Quick Commerce की लड़ाई अब सिर्फ 10 मिनट में डिलीवरी देने की नहीं रह गई है. अब मुकाबला इस बात का है कि किस कंपनी के पास अपने सामान पर ज्यादा कंट्रोल होगा, किसकी सप्लाई चेन ज्यादा मजबूत होगी और कौन ज्यादा मुनाफा कमाएगा. इसी रेस में आगे निकलने के लिए Swiggy ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने एक दिन में उसके शेयर को 7% तक गिरा दिया. लेकिन यही फैसला भविष्य में कंपनी के लिए गेमचेंजर भी साबित हो सकता है.
आज पूरे दिन Swiggy बाज़ार में सुर्खियों में रहा, क्योंकि NSE पर इंट्राडे में ये 7.2% टूटकर ₹242.51 तक फिसल गया, जो कि 30 जून को बनाए गए 52 हफ्ते के निचले स्तर ₹235.75 से बस थोड़ा ही दूर है. फिलहाल ये शेयर काफी हद तक रिकवर हो चुका है. ये 3.84% की गिरावट के साथ ₹251.50 पर बंद हुआ.

Swiggy का शेयर क्यों टूटा
शेयर के टूटने की सबसे बड़ी वजह थी, इसकी विदेशी हिस्सेदारी (Foreign Ownership ) की सीमा में बदलाव का फैसला किया गया है. Swiggy के बोर्ड ने प्रस्ताव रखा है कि कंपनी में कुल विदेशी हिस्सेदारी की अधिकतम सीमा 49.5% होगी. जो कि अभी तक 100% तक थी. इस प्रस्ताव पर 18 अगस्त की AGM में शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी. इस फैसले का मकसद है कंपनी का IOCC (Indian-Owned and Controlled Company) स्टेटस बरकरार रखना और इन्वेंटरी-लेड मॉडल की तरफ शिफ्ट होना.
ये पूरा मामला असल में भारत के FDI नियमों से जुड़ा है, जो तय करते हैं कि कोई ई-कॉमर्स कंपनी किस तरह से अपना सामान बेच सकती है और किस तरह से नहीं बेच सकती. भारत में FDI नियमों के मुताबिक, अगर किसी ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस में 50% से ज़्यादा हिस्सेदारी विदेशी है, तो वो अपना इन्वेंट्री मॉडल नहीं चला सकतीं. यानी वे खुद सामान खरीदकर स्टोर नहीं कर सकतीं और सीधे ग्राहकों को नहीं बेच सकतीं, वे केवल मार्केटप्लेस की तरह ही काम कर सकती हैं. मतलब ये कि वो अपना प्लेटफॉर्म दूसरे सेलर्स को देगी ताकि वो सेलर्स अपना सामान बेच सकें, खुद प्लेटफॉर्म अपना सामान नहीं बेच सकता.
Swiggy इसे क्यों बदलना चाहती है
Swiggy का क्विक-कॉमर्स ब्रांड Instamart अभी तक सिर्फ एक मार्केटप्लेस मॉडल में काम करता था, यानी वो अलग-अलग ब्रांड्स और सेलर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर जगह देता था, खुद सामान खरीदकर नहीं बेच सकता था, इससे कुछ दिक्कतें थीं.
1- सप्लाई चेन पर पूरा कंट्रोल नहीं मिलता
2- मार्जिन कम रहता है, क्योंकि हर सेलर के साथ डील करनी पड़ती है
3- स्टॉक और डिलीवरी टाइमिंग को सीधे मैनेज नहीं कर सकते
इसलिए Swiggy के बोर्ड ने विदेशी हिस्सेदारी को 100% से घटाकर 49.5% पर लाने का प्रस्ताव पास किया, ताकि वह IOCC स्टेटस हासिल कर ले. एक बार IOCC बन जाने पर, Instamart सीधे ब्रांड्स से सामान खरीदकर अपने वेयरहाउस में रख सकेगा और खुद बेच सकेगा, जैसे एक साधारण रिटेलर करता है.
बाज़ार में घबराहट क्यों फैली?
इस खबर की वजह से Swiggy के शेयर औंधे मुंह गिर गए. तो सवाल ये है कि इस बदलाव से बाज़ार क्यों डर रहा है. वो डर ये है कि ये शेयर MSCI Standard Index और FTSE Index से बाहर हो सकता है. दरअसल, दुनिया भर में कई बड़े ETF, Index Funds और पैसिव फंड्स ऐसे हैं जो MSCI और FTSE जैसे ग्लोबल इंडेक्स को फॉलो करते हैं. यानी जिस कंपनी का शेयर इंडेक्स में शामिल होता है, ये फंड भी उसका शेयर खरीदते हैं. और अगर कोई कंपनी इंडेक्स से बाहर हो जाए, तो वो शेयर बेच भी देते हैं.
यही डर इस समय Swiggy के शेयर पर भारी पड़ रहा है. ब्रोकरेज फर्म Nuvama के मुताबिक, अगर Swiggy इन दोनों इंडेक्स से बाहर होती है, तो बड़ी विदेशी बिकवाली देखने को मिल सकती है. MSCI Standard Index में Swiggy की वेटेज अभी 28 बेसिस पॉइंट है. अगर कंपनी इस इंडेक्स से बाहर होती है, तो करीब 340 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 2,900 करोड़ रुपये की बिकवाली हो सकती है. इसके तहत लगभग 12.5 करोड़ शेयर बेचे जा सकते हैं, जो Swiggy के औसत 6 दिनों की ट्रेडिंग के बराबर है.
