भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने बुधवार को बेंचमार्क रेपो रेट में फिर कोई बदलाव नहीं किया है, इसको 5.25% पर बनाए रखने का फैसला किया है. MPC के सभी 6 सदस्य इस फैसले पर एकमत रहे. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने ग्लोबल इकॉनमी को लेकर चिंता जताई और कहा कि पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष अभी भी ग्लोबल इकोनॉमी के लिए चुनौती बना हुआ है.
नई टैरिफ पॉलिसी से माहौल चुनौतीपूर्ण
रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा कि अमेरिका की ओर से कुछ दिन पहले लगाए गए नए टैरिफ की वजह से ट्रेड को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ग्लोबल हालात पहले के मुकाबले ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गए हैं. इस बदलते माहौल के बीच कुछ सेंट्रल बैंकों ने अपनी नीतियों को सख्त किया है, जबकि कुछ और सेंट्रल बैंक्स अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और स्थिति पर नजर रख रहे हैं.
RBI MPC Highlights
मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने और कौन से बड़े ऐलान और फैसले किए हैं, फटाफट एक नजर डालते हैं
लगातार चौथी बार पॉज
MPC ने इसके पहले फरवरी, अप्रैल और जून 2026 की मीटिंग्स में भी रेपो रेट को 5.25% पर ही रखा गया था. अब अगस्त 2026 की मीटिंग में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसके अलावा, RBI ने स्टैंडिंग डिपॉज़िट फैसिलिटी (SDF) रेट को भी 5% पर बरकरार रखा है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट को 5.5% पर स्थिर रखा है.
न्यूट्रल रुख बरकरार
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि MPC ने मॉनिटरी पॉलिसी के मामले में अपना “न्यूट्रल स्टांस” यानी तटस्थ रुख बरकरार रखने का भी फैसला किया है. इसका मतलब है कि RBI ने अपने आगे के इरादों को लेकर कोई साफ दिशा नहीं बताई है, न तो ये कहा है कि आगे रेट बढ़ाएंगे, न ही यह कहा है कि घटाएंगे. मतलब वो रेट घटा और बढ़ा दोनों ही सकता है, ये पूरी तरह से आने वाले डेटा जैसे महंगाई, ग्रोथ, ग्लोबल हालात पर निर्भर करेगा. इसे “डेटा-डिपेंडेंट अप्रोच” भी कहते हैं
महंगाई और बढ़ेगी
महंगाई के मोर्चे पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हेडलाइन CPI महंगाई अनुमान के मुताबिक ही टारगेट से ऊपर बढ़ी है. हमें ज्यादा महंगाई खास तौर पर खाने-पीने की चीजों ईंधन की वजह से देखने को मिल रही है. कोर महंगाई हालांकि अब भी नरम है. हेडलाइन CPI के इस साल की तीसरी तिमाही (Q3) में पीक पर पहुंचने और उसके बाद इसमें नरमी आने की उम्मीद है.
इस साल के लिए CPI महंगाई का अनुमान अब 5% रखा गया है, जो पहले के 5.1% के अनुमान से 10 बेसिस पॉइंट कम है. RBI ने FY2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के महंगाई अनुमान को 4.2% से घटाकर 4.1% कर दिया है, जबकि दूसरी तिमाही (Q2) के अनुमान को 5.1% से घटाकर 4.7% कर दिया है, Q3 का अनुमान 5.9% पर बरकरार रखा गया है, वहीं Q4 के अनुमान को मामूली बढ़ाकर 5.4% से 5.5% कर दिया गया है. आपको बता दें कि भारत की रिटेल महंगाई ने ने 17 महीनों में पहली बार RBI के टारगेट को पार किया, और जून में ये बढ़कर 4.38% पहुंच गई.
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FY27 में CPI का अनुमान
| FY27 | पुराना अनुमान | नया अनुमान |
|---|---|---|
| Q1FY27 | 4.2% | 4.1% |
| Q2FY27 | 5.1% | 4.7% |
| Q3FY27 | 5.9% | 5.9% |
| Q4FY27 | 5.4% | 5.5% |
FY27 ग्रोथ अनुमान बढ़ाया
RBI गवर्नर ने कहा कि ग्रोथ मजबूत होने के बावजूद, इस वित्त वर्ष में कम रहने का अनुमान है. हालांकि, अमेरिका की ग्लोबल ट्रेड पॉलिसीज को लेकर जो अनिश्चितताओं का माहौल है, उसकी वजह से ग्रोथ आउटलुक धुंधला बना हुआ है. कोई भी नीतिगत कदम उठाने से पहले, खासतौर पर महंगाई, उसके रुख को लेकर ज्यादा स्पष्टता आने की जरूरत है. RBI ने FY27 GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जो कि पिछले अनुमान 6.6% से 10 बेसिस पॉइंट ज्यादा है. ये घरेलू ग्रोथ आउटलुक को लेकर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.
रिजर्व बैंक ने Q1 FY27 के GDP ग्रोथ अनुमान को भी 6.6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है, और Q2 के अनुमान को 6.3% से बढ़ाकर 6.4% कर दिया है, Q3 का अनुमान 6.5% पर बिना बदलाव के रखा गया है. जबकि Q4 का अनुमान भी 6.8% पर बरकरार रखा गया है. जो ये दर्शाता है कि RBI को उम्मीद है कि बाकी वित्त वर्ष में ग्रोथ की गति मजबूत बनी रहेगी.
FY27 में GDP ग्रोथ अनुमान
| FY27 | पुराना अनुमान | नया अनुमान |
|---|---|---|
| Q1FY27 | 6.6% | 7% |
| Q2FY27 | 6.3% | 6.4% |
| Q3FY27 | 6.5% | 6.5% |
| Q4FY27 | 6.8% | 6.8% |
El Nino अब भी बड़ा जोखिम
रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा कि बारिश के समय और डिस्ट्रीब्यूशन पर अल नीनो का असर अभी भी एक बड़ा जोखिम बना हुआ है. कच्चे तेल की कीमतें अब भी बहुत ज्यादा अस्थिर बनी हुई हैं, जिनमें जियो-पॉलिटिकल घटनाओं की वजह से तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे निकट भविष्य का महंगाई आउटलुक धुंधला हो गया है. हालांकि अभी तक महंगाई का उतना ज्यादा असर नहीं हुआ. मगर, खाने-पीने की चीजों, ईंधन और दूसरी इनपुट लागतों में बढ़ोतरी का असर महंगाई पर दिख सकता है, इसका जोखिम बना हुआ है.
सिस्टम में रहेगी लिक्विडिटी
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि फाइनेंशियल सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहे, इसके लिए पहले से ही जरूरी कदम उठाता रहेगा. मई और जून के महीनों में पॉलिसी से जुड़े बदलावों का असर क्रेडिट मार्केट तक पहुंचने की रफ्तार थोड़ी धीमी रही. हालांकि क्रेडिट ग्रोथ अभी भी मजबूत बनी हुई है और ये सभी सेक्टर्स में एक जैसी दिख रही है, जो बताता है कि अलग-अलग सेक्टर्स में लोन की मांग लगातार बनी हुई है.
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