भारत का जॉब मार्केट बड़ी तेजी से बदल रहा है. इस मार्केट में नई इंडस्ट्रीज, सेक्टर्स, शहर और भूमिकाएं तेजी से उभरकर सामने आई हैं. टीमलीज सर्विसेज (TeamLease Services) ने अपनी नई रिपोर्ट Jobs and Salaries Primer FY 2026-27 जारी की है. ये रिपोर्ट उन सभी नौकरीपेशा लोगों के लिए और उनके लिए भी जो जॉब मार्केट में कदम रखने वाले हैं, बेहद काम की हो सकती है. क्योंकि ये रिपोर्ट भारत के बदलते जॉब मार्केट की एक साफ तस्वीर पेश करता है.
टीमलीज की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में सभी इंडस्ट्रीज़ में औसत सैलरी बढ़ोतरी 8.6% से 10.2% के बीच रहने का अनुमान है. यह बढ़ोतरी वित्त वर्ष 2025-26 की 6.2% से 11.3% की रेंज के मुकाबले थोड़ी संकरी है. मगर, कई सेक्टर्स ऐसे हैं जहां पर सैलरी हाइक काफी मज़बूत है. टीमलीज की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि सैलरी ग्रोथ अब पहले जैसी एक-समान नहीं रह गई है. अलग-अलग फंक्शन और रोल के हिसाब से इसमें साफ फर्क देखने को मिल रहा है.
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा सैलरी हाइक
जिन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा सैलरी हाइक का अनुमान है उसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और EV इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है. इसके अलावा, फिनटेक, हेल्थकेयर-फार्मा और पावर-एनर्जी सेक्टर भी शामिल हैं. इन इंडस्ट्रीज़ में औसत सैलरी बढ़ोतरी करीब 9.6% से 10.2% के बीच रहने का अनुमान है.
EV और EV इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर अब भी सबसे ज्यादा सैलरी देने वाली इंडस्ट्रीज बनी हुई हैं. हालांकि इसमें ग्रोथ रेट पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कम हुई है.
फिनटेक सेक्टर में भी करीब 10% सैलरी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है, जबकि हेल्थकेयर-फार्मा में 9.7% और पावर-एनर्जी सेक्टर में ये सैलरी हाइक करीब 9.6% के आसपास रह सकती है.
दूसरी तरफ, ऑटोमोटिव, रिटेल, इंश्योरेंस, BPO, FMCG, लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स जैसे “सस्टेनेबल ग्रोथ” वाले सेक्टर्स में सैलरी बढ़ोतरी थोड़ी स्थिर और मॉडरेट रहने की उम्मीद है. यह करीब 8.99.7% से 9.59.7% के बीच रह सकती है.
किस रोल को सबसे ज्यादा सैलरी
टीमलीज की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ खास रोल हैं, जिन्हें अगली सैलरी हाइक साइकल में बढ़िया ग्रोथ देखने को मिल सकती है. इनमें सबसे ऊपर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर, IT सपोर्ट एग्जीक्यूटिव, क्वालिटी एश्योरेंस इंजीनियर और साइट इंजीनियर जैसे रोल शामिल हैं, जिनमें 10% से ज्यादा की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है. इससे साफ पता चलता है कि इंजीनियरिंग और टेक्निकल रोल के लिए डिमांड अब भी कंपनियों में मौजूद है, खासकर उन रोल्स में जो सीधे प्रोडक्शन, क्वालिटी और ऑपरेशन से जुड़े हैं.
मेट्रो ही नहीं, इन शहरों में होगी जरबदस्त हाइक
आमतौर पर हम देखते हैं कि सैलरी हाइक को लेकर हमेशा बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े मेट्रो शहरों की ही चर्चा होती रही है. मगर, टीमलीज की नई रिपोर्ट कुछ अलग ही तस्वीर पेश करती है. इन मेट्रो शहरों से अलग- चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद इस बार सैलरी ग्रोथ के मामले में सबसे आगे नजर आ रहे हैं. मतलब ये कि अब उभरते हुए शहर भी टैलेंट इकोनॉमी में अपनी मजबूत पकड़ बना रहे हैं, जिसकी वजह औद्योगिक विस्तार, नई कंपनियों का निवेश और बदलते बिजनेस इकोसिस्टम को बताया जा रहा है.
मेट्रो शहरों में सबसे ज्यादा औसत सैलरी बढ़ोतरी चेन्नई में होने का अनुमान है, जहां यह 9.7% रह सकती है. इसके बाद पुणे और हैदराबाद हैं, दोनों में 9.6% बढ़ोतरी का अनुमान है, जबकि बेंगलुरु में यह 9.4% रहने की उम्मीद है. मुंबई और दिल्ली, दोनों में 9.3% बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट बताती है कि कई छोटे शहर अब बड़े मेट्रो शहरों के बराबर, और कुछ मामलों में उनसे भी ज्यादा सैलरी ग्रोथ दर्ज कर रहे हैं
रिपोर्ट में एक बात और सामने आई है कि इन शहरों की ग्रोथ पहले के उन साइकल्स से बिल्कुल अलग है, जहां IT सेक्टर का ही हायरिंग पर दबदबा रहता था. इस बार इन शहरों में सैलरी ग्रोथ की असली वजह बढ़ते औद्योगिक क्लस्टर, मैन्युफैक्चरिंग में हो रहा निवेश और एंटरप्राइज़ ऑपरेशंस का विस्तार है.
