स्टॉक मार्केट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स हटाने की मांग लंबे समय से होती रही है, लेकिन सरकार ने लोकसभा में साफ कर दिया है कि फिलहाल ऐसा नहीं होने वाला है, ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर सरकार विचार नहीं कर रही है.
लिस्टेड कंपनियों के शेयरों पर लगने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) हटेगा या नहीं, इसे लेकर बाजार में लंबे समय से अटकलें और मांगें चल रही थीं. सोमवार को सरकार ने इस पर विराम लगाते हुए साफ कर दिया कि रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए फिलहाल यह टैक्स खत्म करने की कोई योजना नहीं है.
लोकसभा में सरकार का जवाब
लोकसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार के पास अभी LTCG टैक्स वापस लेने की कोई योजना नहीं है. भले ही बाजार के कुछ हिस्सों से निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए इस टैक्स को हटाने की मांग उठती रही हो. उन्होंने कहा कि कैपिटल गेन्स टैक्स रेट्स समेत टैक्स से जुड़ी नीतियों की समीक्षा हर साल बजट बनाने के दौरान आर्थिक हालात को ध्यान में रखते हुए की जाती है.
निवेशक क्यों चाहते हैं राहत
ये सफाई ऐसे समय पर आई है जब निवेशकों और मार्केट पार्टिसिपेंट्स की तरफ से लगातार ये मांग उठ रही थी कि इस टैक्स को वापस लिया जाए. उनका तर्क ये था कि ये टैक्स लॉन्ग टर्म निवेश को प्रोत्साहित करने की बजाय हतोत्साहित करता है और टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न घटा देता है.
इसमें एक और एंगल भी जुड़ गया था, हाल ही में सरकार ने सरकारी सिक्योरिटीज़ (G-Secs) में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को टैक्स छूट का ऐलान किया था. इसके बाद कुछ वर्गों ने ये मांग रखी कि घरेलू निवेशकों और कुछ विदेशी निवेशकों के बीच टैक्स को लेकर बराबरी होनी चाहिए.
सरकार ने राहत क्यों नहीं दी
सरकार LTCG पर टैक्स को वापस क्यों नहीं ले रही, इसके पीछे वजह है कि इक्विटी गेन्स से होने वाली टैक्स कमाई में शानदार बढ़ोतरी. संसद में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इक्विटी ट्रांजैक्शंस पर LTCG टैक्स से मिलने वाला रेवेन्यू असेसमेंट ईयर 2025-26 में करीब 78% बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये हो गया, जो इससे पिछले साल 72,249 करोड़ रुपये था. जो ये साफ दिखाता है कि सरकारी खजाने में इस टैक्स का योगदान लगातार बढ़ रहा है. यही वजह है कि सरकार इसे हटाने के मूड में फिलहाल नहीं दिख रही.
अभी LTCG टैक्स के नियम क्या हैं
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स तब होता है जब लिस्टेड शेयर या इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड को एक साल से ज्यादा होल्ड करने के बाद बेचा जाता है. अभी के नियमों के मुताबिक
- 1 साल में ₹1.25 लाख से ज्यादा के गेन पर 12.5% टैक्स लगता है
- 1.25 लाख रुपये तक के गेन पर सरकार कोई टैक्स नहीं वसूलती
- लिस्टेड इक्विटी पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स पर 20% टैक्स लगता है
- ये दरें जुलाई 2024 के बजट में तय हुईं थीं, तब से नहीं बदली गईं
निवेशकों को बदलाव की उम्मीद क्यों थी
बीते एक साल के दौरान ये मुद्दा कई बार सुर्खियों में आया, खासकर तब जब शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रहा था और रिटेल निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी थी. कई निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स की दलील थी कि अगर LTCG टैक्स रेट कम की जाए या टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जाए, तो इससे लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा मिलेगा और मार्केट सेंटिमेंट भी बेहतर होगा.
LTCG घटाने के पीछे एक्सपर्ट्स के तर्क
- LTCG टैक्स की दर कम की जानी चाहिए
- या फिर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए
- इससे लंबी अवधि के निवेश को बढ़ावा मिलेगा
- निवेशकों का रिटर्न बेहतर होगा और बाजार का सेंटीमेंट मजबूत रहेगा.
कुछ निवेशकों ने ये भी मांग उठाई थी कि घरेलू निवेशकों को भी वही टैक्स राहत मिलनी चाहिए, जैसी सरकार ने हाल में गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश करने वाले कुछ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को दी है.
लेकिन, ये उम्मीदें बार-बार सरकार के रुख से टकराती रही हैं. इससे पहले भी संसद में इस टैक्स को खत्म करने से जुड़े सवाल उठ चुके हैं और हर बार वित्त मंत्रालय का यही जवाब रहा है कि इसे हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. सोमवार को भी कुछ नया नहीं हुआ, सरकार ने उसी जवाब को फिर से दिया जो पहले कई बार दे चुकी है.

