Patanjali in Insurance: आटा, घी, तेल, नमक, साबुन, टूथपेस्ट और आयुर्वेदिक दवाएं बेचने के साथ-साथ अब बाबा रामदेव (Baba Ramdev) बीमा भी बेचेंगे, क्योंकि इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने पतंजलि आयुर्वेद (Patanjali Ayurved) और DS ग्रुप को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस (Magma General Insurance) में हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है. ये कोई छोटी-मोटी डील नहीं, मीडिया रिपोर्ट्से के मुताबिक पूरे 4,500 करोड़ रुपये की है. ये जानकारी कंपनी ने एक एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए दी है.
क्या है ‘Patanjali-Magma Insurance’ डील?
डील के तहत पतंजलि आयुर्वेद को मैग्मा जनरल इंश्योरेंस में 73.56% हिस्सेदारी मिलेगी, जबकि DS ग्रुप 24.5% हिस्सा खरीदेगा. यानी दोनों के पास कंपनी की 98% हिस्सेदारी होगी. ये शेयर सनोती प्रॉपर्टीज और कुछ अन्य शेयरधारकों सेलिका डेवलपर्स और जैगुआर एडवाइजरी सर्विसेज़ से खरीदे जा रहे हैं.
IRDAI की मंजूरी मिलने के बाद पतंजलि मैगमा जनरल इंश्योरेंस की प्रमोटर कंपनी बन जाएगी. सिर्फ पतंजलि आयुर्वेद अकेले नहीं, बल्कि इससे जुड़े SR फाउंडेशन, रीति फाउंडेशन, RR फाउंडेशन, सुरुचि फाउंडेशन और स्वाति फाउंडेशन जैसी संस्थाएं भी इस पूरे अधिग्रहण में शामिल हैं.
16 महीने बाद मिली हरी झंडी
मार्च 2025 को पतंजलि-DS ग्रुप और मौजूदा शेयरधारकों के बीच शेयर परचेज़ एग्रीमेंट (SPA) पर दस्तखत हुए थे. इसके बाद 12 मार्च 2025 को कंपनी ने इसकी जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों को दी थी. फिर, रेगुलेटरी रिव्यू प्रोसेस में देरी हुई, जिसकी वजह से डील पूरी करने की डेडलाइन को 12 मार्च 2026 को आगे बढ़ाया गया. इसके बाद 28 जुलाई 2026 को आखिरकार IRDAI ने अपनी अंतिम मंज़ूरी दी. मतलब, डील पूरा होने में करीब 16-17 महीने लगे.
अब सिर्फ 3 महीने का ही वक्त
इस डील को हरी झंडी इंश्योरेंस एक्ट, 1938 की धारा 6A और IRDAI के 2024 के रेगुलेशन के तहत दी गई है. कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि यह मंज़ूरी IRDAI की चिट्ठी की तारीख से तीन महीने तक ही वैध रहेगी. यानी इस दौरान डील को पूरी तरह अमल में लाना ज़रूरी होगा.
इससे पहले इस डील को कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया यानी CCI से भी हरी झंडी मिल चुकी है. CCI ने अपनी मंज़ूरी में साफ कहा था कि इस डील से किसी भी बाज़ार में कंपटीशन पर कोई निगेटिव असर नहीं पड़ेगा. इसीलिए इसे ग्रीन चैनल रूट के तहत मंज़ूरी दी गई.
डील का Patanjali के लिए क्या मतलब?
यहां ये समझना जरूरी है कि पतंजलि कोई नया इंश्योरेंस बिजनेस नहीं शुरू करने जा रही है, बल्कि उसने एक पहले से जमे-जमाए बिजनेस को खरीदा है.जिसके लिए लाइसेंस पहले से ही मिला हुआ है. IRDAI की मंज़ूरी का मतलब है कि अब पतंजलि मैग्मा जनरल इंश्योरेंस की प्रमोटर बन सकेगी, और कंपनी में पूंजी डालकर उसकी ग्रोथ और सॉल्वेंसी को मज़बूत कर सकेगी.
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पतंजलि इंश्योरेंस में क्यों उतर रही है?
पतंजलि का FMCG से आगे बढ़कर फाइनेंशियल सर्विसेज़ में कदम रखने का बड़ा प्लान है. पतंजलि के पास पूरे देश में एक मज़बूत रिटेल और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क है, स्टोर्स, मॉडर्न ट्रेड चेन्स और पतंजलि ब्रांड के अपने आउटलेट्स हैं. कंपनी की योजना है कि वो इसी विशाल नेटवर्क के दम पर मैग्मा जनरल इंश्योरेंस को खासतौर पर सेमी-अर्बन और ग्रामीण बाज़ारों तक पहुंचाए, यानी वो इलाके, जहां बड़ी इंश्योरेंस कंपनियों की पकड़ अभी भी कमज़ोर है.
मैग्मा जनरल इंश्योरेंस की सेहत कैसी है?
अब बात करते हैं उस कंपनी की, जिसे पतंजलि खरीद रही है। मैग्मा जनरल इंश्योरेंस फिलहाल हेल्थ, व्हीकल, प्रॉपर्टी समेत 70 से ज़्यादा प्रोडक्ट्स ऑफर करती है. कंपनी का प्रदर्शन हाल के सालों में लगातार बेहतर हुआ है. FY21 से FY25 के बीच इसका ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम सालाना करीब 22% की दर से बढ़ा है, जो पूरे जनरल इंश्योरेंस इंडस्ट्री की औसत 10% ग्रोथ से कहीं ज़्यादा है.
घाटे से मुनाफे तक का सफर भी दिलचस्प है.FY21 में कंपनी को 141 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, लेकिन FY25 आते-आते कंपनी मुनाफे में आ गई. FY26 के पहले 9 महीनों में तो कंपनी ने 27 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट भी कमा लिया. इतना ही नहीं, दिसंबर 2025 तक कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो 1.81 गुना था, जबकि रेगुलेटरी जरूरत सिर्फ 1.50 गुना की है, यानी कंपनी के पास ज़रूरत से करीब 268 करोड़ रुपये ज़्यादा पूंजी मौजूद है.
अब आगे क्या?
अब निवेशकों और बाज़ार की नज़र इस पर रहेगी कि पतंजलि और DS ग्रुप, मैग्मा जनरल इंश्योरेंस को किस तरह अपने साथ इंटीग्रेट करते हैं, और आने वाले तीन महीनों के भीतर यह डील पूरी तरह अमल में आ पाती है या नहीं. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो यह पतंजलि के लिए FMCG से आगे बढ़कर फाइनेंशियल सर्विसेज़ की दुनिया में एक बड़ी और अहम एंट्री साबित हो सकती है.
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