हम म्यूचुअल फंड में निवेश तो करते हैं, लेकिन कई बार अपना मनचाहा कॉर्पस इकट्ठा नहीं कर पाते. प?ता है क्यों? क्योंकि हम अक्सर ये तय ही नहीं कर पाते कि हमारी सैलरी या कमाई के हिसाब से हमें हर महीने कितना निवेश करना चाहिए?
मान लीजिए किसी की नई-नई जॉब लगी है और पहली सैलरी उसके अकाउंट में आई है. अब सवाल ये है कि उस 50,000 रुपये या 1 लाख रुपये की सैलरी में से कितना पैसा SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में जाना चाहिए? ₹5,000, ₹10,000, ₹20,000 या इससे भी ज्यादा?
सिर्फ इतना ही नहीं, जैसे-जैसे आपकी सैलरी बढ़ती है, क्या आपकी SIP भी उसी रफ्तार से बढ़नी चाहिए? अगर आज आपकी SIP 10,000 रुपये है तो 5 साल बाद इसे कितना होना चाहिए? यानी SIP का सही अमाउंट तय करना सिर्फ आज की सैलरी का हिसाब नहीं है, बल्कि इसमें आपकी बढ़ती कमाई और आने वाले वित्तीय लक्ष्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
सैलरी का कितना हिस्सा SIP करें
अब अगर ये कहा जाए कि हर व्यक्ति को अपनी सैलरी का 25% या 40% SIP में निवेश करना ही चाहिए, तो ये सही तरीका नहीं होगा. क्योंकि SIP के लिए कोई एक तय प्रतिशत हर व्यक्ति पर लागू नहीं हो सकता. आपकी इनकम, खर्च, EMI, वित्तीय लक्ष्य, उम्र और निवेश की अवधि के हिसाब से सही SIP अलग-अलग हो सकती है.
तो फिर सवाल वही है, आखिर आपकी सैलरी का कितना हिस्सा SIP में जाना चाहिए?
देखिए, भविष्य में हमारे हाथ में कितनी रकम आएगी, ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपने निवेश की शुरुआत कैसे की है और आपकी निवेश रणनीति क्या रही है. वैसे तो इसका कोई तय फॉर्मूला नहीं है, मगर SIP की रकम तय करने के लिए 50-30-20 रूल को एक शुरुआती गाइड के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.
इस नियम के मुताबिक
- आपकी कमाई का 50% जरूरी खर्चों पर जा सकता है, जैसे घर का खर्च, किराया, EMI, बच्चों की फीस वगैरह
- 30% आप अपनी लाइफस्टाइल को मेनटेन करने पर खर्च कर सकते हैं, अपनी पसंदीदा चीजें खरीद सकते हैं
- बाकी बची हुई 20% की रकम को आप सेविंग्स में रख सकते हैं और निवेश के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं
यानी इस तरीके को अपनाने वाला व्यक्ति अपनी सैलरी का करीब 20% निवेश के लिए अलग रख सकता है. इसमें SIP भी शामिल हो सकती है. उदाहरण के लिए अगर किसी की सैलरी ₹50,000 है, तो 20% के हिसाब से करीब ₹10,000 बचत और निवेश के लिए अलग किए जा सकते हैं. इसमें से कितनी रकम SIP में लगानी है, यह व्यक्ति के बाकी वित्तीय लक्ष्यों और जरूरतों पर निर्भर करेगा.
ध्यान रहे, 50-30-20 Rule कोई अनिवार्य नियम नहीं है. ये सिर्फ एक बजटिंग फ्रेमवर्क है. अगर किसी व्यक्ति के खर्च ज्यादा हैं या उस पर बड़ी EMI चल रही है, तो उसके लिए 20% SIP भी मुश्किल हो सकती है. वहीं कम खर्च वाले व्यक्ति के लिए इससे ज्यादा निवेश करना संभव हो सकता है. इसलिए सबसे पहले आपको अपना बजट बनाना होगा, खर्चे जोड़ने होंगे उसके बाद ही आप तय करें कि कितना पैसा निवेश करना है.
पहले बचत, फिर खर्च
इस फॉर्मूले में एक दिक्कत है, वो ये कि इसमें इसें पहले खर्च करने के बाद जो पैसा बच रहा है, उसे निवेश करने की बात है. मगर, हमारे घरों में माता-पिता और बड़े-बुजुर्ग अक्सर एक बात कहते आए हैं. पहले बचत करो, फिर बाकी पैसों से खर्च चलाओ, लेकिन ज्यादातर लोग इसका उल्टा करते हैं. पूरे महीने अपनी जरूरतों और इच्छाओं पर पैसा खर्च करने के बाद महीने के अंत में जो रकम बचती है, उसे निवेश करने की कोशिश करते हैं. दिक्कत ये है कि कई बार महीने के अंत तक बचाने के लिए कुछ बचता ही नहीं.
इसलिए बेहतर तरीका ये है कि सैलरी आते ही सबसे पहले निवेश की रकम अलग कर दी जाए. पर्सनल फाइनेंस में इसे ‘Pay Yourself First’ कहा जाता है. मतलब ये कि सैलरी का एक हिस्सा पहले अपने भविष्य के लिए निकालिए और उसके बाद बचे हुए पैसों से महीने का खर्च मैनेज कीजिए.
