NSE के IPO में पैसा लगाने का आज यानी 21 सितंबर आखिरी दिन है. अपने आखिरी दिन तक ये IPO सुबह 11 बजे तक 1.53 सब्सक्राइब हो चुका है. 22,569 करोड़ रुपये के इस IPO के 12,89,85,128 करोड़ शेयरों के लिए बोलिया मिली हैं, जबकि ऑफर में 8,86,42,911 करोड़ शेयर रखे गए हैं. गैर-संस्थागत निवेशकों का हिस्सा सबसे ज्यादा 2.42 गुना भरा है. QIBs का हिस्सा 1.97 गुना सब्सक्राइब हुआ है, लेकिन रिटेल निवेशकों का हिस्सा अब भी पूरा सब्सक्राइब नहीं हुआ है. ये अभी तक 89% ही भर पाया है.
NSE IPO का GMP गिरा
ग्रे मार्केट को देखें तो ऐसा लग रहा है कि निवेशकों का इस IPO को लेकर उत्साह ठंडा पड़ता जा रहा है. ग्रे मार्केट में इसके प्रीमियम (GMP) में लगातार गिरावट देखने को मिली है. इन्वेस्टरगेन के डेटा के मुताबिक 21 सितंबर की सुबह 11 बजे इसका GMP 56 रुपये प्रति शेयर पर था. इस हिसाब से इसकी लिस्टिंग ₹1841 रुपये पर होती दिख रही है. जबकि इश्यू का प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये प्रति शेयर है.
हालांकि ये कोई ऑफिशियल डेटा नहीं है, लेकिन ज्यादातर यही डेटा लिस्टिंग गेन के आस-पास होता है. NSE के IPO में हमने GMP में काफी उतार चढ़ाव देखा है. बीते 18 सेशन में IPO GMP ₹285 रुपये से गिरकर ₹56 रुपये पर आ चुका है यानी 229 रुपये की गिरावट आई है. ये बताता है कि ग्रे मार्केट में ये इश्यू अपनी पकड़ छोड़ रहा है. हालांकि ऐसा भी हो सकता है कि लिस्टिंग के पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम में फिर से तेज़ी आ जाए, क्योंकि कई बार ट्रेंड काफी तेज़ी से पलटता है.
क्या NSE के IPO में पैसा लगाना चाहिए?
Geojit Financial | Subscribe
ब्रोकरेज फर्म Geojit Financial के मुताबिक, 1,785 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर NSE की वैल्यूएशन FY26 के एडजस्टेड EPS के आधार पर पोस्ट-इश्यू करीब 42 गुना P/E पर बैठती है, जो उसकी कंपटीटर BSE से कम है. ब्रोकरेज का कहना है कि इक्विटी और डेरिवेटिव्स बाजार में NSE का दबदबा है, जिसे मजबूत नेटवर्क इफेक्ट, निवेशकों के बड़े इकोसिस्टम और स्केलेबल टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर से सपोर्ट मिलता है. एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल की वजह से कंपनी का मार्जिन लगातार ऊंचा रहता है और कैश जनरेशन भी मजबूत है. कैपिटल मार्केट में बढ़ती भागीदारी और फाइनेंशियलाइजेशन से आगे भी ग्रोथ की काफी गुंजाइश है. इन्हीं वजहों से Geojit ने मध्यम से लंबी अवधि के निवेशकों के लिए NSE IPO को “सब्सक्राइब” रेटिंग दी है.
Choice Broking | Subscribe
Choice Broking के मुताबिक NSE का IPO पिछले 12 महीनों (TTM) की कमाई के 47.3 गुना पर प्राइस किया गया है. वहीं इसकी एकमात्र लिस्टेड कंपटीटर BSE 48.9 गुना पर ट्रेड कर रही है, जबकि उसका कारोबार NSE के एक तिहाई से भी छोटा है. BSE के मुनाफे को उन्हीं ऑप्शन वॉल्यूम से सहारा मिला है, जो NSE ने गंवाए हैं. ब्रोकरेज का कहना है कि निवेशक दोनों में से बड़ी और मजबूत कंपनी के लिए पूरी कीमत दे रहे हैं, उस पर कोई प्रीमियम नहीं दे रहे. इस कीमत पर उन्हें ऐसा मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर मिल रहा है, जिसका कोई असली विकल्प नहीं है.
Swastika Investmart | Subscribe
Swastika के अनुसार NSE FY26 के डाइल्यूटेड EPS के करीब 40.9-42.9 गुना पर ट्रेड कर रही है, जबकि BSE का मल्टीपल 54.28 गुना है. NSE के बड़े स्केल को देखते हुए री-रेटिंग की गुंजाइश बनती है. ब्रोकरेज ने आगाह किया कि कंपनी का करीब 79% रेवेन्यू ट्रेडिंग वॉल्यूम से जुड़ा है, इसलिए कमाई बाजार की एक्टिविटी और रेगुलेटरी बदलावों पर निर्भर करती है. NSE की लीडरशिप और वैल्यूएशन एडवांटेज को देखते हुए लंबी अवधि के निवेश और मामूली लिस्टिंग गेन, दोनों के लिए IPO में पैसा लगाया जा सकता है.
Ventura | Subscribe
Ventura का कहना है कि NSE की लीडरशिप पोजीशन, मजबूत ब्रांड, टेक्नोलॉजी क्षमता और बढ़ते कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम की वजह से वो भारतीय वित्तीय बाजारों में लंबी अवधि के ग्रोथ मौके का फायदा उठाने की अच्छी स्थिति में है. ब्रोकरेज के मुताबिक IPO से मिलने वाली रकम कंपनी की ग्रोथ पहलों को सपोर्ट करेगी. हालांकि सरकारी निर्भरता और एग्जीक्यूशन का रिस्क बना रहेगा. इन्हीं वजहों से Ventura ने “सब्सक्राइब” रेटिंग दी है.

