नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO को जबरदस्त डिमांड मिली है. 21 सितंबर को बंद हुआ ये इश्यू 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ है. इस इश्यू को 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की डिमांड मिली है, जबकि ये इश्यू 22,561.57 करोड़ रुपये का है. भारत के टॉप 5 IPOs को अगर कुल सब्सक्रिप्शन के हिसाब से देखें, तो NSE का 5.71x सब्सक्रिप्शन सबसे ज्यादा है. मतलब ये कि NSE ने बड़े IPOs के बीच सब्सक्रिप्शन का एक नया रिकॉर्ड बनाया है
सब्सक्रिप्शन में नंबर-1 NSE IPO
Hyundai Motor India IPO ने अक्टूबर 2024 में ₹27,858.75 करोड़ जुटाए थे और ये IPO 1.93 गुना सब्सक्राइब हुआ था. LIC IPO ने मई 2022 में 20,557.23 करोड़ रुपये जुटाए थे और इसे 2.05 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था. Paytm (One 97 Communications) ने नवंबर 2021 में 18,300 करोड़ रुपये का IPO लाया था, जो 1.48 गुना सब्सक्राइब हुआ था. Tata Capital ने अक्टूबर 2025 में ₹15,511.87 करोड़ जुटाए और इसका IPO 1.65 गुना सब्सक्राइब हुआ था. इन सभी के मुकाबले NSE का 22,561.57 करोड़ रुपये का IPO 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ, यानी इन बड़े IPOs के मुकाबले NSE को काफी ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला.
| IPO | Issue Size | Subscription |
|---|---|---|
| Hyundai Motor India | ₹27,858.75 करोड़ | 1.93x |
| NSE | ₹22,561.57 करोड़ | 5.71x |
| LIC | ₹20,557.23 करोड़ | 2.05x |
| Paytm | ₹18,300 करोड़ | 1.48x |
| Tata Capital | ₹15,511.87 करोड़ | 1.65x |
बड़े निवेशकों ने जमकर लिया हिस्सा
NSE के IPO को मिली इस जबरदस्त सब्सक्रिप्शन डिमांड के पीछे सबसे बड़ा हाथ क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) का रहा, जिनका हिस्सा 12.68 गुना सब्सक्राइब हुआ. NIIs का हिस्सा भी अपने आखिरी दिन 6.55 गुना सब्सक्राइब हुआ और रिटेल निवेशकों का हिस्सा भी अपने आखिरी दिन पूरा भर गया और 1.39 गुना सब्सक्राइब हुआ.
| Investor category | Subscription |
| QIB | 12.68x |
| NII | 6.55x |
| Retail | 1.39x |
| Overall | 5.71x |
₹90,000 करोड़ की डिमांड कैसे आई?
निवेशकों ने करीब 50.58 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई. इन शेयरों की IPO प्राइस पर कुल बोली की वैल्यू करीब 90,000 करोड़ रुपये बैठती है. यानी NSE ने 22,561.57 करोड़ रुपये के शेयर बेचने की पेशकश की थी, लेकिन निवेशकों ने करीब 90,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीदने में रुचि दिखाई.
NSE IPO का GMP ठंडा पड़ा
हालांकि ग्रे मार्केट में NSE के IPO को लेकर उत्साह पहले के मुकाबले ठंडा पड़ता दिख रहा है. NSE के IPO का प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये प्रति शेयर है. इनवेस्टर गेन के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक 22 सितंबर, दोपहर 12:30 बजे NSE IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 67 रुपये प्रति शेयर चल रहा है. यानी अपर प्राइस बैंड पर लिस्टिंग 1852 रुपये हो सकती है. इस हिसाब से 3.75% का प्रीमियम देखने को मिल सकता है. अगर 18 सेशन के डेटा पर नजर डालें तो ग्रे मार्केट प्रीमियम 310 रुपये से लेकर 48 रुपये प्रति शेयर के बीच रहा है. हालांकि GMP फिक्स नहीं होता है, लिस्टिंग से पहले ये ऊपर या नीचे भी जा सकता है और ये कोई आधिकारिक डेटा नहीं होता है.
