टेक इंडस्ट्री के लिए साल 2026 अभी तक बहुत भारी पड़ा है. इस साल जितनी भी नौकरियां गईं हैं, आधी से ज्यादा की वजह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग रही हैं. जॉब-सर्च प्लेटफॉर्म SkillSyncer के ले-ऑफ ट्रैकर के मुताबिक अकेले मार्च में 82,000 से ज्यादा लोगों ने अपनी नौकरियां गवाईं हैं, जिसमें अकेले 30,000 नौकरियां तो Oracle ने खत्म की हैं.
Oracle समेत इस साल अभी तक 322 कंपनियों ने लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया है. जिनकी संख्या 2,05,832 है. मतलब औसतन हर दिन करीब 1,019 लोगों ने अपनी नौकरियों से हाथ धोया है. इसके मुकाबले 2025 में कुल 338 कंपनियों ने 2,05,773 लोगों को निकाला था. मतलब, औसतन 564 नौकरियां रोज़ जा रही थीं. डेटा से पता चलता है कि 2025 में पूरे साल जितने लोग नौकरी से निकाले गए थे, 2026 में करीब-करीब उतने ही लोगों को सिर्फ 7 महीने में ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. कहने का मतलब ये कि 2026 में भले ही कम कंपनियों ने छंटनियां कीं, लेकिन उनका साइज पहले से काफी बड़ा हो गया है.
AI बनी सबसे बड़ी वजह
इस साल की सबसे बड़ी छंटनी ओरेकल ने की, 31 मार्च 2026 को कंपनी ने एक झटके में 30,000 कर्मचारियों को हटा दिया, जो 2026 का अब तक का सबसे बड़ा अकेला ले-ऑफ है. डेटा के मुताबिक, 54% यानी 322 में से 173 कंपनियों ने साफ तौर पर AI या ऑटोमेशन को वजह बताया है, जिससे कुल 1,70,945 कर्मचारियों पर असर पड़ा. इनमें ओरेकल, मेटा, डेल, अमेज़न, नोकिया, Crypto.com और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं.
किस सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार
SkillSyncer के डेटा के मुताबिक – इस साल सॉफ्टवेयर और टेक सेक्टर में सबसे ज्यादा 56,804 जॉब्स गईं, फिर IT सर्विसेज और IT कंसल्टिंग सेक्टर में 31,933, फाइनेंस-फिनटेक में 24,517, टेलीकॉम में 16,643 और कंप्यूटर हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग में 16,047 जॉब्स खत्म हुईं. जिन कंपनियों ने छंटनियां की उसमें दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां शुमार हैं.
| कंपनी | छंटनी |
| Oracle | 30,754 |
| Amazon | 19,600 |
| Meta | 16,900 |
| Dell | 16,000 |
हर महीने कितनी छंटनियां
SkillSyncer ट्रैकर के मुताबिक- साल के शुरुआती महीनों में बड़े पैमाने पर छंटनियां हुईं. जिसमें मार्च का महीना सबसे खराब साबित हुआ. जिसमें 82,370 लोगों की छंटनी हुई, इसके बाद जनवरी में 29,358, मई में 29,303, फरवरी में 22,338, अप्रैल में 20,516, जून में 12,994 और जुलाई में अब तक 8,953 लोगों की छंटनियां हो चुकी हैं.
नई हायरिंग में 80% की गिरावट
दुनिया की तकरीबन हर दिग्गज कंपनी छंटनी कर रही हैं, उनका बहुत बड़ा बैक-ऑफिस और इंजीनियरिंग वर्कफोर्स भारत में ही है. भारत का IT सेक्टर करीब 60 लाख लोगों को रोज़गार देता है और ज्यादातर इन ग्लोबल दिग्गजों मेटा, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट के लिए लो-वैल्यू सॉफ्टवेयर वर्क करता है. मतलब ये कंपनियां जब छंटनी का ऐलान करती हैं तो उसमें भारत भी शामिल होता है.
AI का असर इतना ज्यादा है कि बात अब सिर्फ छंटनी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि हायरिंग पर आ गई है. भारत के IT सेक्टर से फ्रेशर्स की भर्ती के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे 2026 में ग्रेजुएट होने वाले हर इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के छात्र की चिंता बढ़ाने के लिए काफी हैं.
