अमेरिका और ईराने के बीच तनाव बढ़ने का असर भारतीय बाजारों पर आज बुधवार 2 सितंबर, 2026 को साफ-साफ दिखा है. निफ्टी एक बार फिर से 23,800 के नीचे फिसल गया, सेंसेक्स भी 76,200 के नीचे चला गया. सेंसेक्स आज खुलते ही 750 अंक टूट गया, इस तेज़ गिरावट की वजह से BSE की लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप से 5 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए.
ब्रॉडर मार्केट में भी सुस्ती
ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स में भी आज भारी गिरावट देखने को मिल रही है. NIFTY Midcap100 में 1% से ज्यादा की कमजोरी है, जबकि NIFTY Smallcap100 भी 0.5% की सुस्ती दिखा रहा है. हालांकि इन दोनों इंडेक्स में ही सुबह के बाद हल्की सी रिकवरी देखने को मिली है. निफ्टी50 के 40 शेयरों में गिरावट है, जबकि 10 शेयरों में बढ़त दिख रही है. शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला पैमाना India VIX सुबह बाजार खुलने के कुछ मिनट बाद ही 3% से ज्यादा उछलकर 11.86 तक पहुंच गया.
सभी सेक्टरोल इंडेक्स पिटे
निफ्टी के सभी सेक्टोरल इंडेक्स फिलहाल गिरावट के साथ ट्रेड करते हुए दिख रहे हैं. निफ्टी ऑटो में 3% से ज्यादा की गिरावट है, निफ्टी रियल्टी भी करीब 2% कमजोर है. निफ्टी IT में 1.5% की गिरावट है. इनके अलावा, निफ्टी FMCG, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और बाकी दूसरे सेक्टर्स भी 1% तक टूट गए. अगर, देखा जाए तो ओवरऑल मार्केट की ब्रेड्थ निगेटिव है, क्योंकि निफ्टी के 2200 से ज्यादा स्टॉक्स निगेटिव ट्रेड कर रहे हैं, जबकि केवल 1200 के करीब ही पॉजिटिव हैं. 78 स्टॉक्स में आज लोअर सर्किट लगा है.
करीब 106 शेयर हैं जो 52 हफ्ते के निचले स्तर पर चले गए हैं, इसमें वोल्टास, हिंदुस्तान यूनीलीवर, डाबर, IRFC, KEC International, ICICI Lombard शामिल हैं.
बाजार में क्यों आ रही है गिरावट
शेयर बाज़ार में ये गिरावट क्यों आई, इसकी कोई एक वजह नहीं है, बल्कि कई कारणों ने बाजार पर एक साथ दबाव बनाया है, मगर इनमें से सबसे जरूरी 4 कारण हैं
1- ईरान-अमेरिका तनाव और गहराया
रात भर अमेरिका और ईरान के बीच फिर से हमलों का सिलसिला चला, जिससे मिडिल ईस्ट में चल रहे इस टकराव के जल्द थमने की उम्मीदें और कमजोर पड़ गई हैं. अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं. जिसके जवाब में तेहरान ने भी कार्रवाई की है. 60 दिनों की चुप्पी के बाद शुरू हुआ ये टकराव पहले के मुकाबले ज्यादा गंभीर दिख रहा है.
इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने कहा कि अमेरिकी हमलों की वजह से अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आवाजाही और सीमित हो जाएगी. साथ ही यह भी दावा किया गया कि जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया है, जिसमें कई अमेरिकी सैनिक मारे गए. वहीं ईरानी सरकारी मीडिया ने बहरीन में एक अमेरिकी बेस पर बड़े ड्रोन हमले की भी खबर दी है.
2- क्रूड पहुंचा $96 प्रति बैरल के पार
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का सीधा असर तेल की कीमतों पर दिखा, रातों-रात कीमतों में तेज उछाल आया. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 96 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 91 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था. एक्सपर्ट्स अब ये कह रहे हैं कि इस लड़ाई का अब कोई हल नजर नहीं आ रहा है, इसलिए क्रूड में रिस्क प्रीमियम लंबे समय तक बना रह सकता है.
4- बॉन्ड यील्ड्स में तेज उछाल
दुनियाभर में बॉन्ड यील्ड्स लगातार बढ़ रही हैं, जिससे उधार लेने की लागत कई दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी नोट्स की यील्ड करीब तीन साल के उच्चतम स्तर 4.81% पर पहुंच गई है, जो कि अक्टूबर 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. अगर ये 5% के करीब जाती है तो पहले से ही डांवाडोल शेयर बाजारों के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी.
4- कमजोर होता रुपया
घरेलू करेंसी मार्केट में रुपया शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 2 पैसे कमजोर होकर 94.97 पर खुला. तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में उछाल ने रुपये पर दबाव बनाया है. जिससे RBI के दखल से रुपये को मिली मजबूती की रफ्तार थमती दिख रही है.