मतलब 1 तारीख को जैसे ही सैलरी अकाउंट में आए, आप 2 तारीख से लेकर 5 तारीख के बीच में SIP कर डालिए. इससे सैलरी आते ही तय रकम निवेश हो जाएगी और बाकी बचे पैसों के हिसाब से आपको पूरे महीने का बजट बनाना पड़ेगा.
इसके दो फायदे होंगे –
- पहला फायदा तो यही है कि निवेश के लिए बची हुई रकम का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
- दूसरा फायदा, SIP की रकम पहले ही चली गई, तो बचे पैसों को संभालकर खर्च करेंगे
समय के साथ SIP की रकम बढ़ाते रहें
ये बहुत जरूरी है समझना. अक्सर लोग SIP तो शुरू कर देते हैं, लेकिन उसे हर साल बढ़ाना भूल जाते हैं. एक्सपर्ट्स ये कहते हैं कि हर साल आपको अपनी SIP 10% बढ़ानी चाहिए. आपको लग रहा होगा कि इससे कितना ही फर्क पड़ जाएगा. तो खुद ही देख लीजिए कितना फर्क पड़ेगा.
मान लीजिए आपने 25 साल की उम्र में 10,000 रुपये की SIP से शुरुआत की. 30 साल तक आपने निवेश जारी रखा, 12% के अनुमानित रिटर्न पर आप जरा ये कैलकुलेशन देखिए
आपने 30 साल में कुल 36 लाख रुपये का निवेश किया, अनुमानित रिटर्न 2.72 करोड़ रुपये और कॉर्पस बना 3 करोड़ 8 लाख रुपये. ये कॉर्पस तब है जब आपने पूरे 30 साल तक सिर्फ 10,000 रुपये हर महीना SIP दी.
SIP की रकम: ₹10,000
निवेश की अवधि: 30 साल
अनुमानित रिटर्न: 12%
कुल निवेश की रकम: ₹36,00,000
अनुमानित रिटर्न: ₹2,72,09,732
कुल रकम: ₹3,08,09,732
अब देखिए, अगर आप SIP की रकम को हर साल 10% बढ़ाते रहते, तो इसे स्टेप-अप SIP कहते हैं. तब आपके पास कितने पैसे होते, देखिए कैलकुलेशन
कुल निवेश की रकम हुई 1.97 करोड़ रुपये. अनुमानित रिटर्न हुआ 6.01 करोड़ रुपये और कुल कॉर्पस बना तकरीबन 8 करोड़ रुपये
SIP की रकम: ₹10,000
निवेश की अवधि: 30 साल
अनुमानित रिटर्न: 12%
स्टेप-अप: 10%
कुल निवेश की रकम: ₹1,97,39,283
अनुमानित रिटर्न: ₹6,01,18,480
कुल रकम: ₹7,98,57,763
तो आप समझे, सैलरी बढ़ने के साथ ही आपकी SIP की रकम भी बढ़ेगी तो ही मैजिक दिखता है. बिना स्टेप-अप के 30 साल में 3 करोड़ रुपये का कॉर्पस बन रहा था. जबकि स्टेप अप के साथ ये रकम दोगुना से भी ज्यादा बढ़कर 8 करोड़ रुपये हो जाती है.
इन बातों का ध्यान रखें
आप निवेश की शुरुआत जितनी जल्दी करेंगे, भविष्य में उतना बड़ा फंड इकट्ठा कर सकेंगे. क्योंकि जितना ज्यादा समय उतना ही ज्यादा कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है. इसलिए जो अपनी 20s में ही निवेश की शुरुआत करते हैं, वो 40s तक अपना मनचाहा फंड इकट्ठा कर लेते हैं और रिटायरमेंट लेने की सोचने लगते हैं.
देर में शुरुआत करने पर फंड तो इकट्ठा हो जाएगा, लेकिन तबतक आप उस पैसे का आनंद लेने के लिए शायद उतने जवान न रहें. इसलिए फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की सलाह होती है कि आपकी पहली सैलरी से ही आपके निवेश का सफर शुरू हो जाना चाहिए.
अगर, संभव हो तो किसी फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह जरूर लें, क्योंकि कई चीजें ऐसी होती हैं, जो आम लोगों को समझने में परेशानी हो सकती है. जैसे एसेट अलोकेशन. क्योंकि उम्र के साथ आपके पोर्टफोलियो में कौन सा एसेट कितने रेश्यो में होना चाहिए.
उम्र बढ़ने के साथ साथ आपके पोर्टफोलियो में रिस्क क्षमता कम होती जाती है, इसलिए इक्विटी से धीरे-धीरे पैसा निकालकर डेट की ओर ले जाना होता है. आमतौर पर निवेशक ऐसा नहीं कर पाते, तभी जरूरत होती है एक फाइनेंशियल एडवाइजर की. कब किस फंड से निकलना है, कब किस में एंट्री लेनी है. ये सारी बातें एक सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाजर ज्यादा बेहतर तरीके से मैनेज कर सकता है.

