वैसे तो 60 साल की उम्र को रिटायरमेंट का एक पैमाना माना जाता है, लेकिन अब सोच बदल रही है. आज की युवा पीढ़ी सिर्फ नौकरी करते रहने के बजाय अपने लिए भी वक्त निकालना चाहती है. कोई 40 साल की उम्र में रिटायर होकर अपना कारोबार शुरू करना चाहता है, तो कोई 50 साल में काम का बोझ कम करके अपनी जिंदगी का लुत्फ उठाना चाहता है.
लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आपके पास इतनी बचत हो कि नौकरी या नियमित कमाई बंद होने के बाद भी खर्चों के लिए किसी पर निर्भर न रहना पड़. इसलिए कम उम्र से ही रिटायरमेंट की योजना बनाना और सही जगह निवेश करना जरूरी है.
अब सवाल है कि इसके लिए NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करें या रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड्स में? क्योंकि निवेश करना ही काफी नहीं है, यह जानना भी जरूरी है कि जरूरत पड़ने पर अपना पैसा कितनी आसानी से निकाल पाएंगे. तो अगर आपको 60 साल से पहले, खासकर 40 साल की उम्र में पैसों की जरूरत है, तो इन दोनों विकल्पों में क्या अंतर है? आइए समझते हैं.
NPS के नियम क्या कहते हैं?
मान लीजिए, आपने 25 साल की उम्र में रिटायरमेंट के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश शुरू किया था. अब 40 साल की उम्र में आप नौकरी छोड़कर अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं या कुछ समय के लिए काम से ब्रेक लेना चाहते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि NPS में जमा कितनी रकम आप निकाल सकते हैं. क्या आप पूरा पैसा एक साथ निकाल सकते हैं, या फिर कुछ हिस्सा पेंशन के लिए रखना जरूरी होगा. समय से पहले निकासी के नियम क्या हैं. तो चलिए पहले इसी को समझ लेते हैं.
इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आपने NPS में कितने साल निवेश किया है, आपका कुल जमा पैसा कितना है और आप किस तरह से निकासी करना चाहते हैं.
देखिए, NPS में पैसा निकालने के नियम समझने के लिए दो बातें जानना बहुत जरूरी हैं.
- 60 साल की उम्र: NPS में सामान्य निकासी की सीमा 60 साल रही है, हालांकि मौजूदा नियमों में निवेशकों को इससे पहले भी निकासी के विकल्प मिल सकते हैं.
- 15 साल का निवेश: गैर-सरकारी All Citizen Model में तय शर्तें पूरी होने पर 15 साल की मेंबरशिप के बाद, 60 साल से पहले भी निकासी का विकल्प मिलता है
- 15 साल से पहले खाता बंद करना: इसे समय से पहले निकासी (Early Exit) माना जाता है, जिस पर अलग नियम लागू होते हैं. 15 साल पूरे होने का मतलब ये नहीं कि हर स्थिति में पूरी रकम बिना शर्त निकाली जा सकती है.
15 साल से पहले खाता बंद करने पर क्या होगा?
अगर आप गैर-सरकारी NPS के All Citizen Model में निवेश कर रहे हैं और 40 साल की उम्र में खाता बंद करना चाहते हैं, तो सबसे पहले ये देखना होगा कि निवेश के 15 साल पूरे हुए हैं या नहीं. अगर 15 साल पूरे नहीं हुए हैं तो ये एक Early Exit है. ऐसे मामलों में आम तौर पर कुल जमा रकम का अधिकतम 20% एकमुश्त निकालने और बाकी 80% से पेंशन के लिए एन्युटी खरीदने का नियम लागू होता है. हालांकि कॉर्पस 5 लाख रुपये या इससे कम हो, तो पूरी रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है.
15 साल पूरे होने पर क्या बदल जाएगा?
अब आपने NPS में पूरे 15 साल तक निवेश को जारी रखा. तब निकासी के विकल्प बदल जाते हैं. अगर आपका कुल जमा कॉर्पस 8 लाख रुपये तक है, तो आप पूरी रकम निकाल सकते हैं. मगर कॉर्पस 8 लाख रुपये से 12 लाख के बीच है, तो आप 6 लाख तक एकमुश्त रकम निकालने के हकदार हो जाते हैं. बाकी रकम को आप धीरे धीरे कम से कम 6 साल में निकाल सकते हैं. वहीं, 12 लाख रुपये से ज्यादा के कॉर्पस में 80% तक रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है, बाकी 20% से एन्युटी खरीदनी होती है.
