₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज; सरकार ने किया साफ

sureofficialmedia_admin
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₹2,000 UPI Payments Stay Free; Government Issues Clarification

क्या 2,000 रुपये या इससे कम के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज लगेगा, ये बहस पिछले दिनों काफी चर्चा में थी. अब केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि UPI से 2,000 रुपये तक के पेमेंट पर कोई भी चार्ज नहीं लगेगा. साथ ही, RuPay डेबिट कार्ड से भी 2,000 रुपये तक के पेमेंट पर कोई चार्ज बैंक या पेमेंट कंपनियां नहीं वसूल सकेंगी. सरकार की ओर से किए गए इस ऐलान से ये साफ हो गया है कि UPI पेमेंट पर Merchant Discount Rate यानी MDR लगाने का रास्ता अब साफ हो गया है. हालांकि, हर बड़े UPI पेमेंट पर MDR लगेगा, ऐसा नहीं है. इसके लिए अलग से नियम और दरें तय की जानी हैं.

पहले समझिए MDR क्या है?

MDR का मतलब है Merchant Discount Rate, ये वो फीस है जो किसी डिजिटल पेमेंट को स्वीकार करने के बदले दुकानदार से बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर लेता है. ये फीस UPI, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड जैसे डिजिटल पेमेंट पर लगती है. जनवरी 2020 UPI पेमेंट्स पर MDR को जीरो कर दिया गया था. क्योंकि तब सरकार का मकसद UPI के जरिए डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना था. अब सरकार ने नियमों में बदलाव करके कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने का रास्ता खोल दिया है.

जुलाई के मध्य में मीडिया में खबरें आईं कि सरकार UPI पर MDR वापस लाने की तैयारी कर रही है और 2,000 रुपये की सीमा तय की जा सकती है. इसके बाद संसद के मॉनसून सत्र में सरकार ने Payment and Settlement Systems (PSS) Act, 2007 में संशोधन किया. इस संशोधन से बैंकों और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स को UPI और दूसरे पेमेंट मोड जैसे क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड पर चार्ज लगाने की हरी झंडी मिल गई.

सरकार ने अब क्या किया है?

वित्त मंत्रालय ने Payment and Settlement Systems Act में किए गए बदलावों को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी की है. जिसमें कहा गया है कि 2,000 रुपये से कम या 2,000 रुपये तक के UPI पेमेंट और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई चार्ज नहीं लगा सकेंगे. सरकारी नोटिफिकेशन में साफ लिखा है कि पेमेंट करने या पाने वाले किसी भी व्यक्ति पर सीधे या घुमा-फिराकर कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा. क्योंकि अक्सर ऐसा देखा गया है कि दुकानदार किसी भी तरह से ग्राहकों से क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड पेमेंट पर चार्ज वसूल लेते हैं, ताकि MDR का बोझ वो खुद उठाने से बच जाएं.

₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट का क्या होगा?

अब सवाल ये है कि अगर 2000 रुपये से कम के पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा तो जाहिर है, इसके ऊपर के अमाउंट पर चार्ज लगेगा, वो कितना होगा? तो अभी तक सरकार ने ये तय नहीं किया है. किस तरह के UPI पेमेंट पर MDR लगेगा, कितना लगेगा और किन ट्रेडर्स पर लागू होगा, इसकी पूरी तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है. हालांकि अगस्त में वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा था कि UPI पर भविष्य में लगने वाला कोई भी MDR चार्ज बहुत मामूली होगा और यह सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर ही लागू होगा. मंत्रालय ने ये भी कहा था कि ज्यादातर मर्चेंट लेनदेन पर कोई फीस नहीं लगेगी.

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI जल्द ही MDR को लेकर ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी कर सकता है. इन चार्जेज की दरें “UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी” तय करेगी, जिसकी अध्यक्षता NPCI करता है और इसमें दूसरे स्टेकहोल्डर्स भी शामिल होंगे. MDR की दरें NPCI की अगुवाई वाली UPI and Services Steering Committee तय कर सकती है.

₹2,000 की सीमा क्यों अहम है?

ये कई बार पूछा जाता है कि 2,000 रुपये ही क्यों? 3,000 या 4,000 रुपये पर की सीमा पर चर्चा क्यों नहीं हो रही. इसी को लेकर रेटिंग एजेंसी CareEdge की एक रिपोर्ट जारी हुई है. जिसमें कहा गया है कि UPI पर Peer-to-Merchant यानी P2M लेन-देन कुल UPI लेनदेन वैल्यू का करीब 29% हैं. मतलब आप UPI के जरिए अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और तमाम दूसरी जगहों पर पैसे भेजते हैं, साथ ही दुकानदारों और व्यापारियों को भी पेमेंट करते हैं. यही हिस्सा करीब 29% है. इसमें भी 67.2% पेमेंट 2,000 से ज्यादा के हैं.

साफ है कि 2,000 रुपये की सीमा इसलिए अहम है क्योंकि इस सीमा के ऊपर बड़ी संख्या में कारोबारी UPI पेमेंट आते हैं. यानी अगर भविष्य में 2,000 रुपये से ऊपर के कुछ मर्चेंट UPI लेनदेन पर MDR लगाया जाता है, तो इसका दायरा छोटा नहीं होगा. ये दर कितनी होगी और किन लेन-देन पर लगेगी, इसका फैसला NPCI करेगा.

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