंकि ये डील लागू हो गई है तो ये समझना होगा कि ये डील क्या है और देश के लिए इसके मायने क्या हैं?
भारत को इस डील से क्या मिलेगा?
UK के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारत और यूनाइटेड किंगडम दोनों के लिए फायदेमंद है. इस समझौते से भारतीय एक्सपोर्टर्स को ब्रिटेन में लगभग 99% टैरिफ लाइनों पर ज़ीरो ड्यूटी एक्सेस मिल जाएगा, जबकि भारत ब्रिटिश सामान पर 90% टैरिफ लाइनों में कटौती या पूरी छूट देगा. किन-किन सामानों पर कितनी ड्यूटी घटेगी. देश के लोगों के लिए इस डील के क्या मायने हैं, इसको समझते हैं.
भारत सरकार इस डील को ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ कह रही है. वो इसलिए क्योंकि एक तरफ भारतीय एक्सपोर्टर्स को ब्रिटेन के बाजार में आसान और करीब 99% उत्पादों को ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा. इसका सबसे ज्यादा फायदा टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, लेदर, फुटवियर, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्युटिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स और समुद्री उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान सेक्टरों को मिलने की उम्मीद है. ऐसे प्रोडक्ट्स की संख्या 15,000 से भी ज्यादा है. तो दूसरी तरफ भारत भी ब्रिटेन के 90% सामानों पर ड्यूटी में कटौती करेगा या पूरी छूट देगा.

स्कॉच व्हिस्की और जिन सस्ती होगी
सबसे बड़ा फायदा लिकर इंडस्ट्री और इसके उपभोक्ताओं को होने वाला है. भारत के लोग अब ब्रिटिश व्हिस्की का मज़ा सस्ते में ले पाएंगे. ब्रिटिश व्हिस्की पर इंपोर्ट ड्यूटी 150% से घटकर तुरंत 75% हो जाएगी, और अगले 10 सालों में यह धीरे-धीरे 40% तक आ जाएगी. जिन यानी जिन ड्रिंक पर भी लगभग इसी तरह की छूट मिलेगी.
मगर, ड्यूटी कम होने का मतलब ये नहीं है कि शराब की बोतलों के दाम रातों रात कम हो जाएंगे. राज्यों के अपने टैक्स, ट्रांसपोर्ट खर्च और कंपनियों की प्राइसिंग पॉलिसी के बाद ही कीमत तय होगी. फिर भी आने वाले समय में प्रीमियम स्कॉच ब्रांड्स के दाम धीरे-धीरे नीचे आने की उम्मीद है.
गैज़ेट नोटिफिकेशन के मुताबिक, अगर किसी ड्रिंक की कीमत एक लीटर के लिए 5 डॉलर या 750 ml बोतल के लिए 6 डॉलर से ज़्यादा है, तभी उसे ये कम रेट मिलेगा. यानी सस्ती शराब की बजाय प्रीमियम कैटेगरी की ड्रिंक्स को ज़्यादा फायदा होगा.

लग्ज़री गाड़ियां होंगी सस्ती
अगर आप रोल्स-रॉयस, एस्टन मार्टिन, मैकलैरेन, जैगुआर और लैंड रोवर जैसे प्रीमियम ब्रिटिश ब्रांड्स की कारें खरीदना चाहते हैं तो आपके लिए अच्छी बात ये है कि इन कारों के दाम बहुत ज्यादा कम हो जाएंगे. Fully Built यानी पूरी तरह तैयार होकर आने वाली गाड़ियों पर अभी तक 110% तक ड्यूटी लगती थी, जो अब 10 साल में धीरे-धीरे घटकर 10% रह जाएगी, लेकिन ये छूट एक तय कोटा सिस्टम के तहत ही मिलेगी.
मतलब ये कि हर साल एक तय संख्या तक ही गाड़ियां इस कम ड्यूटी पर आ सकेंगी. जैसे कि इस साल सरकार ने तय किया कि 20,000 गाड़ियों को ही कम ड्यूटी का फायदा मिलेगा, तो सिर्फ इतनी ही गाड़ियों के दाम कम होंगे. उसके बाद ज़्यादा ड्यूटी लगेगी. गैजेट नोटिफिकेशन के मुताबिक – 1500cc से लेकर 3000cc तक की 5000 गाड़ियों को कम ड्यूटी पर इंपोर्ट किया जाएगा. इन पर ड्यूटी 66% से घटाकर 50% कर दी गई है. ये फाइनल ड्यूटी नहीं है, बल्कि आगे इसमें और कटौती होगी. इसका सीधा फायदा रोल्स-रॉयस, एस्टन मार्टिन, मैकलारेन, जैगुआर और लैंड रोवर जैसे प्रीमियम ब्रिटिश ब्रांड्स को मिलेगा.
रोज़मर्रा के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स
सिर्फ शराब और गाड़ियां ही नहीं, बल्कि चॉकलेट, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, कॉस्मेटिक्स और दूसरे तमाम ब्रिटिश प्रोडक्ट्स भी सस्ते होंगे, क्योंकि इन पर भारी ड्यूटी कटौती की गई है.गैजेट नोटिफिकेशन की लिस्ट के मुताबिक – मांस, मछली, फल-सब्ज़ियां, टेक्सटाइल, मशीनरी, फर्नीचर और खिलौने जैसी तमाम चीजें हैं, जिन पर ड्यूटी कम की गई है. कुछ प्रोडक्ट्स पर तो ड्यूटी जीरो है, लेकिन कुछ पर थोड़ी छूट दी गई है.

