RBI MPC Highlights: 3 साल के बाद रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी, आगे भी दरें बढ़ेंगी, रिजर्व बैंक ने बदला रुख

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RBI increases repo rate by 25 bps, warns inflation threat remains

RBI Monetary Policy Committee Meeting 2026: भविष्य में ब्याज दरों में कटौती नहीं होगी, बल्कि अब बढ़ोतरी ही होगी. मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने रेपो रेट में अनुमानों के मुताबिक 25 बेसिस प्वाइंट का इज़ाफा कर दिया है, जिससे अब रेपो रेट बढ़कर 5.5% हो गया है. इसके पहले आखिरी बार 8 फरवरी 2023 को ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई थी, यानी 20 मॉनिटरी पॉलिसी बैठकों के बाद ये पहली बार है जब रेपो रेट में बढ़ोतरी की गई है. इस साल 2026 में अबतक MPC की चार बैठकें हो चुकी हैं. अप्रैल, जून, अगस्त और अब अक्टूबर. जिसमें पिछली तीन बैठकों नें दरों को पॉज रखा गया था.

RBI की 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में सर्वसम्मति से वोट किया. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि SDF (स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी) रेट एडजस्ट होकर 5.25% पर है, जबकि MSF यानी मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट 5.75% पर हैं.

RBI ने बदला रुख, अब रेट कट की गुंजाइश नहीं

RBI गवर्नर ने कहा कि पॉलिसी का रुख ‘Neutral’ से बदलकर अब ‘Calibrated Tightening’ हो गया है. इसका मतलब ये है कि अब झुकाव सख्ती की तरफ़ है. यानी रेट कट की गुंजाइश फिलहाल नहीं है, अगर महंगाई का दबाव बना रहा तो ब्याज दरें धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन एक झटके में बड़ी बढ़ोतरी नहीं होगी. Calibrated” शब्द का यही मतलब है कि हर कदम महंगाई और ग्रोथ के आंकड़ों को देखकर नापा-तौला जाएगा.

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि जियोपॉलिटिकल घटनाओं की वजह से दुनिया के हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है. आगे भी अर्थव्यवस्था के मजबूत और लचीले बने रहने की उम्मीद है.

उन्होंने कहा कि मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए ये साफ है कि महंगाई की स्थिति पिछले साल जितनी अनुकूल नहीं है. रिजर्व बैंक के अनुमान के मुताबिक, अगले तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई औसतन करीब 5.8% रह सकती है. वहीं, चालू वित्त वर्ष के लिए कोर महंगाई का अनुमान 4.94% रखा गया है.

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है. अब आगे मॉनिटरी पॉलिसी में बदलाव की स्थिति बनी तो वो या तो रेपो रेट में बढ़ोतरी हो सकती है या फिर दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखा जा सकता है. ये फैसला आर्थिक परिस्थितियों और आगे के आउटलुक को देखते हुए किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि आगे दरों में बढ़ोतरी की अवधि और उसकी सीमा इस बात पर निर्भर करेगी कि आर्थिक वृद्धि और महंगाई वास्तव में किस दिशा में जाती है और उनका आउटलुक क्या रहता है. खासतौर पर महंगाई के दबाव, कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई से जुड़े झटकों के असर पर नजर रखी जाएगी.

रिटेल महंगाई का अनुमान बढ़ाया

रिजर्व बैंक ने रिटेल महंगाई के अनुमान को बढ़ाया है. इस साल रिटेल महंगाई 5.2% रहेगी. दूसरी तिमाही में रिटेल महंगाई का अनुमान 4.9% है, जबकि Q3FY27 में 6% और
Q4FY27 में 5.7% रहने का अनुमान जताया है. RBI ने कोर महंगाई दर का अनुमान मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 4.3% से बढ़ाकर 4.4% कर दिया है. जबकि Q1FY28 के लिए महंगाई दर 5.6% रहने का अनुमान है.

  • Q2: 4.9%
  • Q3: 6%
  • Q4: 5.7%

रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा कि बेस इफेक्ट की वजह से अगस्त में खाद्य और ईंधन महंगाई बढ़ी है. उन्होंने कहा कि खाने-पीने की चीजों के दाम अब ज्यादा चीजों में बढ़ रहे हैं, खासकर चीनी और प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है.

RBI गवर्नर ने कहा कि आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव बना रह सकता है, इसकी वजहें हैं दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की कमी, अल नीनो का असर और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दामों में भारी उतार-चढ़ाव.

उन्होंने कहा कि तेल के अलावा खाने-पीने की कई चीज़ों के दाम भी अब बढ़ते दिख रहे हैं. साथ ही, महंगाई के असर के शुरुआती संकेत भी मिल रहे हैं, क्योंकि कोर महंगाई यानी खाने और ईंधन को छोड़कर बाकी चीज़ों की महंगाई भी बढ़ी है और CPI में शामिल ज़्यादा चीज़ों के दाम चढ़ रहे हैं.

GDP ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाया

रिजर्व बैंक ने देश का GDP ग्रोथ अनुमान भी बढ़ाया है. RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% रखा है. RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2FY27) के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7.2% कर दिया है, तीसरी तिमाही (Q3) में GDP ग्रोथ 6.5% से बढ़कर 6.9% रहने का अनुमान है. चौथी तिमाही (Q4FY27) के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.8% पर बरकरार रखा गया है.

  • Q2: 7.2%
  • Q3: 6.9%
  • Q4: 6.8%

हालांकि वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही (Q1FY28) के लिए RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान थोड़ा घटाकर 7.1% कर दिया है, अगस्त की पिछली MPC बैठक में इसके 7.3% रहने का अनुमान जताया गया था.

कुछ और बड़े ऐलान

RBI ने NBFC अकाउंट एग्रीगेटरों के इंटरऑपरेबिलिटी को मंजूरी दे दी है. मतलब, NBFC के अकाउंट एग्रीगेटर आपस में जुड़ सकेंगे, जिससे किसी एक अकाउंट एग्रीगेटर के ज़रिए बाकी सभी अकाउंट एग्रीगेटरों से आपकी वित्तीय जानकारी एक जगह मिल सकेगी.

इसके अलावा, SEBI के नियमों के तहत काम करने वाली डिपॉज़िटरी अब अपने कंसॉलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) में बैंक जमा खातों की जानकारी भी जोड़ सकेंगी. इससे निवेश और डिपॉजिट, दोनों की जानकारी एक ही स्टेटमेंट में दिखेगी.

साथ ही, फाइनेंशियल मार्केट्स तेज़ी से बदल रहे हैं, इसलिए RBI फाइनेंशियल मार्केट्स के लिए एक “तकनीकी सलाहकार समिति” (Technical Consultative Committee) बनाएगा. RBI गवर्नर के मुताबिक ये समिति बाज़ार से जुड़े लोगों और दूसरे हितधारकों से नीति और कामकाज के मुद्दों पर व्यवस्थित बातचीत का मंच होगी

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