ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) की मुश्किलों में एक और इज़ाफा हो गया है. कंपनी को पार्ट्स सप्लाई करने वाले दो सप्लायर्स ने कंपनी के खिलाफ NCLT का दरवाज़ा खटखटाया है और इनसॉल्वेंसी यानी दिवालिया घोषित करने की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है, क्योंकि सप्लायर्स का आरोप है कि ओला ने 40 करोड़ रुपये बकाया नहीं चुकाया है.
इन दो सप्लायर्स ने NCLT में घसीटा
मीडिया रिपोर्ट्स में छपी खबरों के मुताबिक NCLT में ओला इलेक्ट्रिक के जिन दो सप्लायर्स ने याचिकाएं दी हैं, उनमें से एक कंपनी का नाम है स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी सॉल्यूशंस (Sterling E-Mobility Solutions), जो कि स्टर्लिंग टूल्स की इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी है. कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री में दी गई फाइलिंग्स के मुताबिक, कंपनी का ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज पर 29.8 करोड़ रुपये बकाया हैं.
जबकि दूसरी कंपनी का नाम है एनेवॉल्व मैनडो ईमोबिलिटी (Anevolve Mando eMobility), जो कि आनंद ग्रुप का हिस्सा है. ओला पर इसका 10.8 करोड़ रुपये बकाया है. इन दोनों ही कंपनियों का आरोप है कि ओला को जो कंपोनेंट सप्लाई किए गए हैं, वो उनका पेमेंट करने में नाकाम रही है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन दोनों कंपनियों का बकाया 45 दिन से ज्यादा समय से अटका हुआ है. इसलिए दोनों ही सप्लायर्स ने कंपनी के खिलाफ इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड
(IBC), 2016 के सेक्शन 9 के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू की है.
बेंगलुरु की NCLT कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रही है. एनवॉल्व मैनडो की याचिका पर सुनवाई 27 जुलाई को होनी है. जबकि स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी की याचिका पर सुनवाई सोमवार को है.
ओला ने दावों को चुनौती दी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ओला इन दोनों सप्लायर्स के दावों का कोर्ट में विरोध कर रही है. और इनके खिलाफ अपनी बात रखने के लिए ‘कैविएट’ भी दाखिल की है.
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ये पूरा विवाद सिर्फ पैसों के लेन-देन या बकाए का नहीं है, बल्कि ओला इलेक्ट्रिक ने इन दोनों कंपनियों की तरफ से सप्लाई किए गए कुछ पार्ट्स की क्वालिटी को लेकर भी सवाल उठाए हैं.
दोनों ही सप्लायर्स ओला इलेक्ट्रिक के लिए मुख्य सप्लायर्स में से हैं और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए जरूरी पार्ट्स सप्लाई करते हैं. स्टर्लिंग ई-मोबिलिटी ओला के लिए ट्रैक्शन मोटर्स, मोटर कंट्रोल यूनिट्स और डीसी कन्वर्टर्स सप्लाई करती है. एनेवॉल्व मैनडो भी ट्रैक्शन मोटर्स, कंट्रोलर्स, इनवर्टर और AC/DC कन्वर्टर्स की सप्लाई करती है, जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में होता है.
पहले भी हुआ था विवाद
हालांकि ओला इलेक्ट्रिक के लिए ये कोई पहली कानूनी मुसीबत नहीं है. इसी साल पहले भी, गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन संभालने वाली कंपनी रोसमर्टा डिजिटल सर्विसेज ने ओला के खिलाफ ऐसा ही दिवालिया घोषित करने का केस किया था. दरअसल, ओला ने रजिस्ट्रेशन विवाद के बाद ये काम रोसमर्टा से लेकर खुद ही संभालने का फैसला किया तो रोसमर्टा ने आरोप लगाया कि ओला ने उसका बकाया नहीं चुकाया है. लेकिन बाद में दोनों के बीच सुलह हो गई, ओला ने रोसमर्टा को पैसे चुका दिए और मामला कोर्ट के बाहर ही रफा-दफा हो गया.
ओला के शेयरों पर असर
इस खबर का असर भी ओला के शेयरों पर दिख रहा है. ओला इलेक्ट्रिक का शेयर मार्केट खुलते ही 0.75% तक लुढ़क गया और 42.01 रुपये तक आ गया. सोमवार को ये 42.39
रुपये पर बंद हुआ था.
