अगर आपने EPF का क्लेम किया है या भविष्य में PF निकालने की सोच रहे हैं तो ये खबर आपके बहुत जरूरी है. EPFO के नए डिजिटल सिस्टम CITES (Centralised IT Enabled System) को PF क्लेम का निपटारा तेज करने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन अब इसी सिस्टम को लेकर EPF अधिकारियों के संगठन ने गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि कई PF क्लेम 20 दिन से ज्यादा समय से पेंडिंग पड़े हैं.
मामला क्या है?
EPF अधिकारियों की एसोसिएशन ने श्रम एवं रोजगार मंत्री को एक चिट्ठी लिखी है, जो कि EPFO की पॉलिसी बनाने वाली सबसे बड़ी संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) के चेयरमैन भी हैं. इस चिट्ठी में संगठन ने मांग की है कि सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए EPFO में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रोफेशनल्स की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए.
PFO का नया सिस्टम क्यों लाया गया था?
EPFO के कामकाज को ज्यादा आधुनिक बनाने, क्लेम सेटलमेंट में लगने वाले समय को घटाने और मानवीय दखल को कम करने के लिए CITES को लागू किया गया था. मकसद था कि ज्यादातर क्लेम्स सिर्फ 2-3 दिनों के भीतर अपने-आप प्रोसेस हो जाएं, लेकिन हुआ इसका उल्टा. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों के संगठन ने बताया कि सिस्टम लागू होने के बाद भी कई क्लेम्स 20 दिन से ज्यादा समय तक अटके पड़े हैं.
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अब दिक्कत क्या हो रही है?
EPF अधिकारियों के संगठन का कहना है कि EPFO के पास बहुत सीमित IT क्षमता है, इसके बावजूद एक पूरी तरह टेक्नोलॉजी-बेस्ड सिस्टम को चलाने की कोशिश कर रहा है. EPFO में बीते कई सालों से टेक्निकल में सीधी भर्तियां नहीं हुईं, CTO भी नहीं है और IT एक्सपर्ट की टीम भी नहीं है.
- ISD में सीधी भर्ती नहीं
संगठन ने अपनी चिट्ठी में कहा कि EPFO के Information Services Division (ISD) में कई सालों से सीधी भर्ती नहीं हुई है, हैरानी की बात ये है कि इस विभाग में आखिरी भर्ती साल 2004 में हुई थी. यानी करीब दो दशकों से तकनीकी विभाग में नई भर्ती नहीं की गई है. - 3 साल से CTO नहीं
एक और बड़ी बात जो इस चिट्ठी में कही गई कि EPFO पिछले तीन वर्षों से एक फुल टाइम Chief Technology Officer (CTO) नियुक्त नहीं कर पाया है. किसी भी बड़े डिजिटल संगठन के लिए CTO का पद बहुत जरूरी माना जाता है. यही अधिकारी नई तकनीकों की योजना, सिस्टम की निगरानी और तकनीकी फैसले लेता है. एसोसिएशन का मानना है कि अगर इतनी बड़ी संस्था में कोई परमानेंट CTO नहीं होगा, तो बड़े डिजिटल प्रोजेक्ट्स को सही तरीके से लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. - IT एक्सपर्ट टीम नहीं
EPF ऑफिसर्स एसोसिएशन ने एक और कमी गिनाई है, उनका कहना है कि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम बाहरी कंपनियों को देना गलत नहीं है, दुनिया भर में ऐसा किया जाता है, मगर बाहरी एजेंसियों के काम की निगरानी, क्वालिटी की जांच और सही तकनीकी फैसले लेने के लिए संगठन के अंदर एक अनुभवी IT विशेषज्ञों की टीम का होना बहुत जरूरी है. मतलब, सिर्फ आउटसोर्सिंग से काम नहीं चलेगा, EPFO को अपनी तकनीकी क्षमता भी मजबूत करनी होगी. - कर्मचारियों की कमी
संगठन ने तकनीकी समस्याओं के साथ-साथ स्टाफ की कमी का मुद्दा भी उठाया है. चिट्ठी के मुताबिक, EPFO में आखिरी बार Workload Assessment FY2016-17 में किया गया था. उसके बाद से EPFO के सदस्यों की संख्या और जिम्मेदारियां दोनों काफी बढ़ चुकी हैं. इसके बावजूद कई कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है. खासतौर पर मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों के EPFO कार्यालयों पर अतिरिक्त काम का दबाव बताया गया है.
क्या लोगों के PF क्लेम पर असर पड़ेगा?
EPFO ऑफिसर्स के संगठन ने इतनी सारी कमियां गिनाईं हैं. तो क्या इसका असर आपके PF क्लेम पर पड़ेगा. देखिए, जिन भी चिंताओं का जिक्र किया गया है, उस आधार पर ये दावा करना कि PF क्लेम सेटलमेंट में देरी होगी, अभी जल्दबाज़ी होगी. मतलब जिन लोगों ने भी PF क्लेम किया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. अपने क्लेम का स्टेटस रेगुलर चेक करते रहें. अगर एक समय से ज्यादा वक्त लग रहा है तो EPFO के आधिकारिक पोर्टल या अपने क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है.
हालांकि एसोसिएशन का कहना है कि EPFO की सेवाओं का सीधा असर करीब 25-35 करोड़ लोगों पर पड़ता है, जिनमें सब्सक्राइबर्स, पेंशनभोगी और उनके परिवार शामिल हैं.
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