टैलेंट एनालिटिक्स फर्म Xpheno की रिपोर्ट के मुताबिक कोविड के बाद FY22 में टेक इंडस्ट्री में जबरदस्त बूम आया. भारतीय IT सेक्टर ने रिकॉर्ड 6 लाख फ्रेशर्स को नौकरियां दी थीं. मगर, इसके तीन साल बाद, AI के आने के बाद भारतीय IT कंपनियों ने हायरिंग की रफ्तार कम की है. FY25 तक ये आंकड़ा घटकर करीब 1.2 लाख पर आ गया यानी सिर्फ तीन सालों में भर्ती में 80% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. FY26 के आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन जिस हिसाब से कंपनियां छंटनी कर रही हैं, ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए. मोटा-मोटा हिसाब लगाया जाए तो 2022 में फ्रेशर्स के लिए मौजूद हर 5 में से 4 IT जॉब्स अब पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं.
FY21-FY25: हायरिंग का ट्रेंड
| साल | हायरिंग |
|---|---|
| FY21 | 1.8-2 लाख |
| FY22 | 6 लाख |
| FY23 | 2.5-2.8 लाख |
| FY24 | 60-70 हज़ार |
| FY25 | 1.2 लाख |
Source: Xpheno, Various
IT कंपनियों में फ्रेशर्स हायरिंग
देश की चार टॉप IT कंपनियों TCS, इंफोसिस, विप्रो और टेक महिंद्रा ने अपनी हायरिंग को कैसे कम किया है. ये समझिए
TCS
TCS की कैंपस हायरिंग पिछले 2 साल से करीब 40 हजार साल पर अटकी हुई है. इसके अलावा 2025 में TCS ने 12,000 मौजूदा कर्मचारियों को भी निकाल दिया, क्योंकि कंपनी खुद को “AI-first” सर्विस कंपनी में बदल रही है. कंपनी “बेंच स्ट्रेंथ” भी घटा रही है, मतलब पहले एक क्लाइंट प्रोजेक्ट पर जितने लोग तैनात होते थे, अब उतने नहीं किए जा रहे, काम AI को ट्रांसफर किया जा रहा है.
Infosys
इंफोसिस ने FY26 में हायरिंग के लिए 20,000 का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 18,000 पहले ही जॉइन करवा चुकी है. लेकिन यहां भी एक शर्त है, कंपनी अब जनरल इंजीनियरिंग डिग्री वालों की बजाय उन कैंडिडेट्स को प्राथमिकता दे रही है जिनके पास पहले से AI और क्लाउड की स्किल्स हैं
Wipro
विप्रो ने अपना फ्रेशर हायरिंग टारगेट 10,000 से घटाकर 7,500-8,000 कर दिया है, और अब तक सिर्फ 5,000 फ्रेशर्स ही जॉइन करवाए हैं. करीब 200 सेलेक्टेड कैंडिडेट्स ने पब्लिकली शिकायत की है कि उनकी जॉइनिंग डेट 7 महीने से ज़्यादा टाल दी गई. कंपनी इसका कोई साफ जवाब नहीं दे रही है. मतलब ऑफर लेटर मिला, लेकिन नौकरी शुरू नहीं हो पा रही.
Tech Mahindra
टेक महिंद्रा ने कहा है कि FY26 में वो कम फ्रेशर्स हायर करेगी, क्योंकि जो पुराने प्रोजेक्ट्स खत्म हो चुके हैं, उनमें लगे मौजूदा कर्मचारियों को ही नई जगह लगा दिया गया है. यहां भी करीब 1,000 कैंडिडेट्स को जॉइनिंग लेटर का इंतज़ार है.
कुल मिलाकर ये कि ये पूरे इंडस्ट्री की एक बड़ी चिंता बन चुकी है. जिसकी वजह से हज़ारों फ्रेश ग्रैजुएट्स का करियर दांव पर लग गया है. जो कंपनियां हायर भी कर रही हैं, वे अब जनरल इंजीनियरिंग डिग्री की बजाय स्पेसिफिक AI/क्लाउड स्किल्स को प्राथमिकता दे रही हैं.
एक नौकरी, कई आवेदन
फ्रेशर्स की हायरिंग का ये ट्रेंड बता रहा है कि IT सेक्टर में नौकरियां तेजी से कम हुई हैं, जो नौकरियां बची हैं, उसके लिए मुकाबला काफी तेज हो गया है. LinkedIn के डेटा के मुताबिक, 2022 की शुरुआत की तुलना में अब भारत में हर एक नौकरी की वैकेंसी पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है, और ये बहुत चिंता की बात है, क्योंकि भारत जिसे दुनिया का सबसे युवा देश माना जा रहा है, हर साल 12 से 15 लाख इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्स पास आउट होते हैं. ये बच्चे कहां जाएंगे? अगर IT जैसा बड़ा सेक्टर ही नए ग्रेजुएट्स को नौकरियां देना बंद कर देगा, तो हमारी युवा आबादी की ताकत बेरोजगारी के बोझ में बदल सकती है.
