प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने एक बार फिर देशवासियों से सोना नहीं खरीदने की अपील की है. भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन इस तेज रफ्तार को बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने देश के लोगों से अपनी खर्च करने की आदत को बदलने की गुजारिश की है.
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को देशवासियों से कहा कि अगर छुट्टियां मनाने का प्लान है, तो विदेश में जाकर घूमने की बजाय अपने ही देश में टूरिज्म का मज़ा लें. अगर शादी के लिए डेस्टिनेशन वेडिंग का प्लान कर रहे हैं तो वो भी आप भारत में ही करें. इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री ने लोगों से एक बार ये अपील की है कि अगर जरूरत नहीं है तो सोना खरीदने से भी परहेज़ करें.
मई में भी की थी अपील
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को लोगों से सोना नहीं खरीदने की अपील की थी. हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान, West Asia/ईरान संकट के बीच मोदी ने भारतीयों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी. उन्होंने इसे विदेशी मुद्रा बचाने और देश पर पड़ रहे आर्थिक दबाव को कम करने से जोड़ा था.
तब PM मोदी ने कहा था कि लोग एक साल तक किसी भी फंक्शन के लिए सोने के गहने न खरीदें, साथ ही ईंधन की बचत के लिए वर्क-फ्रॉम-होम अपनाने, गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट-कारपूलिंग इस्तेमाल करने की भी अपील की थी.
उस समय भी वजह करीब-करीब यही थी, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए लोगों से डॉलर में होने वाला खर्च घटाने को कहा गया था, जिसमें सोना, पेट्रोल-डीजल, विदेशी छुट्टियां और यहां तक कि खाद्य तेल भी शामिल था.
“वेड इन इंडिया” का दिया नारा
प्रधानमंत्री मोदी ने ये सारी अपील X पर पोस्ट एक वीडियो संदेश के जरिए की है. जिसमें उन्होंने कहा “अगर छुट्टियों पर जाना है तो भारत में ही किसी जगह जाइए. डेस्टिनेशन वेडिंग भी भारत में हो सकती है. हमें ‘वेड इन इंडिया’ के मंत्र को जीना चाहिए.”
इस वीडियों में उन्होंने देशवासियों से “स्वेदेशी” और “Vocal for Local” को सपोर्ट करने की अपील की. उन्होंने आगे जोड़ा, “और अगर जरूरत न हो, तो सोना भी नहीं खरीदना चाहिए.” प्रधानमंत्री का कहना था कि स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जितना ज्यादा जोर दिया जाएगा, देश की आर्थिक रफ्तार उतनी ही मजबूती से बरकरार रहेगी.
PM मोदी की इस अपील के पीछे एक बड़ी वजह ये है कि विदेश में छुट्टियां बिताने और डेस्टिनेशन वेडिंग जैसे आयोजनों में काफी पैसा देश से बाहर चला जाता है, जबकि सोना हम इंपोर्ट करते हैं, जितनी ज्यादा सोने की देश में डिमांड होगी, उतना ज्यादा गोल्ड इंपोर्ट करना पड़ेगा.
इससे डॉलर में भुगतान बढ़ता है और विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ने के साथ साथ हमारा इंपोर्ट बिल भी बढ़ता है. जो कि हमारी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है. इस लिहाज से प्रधानमंत्री की ये अपील सीधे तौर पर लोगों की निजी खर्च करने की आदतों को सरकार के आत्मनिर्भरता वाले एजेंडे से जोड़ती नजर आती है. यानी लोग जो पैसा बाहर खर्च करते हैं, उसका रुख घरेलू अर्थव्यवस्था की तरफ मोड़ा जाए.
GDP ने क्यों बढ़ाई सरकार की उम्मीद?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये अपील उस GDP के आंकड़ों के एक दिन बाद आई है. जिसमें भारत की इकोनॉमी ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 7.8% की ग्रोथ दर्ज की है. ये आंकड़ा पिछली तिमाही के 8.6% से कम है, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 7% के अनुमान से ज्यादा है. इकोनॉमी के इन दमदार आंकड़ों के साथ भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है. प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में युद्ध, जियोपॉलिटिकल तनाव, और सप्लाई चेन की बाधाओं के बावजूद भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है.
2047 तक विकसित भारत का भरोसा
प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि देश यही ग्रोथ रफ्तार बनाए रखेगा और आजादी के शताब्दी वर्ष तक भारत एक विकसित अर्थव्यवस्था बन जाएगा. उन्होंने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि जब हम आजादी के 100 साल पूरे करेंगे, तब हम अपने युवाओं को एक विकसित भारत सौंपेंगे.

