क्या चीनी अब होगी सस्ती! सरकार ने इम्पोर्ट नियमों में फिर किया बदलाव

sureofficialmedia_admin
7 Min Read
India Eases Sugar Import Rules as Prices Surge, Tightens Checks on Hoarding

Sugar Prices Today: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है, ताकि फेस्टिव सीजन में चीनी के भाव सामान्य रहें और घरेलू मार्केट में सप्लाई भरपूर बनी रहे. इसलिए सरकार ने कच्ची चीनी (Raw Sugar) के इंपोर्ट नियमों में बदलाव किया है. नए नियम के तहत अब इंपोर्टर्स को कच्ची चीनी को रिफाइंड करके घरेलू बाजार में बेचने के लिए ज्यादा समय दिया जाएगा.

इम्पोर्ट नियमों को आसान किया

सरकार ने अब नियमों में बदलाव करते हुए कहा है कि इंपोर्टर्स को बिल ऑफ एंट्री (Bill of Entry) दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर कच्ची चीनी को प्रोसेस करके रिफाइंड चीनी में बदलना होगा और उसे भारत में बेचना होगा. बिल ऑफ एंट्री का मतलब है कि जब कोई कंपनी विदेश से चीनी इंपोर्ट करती है तो उसे कस्टम विभाग को उसकी पूरी जानकारी देनी होती है.

यानी अब सभी इंपोर्टर्स के लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक फिक्स्ड डेडलाइन नहीं होगी. इसके बजाय, हर इंपोर्ट के लिए बिल ऑफ एंट्री की तारीख से 2 महीने की समयसीमा लागू होगी. मान लीजिए कि अगर किसी इंपोर्टर ने 1 सितंबर को बिल ऑफ एंट्री फाइल किया, तो नए नियम के हिसाब से उसे उस तारीख से 2 महीने के अंदर कच्ची चीनी को रिफाइन करके घरेलू बाजार में बेचने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

10 लाख टन चीनी इंपोर्ट को मंजूरी

सरकार ने 20 अगस्त 2026 को 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की मंजूरी दी थी, ये इंपोर्ट Tariff Rate Quota (TRQ) के तहत किया जा सकता है. इसमें सामान्य तौर पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी से राहत दी गई है, सरकार का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है. पहले नियम के मुताबिक इंपोर्टर्स को कच्ची चीनी को सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलकर 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में बेचना था. अब इस फिक्स्ड डेडलाइन को बदलकर बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने कर दिया गया है.

सरकार क्यों कर रही है यह बदलाव?

सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के ही मुताबिक 19 अगस्त को चीनी की औसत रिटेल कीमत ₹54.06/kg थी, जबकि 24 अगस्त को ये बढ़कर ₹63.05/kg हो गई है. ये पूरे देश में औसत कीमत है. वास्तव में कीमतें इससे ज्यादा हैं, ज्यादातर जगहों पर चीनी की कीमतें 70 रुपये प्रति किलो के पार चली गई हैं. जो कि ठीक एक महीने तक यानी जुलाई में चीनी की कीमत 48 रुपये प्रति किलो थीं. सरकार चाहती है कि त्योहारी सीजन में चीनी की सप्लाई बनी रहे, ताकि कीमतें काबू में रहें. इसके साथ ही सरकार जमाखोरी और जानबूझकर सप्लाई रोकने पर भी नजर रख रही है.

पुराने एडवांस ऑथराइजेशन पर भी राहत

सरकार ने कुछ पुराने एडवांस ऑथराइजेशन को TRQ स्कीम में बदलने की भी एक बार अनुमति दी है. ये सुविधा उन SION E-52 Advance Authorisations के लिए है, जिनके तहत कच्ची चीनी वास्तव में 20 अगस्त 2026 तक इंपोर्ट की जा चुकी थी.

इसमें दो तरह की चीनी शामिल है-

  • इंपोर्ट की गई कच्ची चीनी से पहले ही तैयार की जा चुकी रिफाइंड चीनी
  • ऐसी कच्ची चीनी जिसे अभी प्रोसेस करके रिफाइंड चीनी बनाया जाना है

हालांकि, इस बदलाव के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं, इनमें इंपोर्ट के समय जिस GST से छूट मिली थी, उसका भुगतान करना भी शामिल है.

इसका क्या मतलब है?

इसका आसान मतलब ये है कि कुछ कंपनियों के पास पहले से चीनी इंपोर्ट करने की सरकारी अनुमति थी, लेकिन 20 अगस्त को सरकार ने नई TRQ स्कीम का शुरुआत कर दी. अब सरकार ने एक बार के लिए (One Time) ऐसी पुरानी परमिशन को नई TRQ व्यवस्था में बदलने का रास्ता दिया है.

यानी कि किसी कंपनी के पास SION E-52 Advance Authorisation था और उसने 20 अगस्त 2026 तक कच्ची चीनी भारत में इंपोर्ट कर ली थी, अब वो कच्ची चीनी या तो रिफाइन हो चुकी है या फिर उसे रिफाइन किया जाना है, दोनों ही हालातों में कंपनी अपनी पुरानी Advance Authorisation को एक बार TRQ स्कीम में कन्वर्ट करा सकती है.

मगर, कंपनी इस पुराने इंपोर्ट को नई TRQ स्कीम के तहत लाना चाहती है, तो इंपोर्ट के समय जो GST छूट मिली थी, उसका भुगतान करना होगा.

चीनी का स्टॉक भी घटा

घरेलू बाजार में चीनी का स्टॉक फिलहाल करीब 35-39 लाख टन रहने का अनुमान है. ये सरकार के तय किए गए 60 लाख टन के बफर स्टॉक से काफी कम है. नई चीनी की पेराई का सीजन शुरू होने में अभी समय है, ऐसे में सरकार को डर है कि आने वाले दिनों में सप्लाई पर और दबाव बढ़ सकता है. इसी वजह से सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है, इसका मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है.

सरकार ने सिर्फ इंपोर्ट बढ़ाने का फैसला नहीं किया है, बल्कि जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए स्टॉक लिमिट भी घटा दी है, 1 सितंबर 2026 से बल्क चीनी खरीदारों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 30 दिन की खपत से घटाकर सिर्फ 15 दिन की खपत कर दी गई है.

Share This Article