बुधवार को एक स्मॉलकैप स्टॉक अचानक निवेशकों के रडार पर आ गया, नाम है Zaggle Prepaid Ocean Services, जो कि इंट्राडे में 17% तक उछल गया. वजह थी दिग्गज निवेशक विजय केडिया (Vijay Kedia) की कंपनी (Kedia Securities) की ओर से की गई बड़ी खरीदारी.
केडिया सिक्योरिटीज ने इस डिजिटल एक्सपेंस मैनेजमेंट और SaaS सॉल्यूशंस कंपनी Zaggle Prepaid के शेयरों में करीब 33 करोड़ रुपये का निवेश किया है और 20 लाख शेयर खरीदे हैं. इस खबर के सामने आते ही Zaggle के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली और शुरुआती कारोबार में स्टॉक करीब 17% तक उछल गया.
कैसे हुई डील
NSE के आंकड़ों के मुताबिक, केडिया सिक्योरिटीज ने मंगलवार को एक बल्क डील के जरिए Zaggle के 20 लाख शेयर औसत भाव 164.72 रुपये प्रति शेयर पर खरीदे. ये खरीदारी उस समय हुई जब Zaggle का शेयर करीब 52 हफ्ते के निचले स्तर 154.36 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. इसने आज यानी बुधवार 19 अगस्त को इंट्राडे में 194.70 रुपये का हाई बनाया है. हालांकि इसका 52 वीक हाई आज से ठीक एक साल पहले 19 अगस्त, 2025 को 417.60 रुपये था. यानी 52 हफ्ते के हाई से 60% तक टूटने के बाद ये बड़ी डील की गई है. मतलब ये कि विजय केडिया की कंपनी की Zaggle में एंट्री ऐसे समय हुई है जब स्टॉक पिछले कुछ महीनों से लगातार दबाव में था.
कमजोर नतीजों से मची थी हलचल
कमजोर Q1 FY27 नतीजों के बाद स्टॉक करीब 20% गिरकर lower circuit पर पहुंच गया था।
इसी हफ्ते की शुरुआत में कंपनी के Q1FY27 नतीजे आए थे, जो कि काफी कमजोर थे. उसके बाद ये शेयर 20% तक टूटकर लोअर सर्किट में चला गया था. कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 32% से ज्यादा घटकर ₹17.53 करोड़ रह गया. पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹26.11 करोड़ था.
कंपनी का एडजस्टेड EBITDA मार्जिन भी घटकर 8.2% पर आ गया, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 10.1% था. कंपनी के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह Dice के अधिग्रहण से जुड़े खर्चे रहे. जिनमें ट्रांजैक्शन कॉस्ट, कुछ वेंडरों को किए गए एकमुश्त भुगतान और 100 से ज़्यादा कर्मचारियों की रीलोकेशन से जुड़ा खर्च शामिल है. खास बात ये भी रही कि Dice के कॉन्ट्रैक्ट्स से होने वाली कमाई इस तिमाही के आंकड़ों में शामिल ही नहीं हो पाई थी. ये असर अब दूसरी तिमाही से नज़र आना शुरू होगा.
अब Zaggle की स्ट्रैटजी क्या है?
Zaggle के फाउंडर और एग्जिक्यूटिव चेयरमैन राज पी नारायणम के मुताबिक Zaggle अब प्रॉफिटेबल ग्रोथ के करीब एक दशक लंबे चरण से निकलकर कंसोलिडेशन और ट्रांसफॉर्मेशन के दौर में एंट्री ले रही है. कंपनी का फोकस अब अपने कोर बिजनेस को ज्यादा बेहतर बनाने, अपने प्लेटफॉर्म्स में AI का इस्तेमाल बढ़ाने और हाल में किए गए अधिग्रहण को आपस में जोड़ने पर है. इसके अलावा कंपनी पूंजी आवंटन को को बेहतर करने और कैश फ्लो डिसिपलिन मजबूत करने पर भी जोर दे रही है. कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में ज्यादा मार्जिन वाली ग्रोथ हासिल करना है. यानी कंपनी की रणनीति सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रॉफिटेबिलिटी और कैश जेनरेशन को भी बेहतर करने की है.