रकम निकालने की शर्तें
अगर आप NPS खाता बंद नहीं करना चाहते, बल्कि किसी खास जरूरत के लिए कुछ रकम निकालना चाहते हैं, तो आंशिक निकासी के विकल्प मौजूद है. इसके तहत खाता खुलने के तीन साल बाद अपने योगदान का अधिकतम 25% निकाला जा सकता है. याद रहे कि ये कुल कॉर्पस का 25% नहीं है.
ये सुविधा बच्चों के हायर एजुकेशन, उनकी शादी, घर खरीदने या बनाने, कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज और कारोबार शुरू करने जैसी पहले से तय जरूरतों के लिए मिलती है. ये सुविधा भी 60 साल से कम उम्र में केवल चार बार मिलती है. साथ ही दो निकासियों के बीच कम से कम 4 साल का अंतर होना जरूरी है. मतलब अगर आपने साल 2026 में बच्चों की हायर एजुकेशने के लिए पैसे निकाले हैं, तो अगली निकासी का नंबर 4 साल बाद 2030 में आएगा.
इसलिए 40 साल की उम्र में NPS से पैसा निकालने का फैसला करने से पहले यह समझना जरूरी है कि खाता बंद करना और जरूरत के लिए कुछ रकम निकालना अलग-अलग विकल्प हैं. साथ ही, 15 साल पूरे होने से अपने आप पूरी रकम निकालने का अधिकार नहीं मिल जाता. सही विकल्प आपके खाते की कैटेगरी और उस पर लागू निकासी नियमों पर निर्भर करेगा.
रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड
अब बात करते हैं रिटायरमेंट फोकस्ड म्यूचुअल फंड्स की. समझते हैं कि इसमें 40 साल की उम्र में पैसा निकालने के नियम क्या हैं? साथ ही ये भी समझते हैं कि ये NPS से कैसे अलग है और क्या ये बेहतर विकल्प है.
आमतौर पर रिटायरमेंट-फोकस्ड म्यूचुअल फंड स्कीम्स में 5 साल का लॉक-इन होता है या रिटायरमेंट की तय उम्र तक, जो पहले हो. इस दौरान निवेशक अपनी यूनिट नहीं बेच सकता. मान लीजिए, आपने किसी रिटायरमेंट फंड में 20 लाख रुपये जमा किए हैं. अगर उस योजना का लॉक-इन पूरा हो चुका है, तो आप उसकी शर्तों के मुताबिक पूरी रकम या उसका कुछ हिस्सा निकाल सकते हैं. इसके लिए NPS की तरह रकम का एक तय हिस्सा एन्युटी में लगाना जरूरी नहीं है. आप चाहें तो पैसा निकाल सकते हैं या निवेश जारी रख सकते हैं. लेकिन लॉक-इन पूरा होने का मतलब ये नहीं कि हर स्कीम में निकासी पूरी तरह मुफ्त होगी. कुछ फंड्स में तय अवधि से पहले निकासी पर एग्जिट लोड भी लग सकता है. साथ ही, हर निवेश का लॉक-इन अलग अलग होता है. इसलिए पूरा फंड एक साथ लॉक-इन से फ्री नहीं होता.
NPS के मुकाबले क्या सुविधा मिलती है?
म्यूचुअल फंड का सबसे बड़ा फायदा ये है कि निवेशक को पेंशन के लिए एन्युटी खरीदने की कोई मजबूरी नहीं होती है. वह अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा निकाल सकता है और चाहे तो सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) के जरिए हर महीने रकम लेने की व्यवस्था कर सकता है. हालांकि, SWP से मिलने वाली रकम या निवेश पर रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती.
दूसरी ओर, NPS में निकासी और एन्युटी के नियम लागू होते हैं. इसलिए जिस व्यक्ति को 40 साल की उम्र में अपने निवेश पर ज्यादा कंट्रोल चाहिए, उसके लिए सामान्य ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है. मगर, ये पूरी तरह से उस व्यक्ति की जरूरतों और जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है.
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है, इसे निवेश की सलाह न माना जाए। NPS और म्यूचुअल फंड में निवेश से जुड़े जोखिम, निकासी के नियम, लॉक-इन अवधि और टैक्स संबंधी प्रावधान अलग-अलग हो सकते हैं। निवेश करने या पैसा निकालने से पहले संबंधित योजना के मौजूदा नियमों को ध्यान से पढ़ें और जरूरत पड़ने पर किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें.