क्या NSE के IPO में पैसा लगाना चाहिए?
Geojit Financial | Subscribe
ब्रोकरेज फर्म Geojit Financial के मुताबिक, 1,785 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर NSE की वैल्यूएशन FY26 के एडजस्टेड EPS के आधार पर पोस्ट-इश्यू करीब 42 गुना P/E पर बैठती है, जो उसकी कंपटीटर BSE से कम है. ब्रोकरेज का कहना है कि इक्विटी और डेरिवेटिव्स बाजार में NSE का दबदबा है, जिसे मजबूत नेटवर्क इफेक्ट, निवेशकों के बड़े इकोसिस्टम और स्केलेबल टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर से सपोर्ट मिलता है. एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल की वजह से कंपनी का मार्जिन लगातार ऊंचा रहता है और कैश जनरेशन भी मजबूत है. कैपिटल मार्केट में बढ़ती भागीदारी और फाइनेंशियलाइजेशन से आगे भी ग्रोथ की काफी गुंजाइश है. इन्हीं वजहों से Geojit ने मध्यम से लंबी अवधि के निवेशकों के लिए NSE IPO को “सब्सक्राइब” रेटिंग दी है.
Choice Broking | Subscribe
Choice Broking के मुताबिक NSE का IPO पिछले 12 महीनों (TTM) की कमाई के 47.3 गुना पर प्राइस किया गया है. वहीं इसकी एकमात्र लिस्टेड कंपटीटर BSE 48.9 गुना पर ट्रेड कर रही है, जबकि उसका कारोबार NSE के एक तिहाई से भी छोटा है. BSE के मुनाफे को उन्हीं ऑप्शन वॉल्यूम से सहारा मिला है, जो NSE ने गंवाए हैं. ब्रोकरेज का कहना है कि निवेशक दोनों में से बड़ी और मजबूत कंपनी के लिए पूरी कीमत दे रहे हैं, उस पर कोई प्रीमियम नहीं दे रहे. इस कीमत पर उन्हें ऐसा मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर मिल रहा है, जिसका कोई असली विकल्प नहीं है.
Swastika Investmart | Subscribe
Swastika के अनुसार NSE FY26 के डाइल्यूटेड EPS के करीब 40.9-42.9 गुना पर ट्रेड कर रही है, जबकि BSE का मल्टीपल 54.28 गुना है. NSE के बड़े स्केल को देखते हुए री-रेटिंग की गुंजाइश बनती है. ब्रोकरेज ने आगाह किया कि कंपनी का करीब 79% रेवेन्यू ट्रेडिंग वॉल्यूम से जुड़ा है, इसलिए कमाई बाजार की एक्टिविटी और रेगुलेटरी बदलावों पर निर्भर करती है. NSE की लीडरशिप और वैल्यूएशन एडवांटेज को देखते हुए लंबी अवधि के निवेश और मामूली लिस्टिंग गेन, दोनों के लिए IPO में पैसा लगाया जा सकता है.
Ventura | Subscribe
Ventura का कहना है कि NSE की लीडरशिप पोजीशन, मजबूत ब्रांड, टेक्नोलॉजी क्षमता और बढ़ते कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम की वजह से वो भारतीय वित्तीय बाजारों में लंबी अवधि के ग्रोथ मौके का फायदा उठाने की अच्छी स्थिति में है. ब्रोकरेज के मुताबिक IPO से मिलने वाली रकम कंपनी की ग्रोथ पहलों को सपोर्ट करेगी. हालांकि सरकारी निर्भरता और एग्जीक्यूशन का रिस्क बना रहेगा. इन्हीं वजहों से Ventura ने “सब्सक्राइब” रेटिंग दी है.