केडिया ने क्यों लगाया दांव
विजय केडिया ने इस कंपनी में फिर दांव क्यों लगाया होगा, जबकि कंपनी के तिमाही नतीजे भी अच्छे नहीं है. हालांकि उन्होंने खुद तो इसका कारण नहीं बताया, लेकिन हमारा जो अनुमान या एनालिसिस है, वो ये है कि केडिया ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस पर इतना बड़ा दांव चला है.
1- गिरावट में खरीदारी का मौका
Zaggle का शेयर 18 अगस्त को Q1 नतीजों के बाद 20% गिरकर करीब ₹160 पर आ गया और बाद में ₹154.40 का 52-week low भी बनाया. इसके ठीक बाद केडिया सिक्योरिटीज ने 20 लाख शेयर करीब ₹164.72 प्रति शेयर की औसत कीमत पर खरीदे, यानी खरीदारी उस समय हुई जब शेयर अपने 52-week high ₹417.40 से करीब 60% नीचे आ चुका था. इसलिए सबसे सीधा अनुमान यही है कि केडिया सिक्योरिटीज को मौजूदा गिरावट के बाद रिस्क रिवॉर्ड पहले से बेहतर नजर आया होगा
2- मुनाफा तो गिरा, लेकिन कमाई बढ़ी
भले ही Q1 FY27 में कंपनी का मुनाफा करीब 33% गिरकर ₹17.5 करोड़ रह गया, लेकिन रेवेन्यू 27.5% बढ़ा है. मतलब ये कि बिजनेस में डिमांड पूरी तरह से कमजोर नहीं पड़ी है. असली दबाव प्रॉफिट पर आया है, जो कि अगर टेम्पररी अधिग्रहण की लागत की वजह से है और रेवेन्यू ग्रोथ बनी रहती है तो, मार्जिन सुधरने पर कमाई में फिर तेज रिकवरी आ सकती है.
3- Dice अधिग्रहण का पूरा फायदा नहीं दिखा
Q1 में Zaggle के मार्जिन पर Dice अधिग्रहण का खर्च आया, लेकिन Dice से जुड़े ठेकों का रेवेन्यू पहली तिमाही में नहीं शामिल हुआ, मतलब कंपनी ने अधिग्रहण से जुड़ी लागतों को पहले ही शामिल कर लिया, लेकिन उसका जो रेवेन्यू कंट्रीब्यूशन था, वो आगे की तिमाहियों के लिए रखा है.
4- AI का एंगल
Zaggle सिर्फ प्रीपेड कार्ड्स वाली कंपनी नहीं है. इसका बिजनेस डिजिटल एक्सपेंस मैनेजमेंट और SaaS-बेस्ड सॉल्यूशंस पर बेस्ड है. कंपनी अब अपने प्लेटफॉर्म में AI को बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. अगर Zaggle अपने मौजूदा कस्टमर बेस में AI-पावर्ड सॉल्यूशंस को क्रॉस सेल कर पाती है तो ये इसका असर मार्जिन और रेवेन्यू दोनों पर दिख सकता है.
5- आकर्षक वैल्युएशन
इतनी बड़ी गिरावट के बाद Zaggle का वैल्युएशन काफी नीचे आया है. केडिया की खरीद के समय कंपनी का मार्केट कैप करीब 2,230 करोड़ रुपये था. यानी करीब ₹33 करोड़ में केडिया सिक्योरिटीज ने 1.48% हिस्सेदारी खरीदी है. ये छोटी-मोटी खरीद नहीं है
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। इसमें किसी भी शेयर, कंपनी या वित्तीय उत्पाद को खरीदने, बेचने या उसमें निवेश करने की सलाह या सिफारिश नहीं की गई है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है और शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों को लाभ के साथ-साथ नुकसान भी हो सकता है। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखें तथा आवश्यकता होने पर SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। किसी भी निवेश निर्णय के लिए पाठक स्वयं जिम्मेदार होंगे।

