Infosys, TCS, Wipro समेत कई IT कंपनियों को ट्रंप का एक और झटका! PERM प्रोग्राम से किया सस्पेंड

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US Suspends Green Card Program for H-1B Workers of Infosys, TCS, Wipro Microsoft What Went Wrong

भारतीय IT कंपनियों को अमेरिका की ट्रंप सरकार से एक और तगड़ा झटका लगा है. ट्रंप सरकार ने कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को अमेरिका के PERM (Permanent Labor Certification) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है, जिससे स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की चाह रखने वाले विदेशी वर्कर्स की राह में एक और रुकावट खड़ी हो गई है. इन कंपनियों में TCS, इंफोसिस, विप्रो, HCL, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी शामिल है. इसके साथ ही इस लिस्ट में माइक्रोसॉफ्ट और Adobe का भी नाम है.

इन कंपनियों से जुड़े नए PERM एप्लीकेशंस स्वीकार नहीं किए जाएंगे और पेंडिंग एप्लीकेशंस को भी प्रोसेस नहीं किया जाएगा. इस एक्शन के बाद माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों में पौने 2 परसेंट तक की गिरावट देखने को मिली है. भारतीय IT कंपनियों पर इसका असर शुक्रवार को देखने को मिलेगा.

PERM क्या है? भारतीयों पर इसका क्या असर होगा

PERM अमेरिका में ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक अहम चरण है. जब कोई अमेरिकी कंपनी किसी विदेशी कर्मचारी जैसे भारतीय IT प्रोफेशनल को लंबे समय के लिए अमेरिका में हायर करना चाहती है और उसके लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू करती है, तो उसे आमतौर पर पहले PERM सर्टिफिकेशन लेना होता है.

इसमें कंपनी को अमेरिकी श्रम विभाग को ये साबित करना होता है कि उस नौकरी के लिए पर्याप्त योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है।.साथ ही, विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरी या वेतन पर बुरा असर नहीं पड़ेगा.

अब सवाल है कि ये भारतीयों के लिए क्यों जरूरी खबर है. अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय IT प्रोफेशनल्स H-1B वीजा पर काम करते हैं. इनमें से जो लोग आगे चलकर ग्रीन कार्ड पाना चाहते हैं, उनके लिए PERM एक महत्वपूर्ण रास्ता है. इसलिए जिन कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित किया गया है, उनके यहां काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी हो सकती है या फिर लंबे समय के लिए रुकावट आ सकती है.

श्रम विभाग ने ये नहीं कहा कि इन कंपनियों के हर कर्मचारी का ग्रीन कार्ड रोक दिया गया है. असल में, कंपनियों पर गलत तरीके अपनाने का शक है और इसकी जांच चल रही है. जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक इन कंपनियों को PERM प्रक्रिया में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है. रॉयटर्स के मुताबिक, सरकार 9 यूनिवर्सिटियों की भी जांच कर रही है. इन पर आरोप है कि उन्होंने विदेशी छात्रों की भर्ती में गड़बड़ तरीके अपनाए.

अमेरिका ने ऐसा क्यों किया?

अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इन कंपनियों ने विदेशी वर्कर वीजा सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया और अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी वर्कर्स को प्राथमिकता दी.
श्रम सचिव कीथ सॉनडर्लिंग ने कहा कि 2009 से इन कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए एप्लीकेशन भेजीं, 2.30 लाख से ज्यादा H-1B मंजूरियां और 1 लाख से ज्यादा PERM सर्टिफिकेट हासिल किए.

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने गुरुवार को माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए कंपनी पर PERM प्रोग्राम के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने से पहले अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी में प्राथमिकता देनी चाहिए.

वांस के मुताबिक, सरकार की चल रही जांच के बाद माइक्रोसॉफ्ट के लिए PERM प्रोग्राम को निलंबित करने का फैसला लिया गया है. इसका मतलब है कि माइक्रोसॉफ्ट फिलहाल इस प्रक्रिया के जरिए अपने कुछ H-1B कर्मचारियों के लिए अमेरिका में परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा पाएगी.

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