वहीं FTSE Index में Swiggy की वेटेज 24 बेसिस पॉइंट है. अगर यहां से भी कंपनी बाहर होती है, तो करीब 120 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 1,000 करोड़ रुपये की बिकवाली हो सकती है. इसमें लगभग 4.6 करोड़ शेयर बिक सकते हैं, जो करीब दो दिनों की औसत ट्रेडिंग के बराबर है.
यानी अगर Swiggy MSCI और FTSE दोनों इंडेक्स से बाहर होती है, तो कुल मिलाकर लगभग 460 मिलियन डॉलर या करीब 4,000 करोड़ रुपये की पैसिव बिकवाली हो सकती है. इसी के डर से आज निवेशकों ने पहले ही शेयर में मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे Swiggy का शेयर करीब 7% तक टूट गया.
Blinkit पहले ही चल चुका इस रास्ते पर
हालांकि Swiggy से पहले ऐसा कदम Blinkit भी उठा चुकी है. सितंबर 2025 में Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal ने विदेशी हिस्सेदारी घटाकर IOCC का स्टेटस हासिल किया था. इसके बाद Blinkit सीधे कंपनियों और ब्रांड्स से सामान खरीदकर बेचने लगी, जिससे उसके क्विक कॉमर्स बिजनेस को मजबूती मिली. मतलब ये कोई नई या अनजानी रणनीति नहीं है.Swiggy असल में उसी रास्ते पर चल रही है जिस पर उसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी पहले ही कदम बढ़ा चुका है, ताकि Instamart, Blinkit से मार्जिन और सप्लाई चेन के मामले में पीछे न रह जाए.
ये Swiggy के लिए अच्छी खबर है या बुरी?
फिलहाल बाजार इस खबर को निगेटिव मान रहा है क्योंकि Index से बाहर होने का खतरा है, तो जाहिर है ये स्वाभाविक रिएक्शन है. लेकिन लंबे समय के नजरिए से तस्वीर अलग हो सकती है. अगर IOCC बनने के बाद Instamart Inventory Model पर सफलतापूर्वक शिफ्ट हो जाता है, तो कंपनी की ऑपरेटिंग मार्जिन बेहतर हो सकती है. इससे सप्लाई चेन पर कंट्रोल बढ़ेगा. ग्रॉस मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है. Quick Commerce बिजनेस पहले से ज्यादा प्रॉफिटेबल हो सकता है. यानी Short Term में शेयर पर दबाव है, लेकिन Long Term में यही फैसला कंपनी के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है.
फिलहाल निवेशकों की नजर 18 अगस्त की AGM पर रहेगी, जहां इस प्रस्ताव पर वोटिंग होगी. अगर शेयरधारक इसे मंजूरी देते हैं, तो Swiggy IOCC बनने की दिशा में बड़ा कदम उठा लेगी. इसके बाद बाजार ये देखेगा कि क्या कंपनी MSCI और FTSE जैसे ग्लोबल इंडेक्स में बनी रहती है या बाहर हो जाती है. यानी फिलहाल Swiggy के सामने दो तस्वीरें हैं .एक तरफ शॉर्ट टर्म में विदेशी बिकवाली का जोखिम, तो दूसरी तरफ लॉन्ग टर्म में Quick Commerce बिजनेस को ज्यादा मुनाफेदार बनाने का मौका. आने वाले महीनों में यही तय करेगा कि आज जिस फैसले से शेयर टूटा, वही फैसला भविष्य में कंपनी के लिए टर्निंग पॉइंट बनता है या नहीं.
Flipkart फूड डिलिवरी बिज़नेस में कूदेगा
Swiggy के शेयर में आई गिरावट के पीछे एक और वजह भी रही. Flipkart फूड डिलीवरी बिजनेस में एंट्री करने को तैयार है. Flipkart की एंट्री का मतलब है कि अब तक Swiggy और Zomato के दबदबे वाले फूड डिलीवरी बाजार में एक और बड़ा खिलाड़ी उतरने जा रहा है. इससे पहले ही मुनाफे के लिए जूझ रहे इस सेक्टर में कंपटीशन और तेज होगा.
Walmart के स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart अगले 30 दिनों के भीतर बेंगलुरु में अपने फूड डिलीवरी बिजनेस का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी कर रही है. कंपनी के CEO का कहना है कि Flipkart इसके लिए एक ऐप लॉन्च करने की सोच रही है.
निवेशकों को डर है कि Flipkart के आने से ग्राहकों को बनाए रखने के लिए कंपनियों को फिर से भारी डिस्काउंट और ऑफर्स देने पड़ सकते हैं, जिससे उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है.
इसी साल मार्च में Rapido ने भी Ownly नाम से अपना जीरो-कमीशन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म बेंगलुरु में लॉन्च किया था. यानी फूड और क्विक कॉमर्स सेक्टर में मुकाबला लगातार बढ़ रहा है और अब Flipkart की एंट्री इस मुकाबले को एक नए लेवल पर ले जा सकती है.
