Gold Silver Price Today: सोने से ज्यादा चांदी चमकी! घरेलू बाजार में भाव 3,700 रुपये चढ़े, 2026 में कहां जाएंगी कीमतें?

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Silver Rally Surpasses Gold: Domestic Rates Jump

जब पूरी दुनिया सोने पर नज़रें गड़ाए बैठी थी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतें पिछले हफ्ते करीब 10% तक उछल गईं, ये तेजी इस हफ्ते की शुरुआत में भी देखने को मिल रही है. कॉमेक्स पर चांदी वायदा सोमवार को सुबह 11 बजे 1.5% की तेजी के साथ 64.463 डॉलर प्रति आउंस पर ट्रेड कर रहा था. घरेलू बाज़ार में MCX पर चांदी वायदा 3,700 रुपये प्रति किलो की ज़ोरदार तेज़ी के साथ 2.35 लाख के ऊपर ट्रेड कर रहा है. शुक्रवार को चांदी वायदा 2,31,466 रुपये पर बंद हुआ था.

चांदी की कीमतों में तेज़ी क्यों है?

चांदी की कीमतों में आई इस ज़ोरदार तेज़ी के पीछे तो कई वजहें हैं,लेकिन जो सबसे ताजा कारण है वो है अमेरिकी लेबर मार्केट के खराब आंकड़े जो कि शुक्रवार को आए थे. अमेरिका में जुलाई के महीने में 23,000 नौकरियां घट गई हैं. जबकि बाज़ार को 80,000 नई नौकरियां बढ़ने की उम्मीद थी. इसके अलावा, जून महीने के रिवाइज्ड आंकड़ों को भी घटाकर 20,000 कर दिया गया है. रिवीजन के बाद मई और जून को मिलाकर कुल 103000 नौकरियां कम हो गईं हैं.

कमज़ोर रोज़गार आंकड़ों की वजह से अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के सामने जल्द ब्याज दरें बढ़ाने का मौका नहीं होगा. खराब रोज़गार के आंकड़ों का मतलब है कि अमेरिका की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. CME फेड वॉच के मुताबिक 16 सितंबर को आने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी में ब्याज दरें 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाने की संभावना घटकर 44% से भी नीचे आ गई है. जो कि इस महीने की शुरुआत में 67% हुआ करती थी. अब 56% संभावना है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा.

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ऐसी परिस्थितियों में सोने के साथ साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिलती है, लेकिन कई बार हम चांदी में ज्यादा तेज़ रैली देखते हैं. इसके पीछे एक कारण ये है कि सोने को हम सिर्फ एक सुरक्षित निवेश मानते आए हैं, जो कि सेफ हेवेन डिमांड पर चलता है. लेकिन चांदी इन्वेस्टमेंट डिमांड और इंडस्ट्रियल डिमांड दोनों मोर्चों पर चलता है. इसलिए कीमती धातुओं में जोखिम के समय खरीदारी की बात आती है, चांदी अक्सर सोने से ज्यादा चलता है

समझिए चांदी की चाल

इस साल की शुरुआत में यानी जनवरी, 2026 में चांदी वायदा 115 डॉलर तक भी पहुंचा था, लेकिन वहां से ये जरबदस्त करेक्शन देखने को मिला, उस पीक से अबतक 44% तक लुढ़क चुका है. सभी मेटल्स में चांदी एक ऐसी कीमती धातु है जो दोनों तरफ बहुत तेज रिएक्ट करती है. सप्लाई में कमी आने पर जितनी तेजी से ये ऊपर जाती है, उतनी ही तेजी से ये नीचे आती है. मतलब, जनवरी में जब शॉर्टेज आई तो ये 115 डॉलर तक चढ़ गया और जब सप्लाई शॉर्टेज सुधरी ये उतनी ही तेजी से गिरता हुआ 64 डॉलर पर चला गया. इसी दोहरे स्वभाव की वजह से जब बाज़ार में तेज़ी आती है, तो चांदी सोने से भी आगे निकल जाती है, लेकिन जब मंदी आती है, तो यह सोने से कहीं ज़्यादा बुरी तरह गिरती है.

चांदी एक इंडस्ट्रियल मेटल है, इसकी आधी डिमांड सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), इलेक्ट्रॉनिक्स और अब AI डेटा-सेंटर हार्डवेयर से आती है. साथ ही, एक इन्वेस्टमेंट एसेट भी है बाकी आधी डिमांड ज्वेलर्स और निवेशकों से आती है.

सोने की कीमतों में भी तेज़ी

पिछले कॉमेक्स सोना वायदा ने 7.65% का रिटर्न दिया. शुक्रवार को सोना वायदा ने 4,400 डॉलर का एक महत्वपूर्ण स्तर पर पार किया. आज 10 अगस्त को सोना वायदा 4,400 डॉलर प्रति आउंस के ऊपर टिकने की कोशिश कर रहा है. अभी 11:45 बजे के करीब सोना वायदा 4,404 डॉलर के करीब पॉजिटिव लेकिन फ्लैट ट्रेड कर रहा है. सोना वायदा ने इंट्राडे में 4,412.09 डॉलर को भी छुआ. हालांकि ये दिन में 4,400 डॉलर के नीचे भी गया, लेकिन एक दायरे में ही कारोबार करता हुआ दिख रहा है. सोना इस वक्त अगर अमेरिका की खराब जॉब रिपोर्ट से सपोर्ट हासिल कर रहा है तो ईरान और अमेरिका के बीच डील नहीं होने की अनिश्चतता का सामना भी कर रहा है. सोने में आज ज्यादा हलचल शायद इसलिए भी नहीं दिख रही है, क्योंकि ट्रेडर्स शायद किसी ट्रिगर का इंतजार कर रहे है.

चांदी पर ब्रोकरेजेस का नज़रिया

इतने उतार-चढ़ाव को देखते हुए मार्केट में चांदी को लेकर एक्सपर्ट्स की राय काफी अलग-अलग है. कोई बहुत बुलिश है तो कोई थोड़ा सचेत.

सिटी बैंक 2026 के लिए $150 के अपने बड़े लक्ष्य पर टिका हुआ है और अपना टारगेट भी बढ़ाया है. इसका मानना है कि इंडस्ट्रियल डिमांड और जियो-पॉलिटिक्स की वजह से चांदी की कीमतें तेज़ी से ऊपर जाएंगी.

UBS ने अपने साल के अंत का लक्ष्य $85 से घटाकर $80 कर दिया है. इसका तर्क है कि कीमतें बहुत ऊंची होने की वजह से सोलर और ज्वेलरी सेक्टर में मांग कम हो रही है. इसलिए कीमतों पर दबाव रहेगा.

जे पी मॉर्गन ने $81 का औसत लक्ष्य रखा है. साथ ही एक चेतावनी भी दी है कि जैसे सेंट्रल बैंक सोने में मंदी आने पर लगातार खरीदारी करते हैं, वैसा सपोर्ट चांदी को हासिल नहीं है. इस वजह से मंदी के समय चांदी, सोने के मुकाबले ज़्यादा कमज़ोर साबित हो सकती है.

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