हालांकि IT सेक्टर अब भी ज्यादातर प्रमुख शहरों में सबसे ज्यादा सैलरी देने वाली इंडस्ट्री बना हुआ है. हैदराबाद में IT सेक्टर की सैलरी ग्रोथ करीब 11.7%, चेन्नई में 11.5% और पुणे में 11.3% रहने का अनुमान लगाया गया है, जो बाकी इंडस्ट्रीज के औसत से काफी ऊपर है. बेंगलुरु में सैलरी ग्रोथ 12.7% रहने का अनुमान है.
सस्टेनेबल ग्रोथ वाले सेक्टर्स
टीमलीज की रिपोर्ट के मुताबिक ऑटोमोटिव, रिटेल, इंश्योरेंस, BPO, FMCG, लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स जैसे सस्टेनेबल ग्रोथ सेक्टर्स में सैलरी बढ़ोतरी 8.9% से 9.5% के बीच स्थिर रहने का अनुमान है. इन सेक्टर्स में भी कुछ रोल्स में औसत से ज्यादा तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है. जैसे – IT सपोर्ट एग्जीक्यूटिव (10.1%), प्रोजेक्ट इंजीनियर (10.7%), EHS ऑफिसर (10.1%), साइट इंजीनियर (10.1%) और रिलेशनशिप एग्जीक्यूटिव (10.1%) में सबसे तेज हाइक का अनुमान है.
ये ट्रेंड बताता है कि इंजीनियरिंग, तकनीकी सपोर्ट और कस्टमर-फेसिंग भूमिकाओं की मांग अब भी लगातार बनी हुई है, जो कोर इंडस्ट्रीज़ में इंफ्रास्ट्रक्चर एग्जीक्यूशन और सर्विस डिलीवरी को आगे बढ़ाती हैं.
बैंकिंग, कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट, टेलीकॉम, और टेक्सटाइल जैसे “ग्रैजुअल ग्रोथ” यानी धीमी रफ्तार से बढ़ने वाले सेक्टर्स में सैलरी बढ़ोतरी बहुत मामूली रहने का अनुमान है. ये 8.6% से 8.8% के बीच रह सकती है. हालांकि, इसी कैटेगरी में साइट इंजीनियर (9.8%) और टेलीकॉलर (9.7%) जैसी खास भूमिकाओं में सेक्टर औसत से ज्यादा तेज बढ़ोतरी होने का अनुमान है.
रिपोर्ट कैसे तैयार की गई
TeamLease ने इसके लिए 23 इंडस्ट्रीज़ और 20 शहरों में फैली करीब 1,268 कंपनियों से मिली जानकारी का एनालिसिस किया है. इतने बड़े सैंपल साइज की वजह से यह रिपोर्ट भारतीय जॉब मार्केट की मौजूदा सोच और आने वाले ट्रेंड्स को समझने के लिए एक भरोसेमंद स्रोत मानी जाती रही है.
रिपोर्ट में एक और अहम बात सामने आई है, स्थायी और अस्थायी रोल्स के बीच सैलरी को लेकर गैप लगातार बढ़ता जा रहा है. इसका मतलब है कि जहां स्थायी कर्मचारियों की सैलरी ग्रोथ स्थिर बनी हुई है, वहीं टेंपररी वर्कफोर्स के लिए ये पैटर्न अलग तरीके से बदल रहा है, जो देश में बदलते एम्प्लॉयमेंट मॉडल की तरफ इशारा करता है.
ये रिपोर्ट हर नौकरीपेशा के लिए बहुत काम की है, साथ ही उनके लिए भी जो जॉब मार्केट में कदम रखने वाले हैं. क्योंकि उन्हें इस रिपोर्ट तेजी से बदलते जॉब मार्केट की एक तस्वीर मिलती है. जिसको देखकर वो अपना करियर को उस दिशा में मोड़ सकते हैं.
मौजूदा रिपोर्ट भारत के बदलते जॉब मार्केट की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है, जहां ग्रोथ अब सिर्फ मेट्रो शहरों और परंपरागत इंडस्ट्रीज़ तक सीमित नहीं है, बल्कि नए सेक्टर्स और उभरते शहर भी इस बदलाव में बराबर की भूमिका निभा रहे हैं. आने वाले महीनों में जैसे-जैसे कंपनियां अपने अप्रेजल साइकल की योजना बनाएंगी, इस रिपोर्ट के आंकड़े इंडस्ट्री बेंचमार्किंग के लिए एक अहम रेफरेंस पॉइंट का काम करेंगे.
