5 महीने से भी ज्यादा वक्त हो चुका है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म नहीं हुआ, हालांकि कई कोशिशें हो चुकी हैं. मगर, अब शायद ये तनाव खत्म होने की कगार पर है. दोनों देशों के बीच सुलह की कोशिशों को लेकर बातचीत हुई है, दावा ये किया जा रहा है कि ये बातचीत काफी अच्छी हुई है. इसलिए सोने की कीमतों में एक बार फिर से जोरदार तेज़ी देखने को मिल रही है. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार दोनों जगहों पर सोना वायदा में 1.5%-2% की उछला हुआ है.
MCX पर सोना वायदा 5 अगस्त, दोपहर 12:30 बजे 2,200 रुपये या 1.55% की मजबूती के साथ 1,44,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, हालांकि इंट्राडे में इसने 1,44,950 रुपये को छुआ था. सोमवार को सोना वायदा 1,42,589 पर बंद हुआ था. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कॉमेक्स पर सोना वायदा करीब 2% की तेज़ी के साथ 4,233 डॉलर प्रति आउंस पर ट्रेड कर रहा है, इसने इंट्राडे में 4,238.42 का हाई भी बनाया.
कैसी रही शांति वार्ता
बाज़ार को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी में शुरू हुआ टकराव खत्म हो सकता है. दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता को लेकर अमेरिका की ओर से पॉजिटिव बयानों से बाज़ारों में जोरदार तेजी देखने को मिली है. पहले अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने CNBC के साथ एक इंटरव्यू में ये बयान दिया कि मंगलवार या बुधवार तक डील हो सकती है. फिर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी शांति वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत दिए.
इसके बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि मंगलवार को हुई दिनभर की बातचीत के दौरान उनकी सरकार की ईरान के साथ “बहुत अच्छी चर्चा” हुई है. इस बयान के बाद पांच महीने से चल रहे इस संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीदें और बढ़ गई हैं.
ट्रंप के इस बयान के असर पूरी दुनिया के बाजारों पर दिखा. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई. ब्रेंट क्रूड जो कि पिछले हफ्ते तक 86 डॉलर के ऊपर घूम रहा था, अब 78 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल चुका है. WTI क्रूड भी 74 डॉलर प्रति बैरल तक लुढ़क गया. कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है कि निवेशकों को उम्मीद है कि जल्द ही कोई ऐसा समझौता हो सकता है, जिससे नाकाबंदी वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही फिर से बहाल हो जाए. जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई का संकट खत्म हो जाएगा.
ट्रंप हमले की चेतावनी भी दी
एक तरफ ट्रंप ये कह रहे हैं कि चर्चा बहुत अच्छी हुई, तो दूसरी तरफ वो ईरान को धमकी भी दे रहे हैं. Fox News के एक शो में बात करते हुए ट्रंप ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच दिनभर चर्चा हुई, उम्मीद है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बहुत जल्द फिर से खुल जाएगा. लेकिन, उन्होंने एक चेतावनी भी दी कि अगर ईरान फिर से पीछे हटता है, तो उसे बहुत बुरी तरह से जवाब दिया जाएगा.
ट्रंप के ऐसे बयान नए नहीं हैं, पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि अगर तेहरान समझौते तक नहीं पहुंचा, तो भारी हमले किए जाएंगे. इसके बावजूद वो बीच-बीच में चर्चा अच्छी चल रही है जैसी बातें भी करते रहते हैं. मगर सच्चाई यही है कि ईरान के साथ तनाव अभी तक खत्म नहीं हो पाया है.
जैसा कि हर बार जैसा होता है, ईरान के सरकारी मीडिया ने एक जानकार सूत्र के हवाले से बताया है कि ओमान के साथ स्ट्रेट को लेकर होने वाला समझौता तब तक टलता रहेगा, जब तक अमेरिका ईरान को धमकियां देना बंद नहीं करता.
अंतरिम समझौते की खबर भी है
Axios की एक रिपोर्ट सूत्रों के हवाले से बताती है कि अमेरिका और ईरान, ओमान की सहमति से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए एक अंतरिम समझौते के करीब पहुंच चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की कोशिश है कि इस समझौते का ऐलान बुधवार को ही कर दिया जाए. पूरी दुनिया और बाज़ारों को इस ऐलान का बेसब्री से इंतजार है.
सोने में क्यों तेज़ी है
सोने में तेज़ी इसलिए है क्योंकि कच्चे तेल कीमतें एक बार फिर से गिरी हैं, ये गिरावट काफी बड़ी है. कच्चा तेल टूटता है तो महंगाई का खतरा कम होता है, जिससे ब्याज दरें कम होने की उम्मीद बढ़ जाती है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने खुद ये कहा है कि उनके लिए महंगाई एक बड़ी चिंता की बात है, सबसे पहले वो महंगाई को काबू करना चाहते हैं.
सोने में तेजी इसलिए है क्योंकि,
- जब ब्याज दरें कम होती हैं, तो बॉन्ड यील्ड भी घटती है, जिससे निवेशक गोल्ड की तरफ मुड़ते हैं और गोल्ड की डिमांड बढ़ने से कीमतें भी ऊपर जाती है.
- जब बॉन्ड यील्ड कम होती है तो दबाव डॉलर पर भी पड़ता है, इसलिए डॉलर इंडेक्स 100 के नीचे फिसलकर अब 99.80 के करीब आ गया है. गोल्ड की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए जब डॉलर कमजोर होता है, तो दूसरी करेंसी रखने वाले विदेशी निवेशकों के लिए गोल्ड खरीदना सस्ता पड़ जाता है, इससे गोल्ड की डिमांड बढ़ती है.
इंतजार सिर्फ इस शांति वार्ता के ऐलान का है, बाज़ार ये जानना चाहेगा कि डील किन शर्तों पर हुई, क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से सभी के लिए खुल जाएगा और स्ट्रेट क्या ईरान के कब्जे में ही रहेगा या फिर उसे आजाद किया जाएगा, क्योंकि ये वो मसले हैं जिनका हल इतनी आसानी से मिलने वाला नहीं, क्योंकि ईरान अमेरिका की सारी शर्तें मान ले, ऐसा थोड़ा मुश्किल लगता है.

